रात का खौफ और लाल रूमाल का खौफनाक रहस्य - (भाग 3)|Hindi bhoot ki kahani
1. पहली खौफनाक रात - दीवारों पर चलते कदमों की आहट रमणा ने आदामू के दिए हुए उस अभिमंत्रित नींबू को अपनी मुट्ठी में कसकर पकड़ा। उसने अपने कमरे की सारी लाइट्स पूरी तरह से बंद कर दीं और उस लाल नींबू को अपने सिरहाने के नीचे रखकर लेटा रात के करीब 12 बज चुके थे। बाहर घुप्प अंधेरा और सन्नाटा था, लेकिन कमरे के अंदर का माहौल पल-पल डरावना होने लगा रमणा की धड़कनें इतनी तेज़ हो गई थीं कि सन्नाटे में उसे अपने ही दिल के धड़कने की आवाज़ साफ सुनाई देने लगी तभी अचानक उसे महसूस हुआ कि कमरे में कोई और भी मौजूद है। रात का 1 बजते-बजते ऐसा लगने लगा जैसे दीवार के पीछे से कोई बात कर रहा हो। फिर दीवारों और छत पर किसी के उल्टे कदमों से चलने की स्पष्ट आहटें सुनाई देने लगीं—छप... छप... छप! जैसे कोई इंसान छिपकली की तरह छत पर चल रहा हो अचानक रमणा के कानों के ठीक पास किसी की ठंडी सांसें महसूस हुईं और एक भयानक फुसफुसाहट गूंजी—"इस नींबू को फेंक दे... इसे बाहर फेंक दे, वरना मैं तुझे यहीं इसी पल दबोच लूंगी!" उधर मुप्पल्लपाडु में आदामू का भी ठीक एसा ही चल रहा थ...