लाल साड़ी वाली चुडैल,हिंदी चुडैल की कहानी ,भूतों वाली कहानी|Hindi chudail ki kahani ,bhoot ki kahani
अमावस्या की रात और लाल रुमाल 
रामगोपालपुरम के युवा नेता रमना का पूरे इलाके में काफी दबदबा था। रात के करीब 12 बज रहे थे, जब एक जरूरी काम के सिलसिले में उसे पड़ोसी गांव मुप्पल्लापाडु जाना पड़ा।
थार रोड का रास्ता बहुत लंबा था, और दिनभर की भागदौड़ के बाद रमना अपनी नींद बिल्कुल नहीं गंवाना चाहता था।
जल्दी पहुंचने की जल्दबाजी में उसने मिट्टी और कंकड़ से भरा एक कच्चा शॉर्टकट रास्ता चुन लिया।
यह रास्ता बेहद सुनसान और उबड़-खाबड़ था, जहां से दिन ढलने के बाद आमतौर पर लोग गुजरते नहीं थे।
उसकी पुरानी बाइक की हेडलाइट भी काफी धीमी रोशनी दे रही थी, जिससे आगे का रास्ता साफ दिखाई ही नहीं दे रहा था।
घड़ी की सुइयां आगे बढ़ रही थीं और ठीक 12:30 बजे अमावस्या की रात शुरू होने वाली थी।
चारों ओर एक अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ था। रमना धीरे-धीरे गड्ढों से बचते हुए आगे बढ़ रहा था कि तभी रास्ते के ठीक बीचों-बीच उसे एक गहरा लाल रुमाल पड़ा दिखाई दिया।
इससे पहले कि रमना बाइक मोड़ पाता, उसका अगला पहिया सीधे उस लाल रुमाल के ऊपर से गुजर गया। ठीक उसी पल, आसमान में बिना बादलों के बिजली कड़कने जैसी जोरदार आवाज गूंजी और रमना को अपनी पीठ पर भारी भारी सा लगने लगा।
पीछे मुड़कर देखा तो उसके रोंगटे खड़े हो गए—सफेद बिखरे बालों वाली एक डरावनी आकृति उसकी बाइक की पीछे की सीट पर आकर बैठ चुकी थी।
उस साए ने बर्फ जैसे ठंडे दोनों हाथों से रमना को कसकर जकड़ लिया।
दहशत के मारे रमना के मुंह से निकला, "अरे! यह क्या बला है!"
घबराहट में उसने बिना आगे-पीछे देखे अचानक पूरी ताकत से ब्रेक लगा दिया।
कंकरीले रास्ते पर बाइक तेजी से फिसल गई और रमना गाड़ी समेत दूर जा गिरा। उसके हाथों और पैरों पर कई जगह खरोंचें आ गईं दर्द होने लगा।
सन्नाटे में फंसी बाइक और दहशत का मंजर
दिल की धड़कनें तेज थीं। रमना ने खुद को संभाला और लड़खड़ाते कदमों से उठकर बाइक को सीधा किया। उसने गाड़ी स्टार्ट करने के लिए किक मारी, तो इंजन से आवाज आई—थ्रर्र... थ्रर्र... और बाइक बंद हो गई।
उसने पेट्रोल की टंकी को दोनों तरफ हिलाया ताकि तेल का बहाव ठीक हो सके। उसने दोबारा किक मारी—थ्रर्र... थ्रर्र... थ्रर्र... लेकिन गाड़ी फिर खामोश हो गई। चार-पांच बार लगातार किक मारने के बाद रमना बुरी तरह थक गया और उसके माथे से ठंडा पसीना बहने लगा।
रात के घने सन्नाटे में इस वीरान रास्ते पर फंसे रहने का डर अब गहरा हो गया था।
थक-हारकर रमना ने हाथ जोड़ते हुए कहा, "हे भगवान! किसी तरह गाड़ी स्टार्ट करवा दे।"
यह कहते हुए उसने पूरी ताकत से किक पर एक जोरदार लात मारी।
टर्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र्र...!
इंजन एक झटके में स्टार्ट हो गया। रमना ने बिना एक पल गंवाए एक्सीलेटर खींचा और मुप्पल्लापाडु की तरफ गाड़ी दौड़ा दी।
रात के 2:30 बजे डॉक्टर आदम का दवाखाना
डॉक्टर आदम: "अरे रमना भाई! सब खैरियत तो है? इतनी आधी रात को इस हाल में? शरीर पर इतनी चोटें कैसे लग गईं?"
रमना: "सब ठीक है भाई। दरअसल अपने गांव से यहां कृपाल से मिलने आ रहा था। शॉर्टकट वाले रास्ते पर कंकड़ की वजह से बाइक फिसल गई और मैं गिर पड़ा। हाथ-पैर में खरोंचें आई हैं, थोड़ा साफ करके दवा लगा दो भाई, बहुत जलन हो रही है।"
डॉक्टर आदम: "अरे यह भी कोई पूछने की बात है! पहले अंदर आओ, आराम से बैठो और थोड़ा पानी पियो।"
डॉक्टर आदम ने रमना को बिठाया, गर्म पानी और एंटीसेप्टिक से उसके घावों को साफ किया, मरहम लगाया और दर्द व संक्रमण रोकने के लिए पेनकिलर और एंटीबायोटिक गोलियां दीं।
पट्टी बांधते हुए डॉक्टर आदम ने पूछा, "वैसे भाई, ऐसी भी क्या आफत आ गई थी जो इस समय निकलना पड़ा? कृपाल से ऐसा भी क्या जरूरी काम था?"
रमना: "भाई, नए घर के काम के लिए कृपाल के पास बिजली का कुछ सामान और वायरिंग के तार रखे हुए थे। सुबह जल्दी इलेक्ट्रीशियन आने वाला है। अगर मैं सुबह आता तो देर हो जाती और कारीगर दूसरा काम पकड़ लेता। इसलिए रात में ही सामान लेने आ गया।"
डॉक्टर आदम: "अच्छा यह बात है, पर भाई रात के समय कच्चे रास्ते से संभलकर निकला करो। अब दवा ले ली है, आराम से जाना।"
दवाखाने से निकलकर रमना कृपाल के घर पहुंचा। वहां सामान इकट्ठा करते और चाय-पानी पीते हुए सुबह के 4:00 बज गए। थोड़ा हल्का महसूस होने के बाद वह बिजली का सामान और तारों के बंडल बाइक पर बांधकर उसी रास्ते से वापस अपने गांव के लिए चल पड़ा।
गांव से कुछ दूरी पर पहुंचते ही रमना को सड़क किनारे एक अकेली लड़की खड़ी दिखाई दी, जो हाथ हिलाकर लिफ्ट मांग रही थी। लड़की ने लाल रंग की साड़ी पहनी हुई थी और अपना सिर पल्लू से पूरी तरह ढकी हुए थी।
इस वीरान जगह पर इतनी सुबह उस महिला को देखकर रमना ने बाइक रोक दी।
रमना: "हां आप कौन, इतनी सुबह कहां जाना है?"
लड़की: "ज्यादा दूर नहीं । यहीं आगे डांथोरपल्ली के पास जो नींबू के खेत हैं, बस वहां तक छोड़ दीजिए। वहां मजदूरी करने जाना है, सुबह 6:00 बजे से पहले हाजिरी लगवानी पड़ती है।"
रमना: "हां ठीक है, बैठ जाओ। मैं भी उसी रास्ते से जा रहा हूं।"
लड़की: "बहुत शुक्रिया भैया।"
लड़की चुपचाप बाइक की पिछली सीट पर बैठ गई। पूरे सफर के दौरान वह एकदम शांत रही। रमना ने नींबू के खेतों से थोड़ा आगे बाइक रोकी और कहा, "लो , तुम्हारा खेत आ गया।" लड़की बिना कुछ बोले उतरी और पगडंडी की तरफ बढ़ गई।
रमना ने बिना रुके गाड़ी आगे बढ़ा दी और ठीक सुबह 6:00 बजे अपने गांव रामगोपालपुरम पहुंच गया। घर पहुंचते ही उसने सारा सामान अपने नए मकान में सुरक्षित रख दिया। रातभर की भागदौड़ और दर्द से शरीर टूट रहा था, इसलिए वह तौलिया लेकर सीधे नहाने चला गया।
वह अभी तक इस बात से अनजान था कि रात का वह लाल रुमाल और सुबह की वह लाल साड़ी वाली लड़की आपस में किस खौफनाक राज से जुड़े थे...
(अब आगे की कहानी अगले दिन भाग 2 में पढ़िए...)
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