अ मैजिकल पेंटर 3 | Hindi Full Suspense Story | Feel The Stories
अ मैजिकल पेंटर पार्ट 3
नोट: इस कहानी के पात्र और दृश्य केवल काल्पनिक हैं। इसमें इस्तेमाल किए गए पात्र, दृश्य और नाम किसी से संबंधित नहीं हैं, यह कहानी केवल मनोरंजन के लिए लिखी गई है।
सपना भी शायद सच हो, या सच में ही कोई सपना छुपा हो
हृदय और अमित, इतना सब होने के बावजूद उनकी नींद नहीं टूटी थी। लेकिन हृदय को अंदर ही अंदर लग रहा था जैसे वो कोई सपना देख रहा हो और उसके अंतर्मन को सब समझ आ रहा हो।
सामने सब कुछ घट रहा था... सपने में सच होता दिख रहा था, लेकिन हृदय इसे महज़ एक सपना समझकर आधे होश और आधे नशे में पड़ा रहा।
लेकिन हृदय को जो बातें थोड़ी-थोड़ी समझ आ रही थीं, वो असल में सच थीं।
वहाँ हो रही सारी चीज़ों को देखते हुए हृदय डर के मारे चुपचाप पड़ा रहा।
यमदूतों को डर था कि यमधर्मराज क्या देख लेंगे, इसलिए वे दोनों डर के मारे थर-थर काँपते हुए उन दोनों की आत्माओं को जहाँ वे सोए हुए थे वहीं छोड़ आए, और वहाँ हृदय के पास पेंट करने वाला एक रोलर और एक ब्रश रख दिया।
अ मैजिकल पेंटर ऑन द वे
उन्हें बिना जगाए और बिना परेशान किए वे वहाँ से हड़बड़ी में निकल गए। असली अमित और हृदय को ले जाने के लिए वे तुरंत अपने भैंसे पर सवार होकर चले गए।
सुबह उठकर हृदय और अमित ने देखा तो उनके पूरे शरीर में भयंकर दर्द हो रहा था, जैसे किसी ने पीटा हो या हड्डियाँ तोड़कर जोड़ी हों।
- सिर भी भारी लग रहा था, जैसे मरोड़ दिया गया हो।
- ऐसा लग रहा था मानो वे अभी-अभी दोबारा पैदा हुए हों।
- इसी वजह से वे सुबह-सुबह उठ नहीं पाए और फुटपाथ पर वैसे ही पड़े रहे। 30 मिनट बाद जब तेज़ भूख लगी, तो दर्द को भूलकर उन्हें उठना ही पड़ा।
दोनों उठे, बाल्टी के पानी से मुँह धोया और थोड़ी देर राहत की साँस ली। तभी हृदय की नज़र वहीं पड़े उस ब्रश और रोलर पर गई।
"अरे अमित! हमारे सोने की जगह पर ये सब कहाँ से आ गया?" हृदय ने कहा।
भूख की लड़ाई और अनजान मदद
उस रोलर और ब्रश को हृदय ने अपने कपड़ों के अंदर छुपा लिया ताकि किसी को दिखे नहीं। क्या करें कुछ समझ नहीं आ रहा था, दोनों एक तरफ बैठकर सोचने लगे कि भूख कैसे मिटाएँ और एक-दूसरे का मुँह देखने लगे।
तभी एक महान इंसान आया और उन्हें 4 इडली दे गया।
"हम्म, राहत मिली!" यह सोचकर दोनों ने 4 इडली आधा-आधा बाँटकर खा ली। पेट थोड़ा भरा तो भूख की कीमत, देश की गरीबी और सिस्टम के बारे में बातें करने लगे...
हृदय: "हम कितनी भी मेहनत कर लें, खाने के लिए भी पूरा नहीं पड़ता। हर चीज़ की कमी बनी रहती है और ज़िंदगी वहीं की वहीं सिमट कर रह जाती है।"
"भगवान साथ नहीं दे रहा, हममें कोई कमी है या फिर यह सिस्टम की नाकामी है?"
अमित: "मुझे समझ नहीं आ रहा... तू अचानक ये नई बातें क्यों कर रहा है?"
हृदय: "मैं सही कह रहा हूँ। मैं बचपन से देख रहा हूँ, मेरे बचपन में सोना ₹2,500 प्रति ग्राम मिलता था। उस समय मेरे पिता जी की दिहाड़ी ₹20 रोज़ थी। यानी मेरे पिता जी को 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए 6 महीने काम करना पड़ता था। आज हम रोज़ ₹200 कमाते हैं, लेकिन सोना ₹15,000 प्रति ग्राम हो गया है। यानी आज 1 ग्राम सोना खरीदने के लिए 5 महीने मेहनत करनी पड़ेगी।"
अमित: "तू जो कह रहा है वो ठीक है हृदय, पर यह सब बातें अभी हमारे किस काम की?"
हृदय: "तू थोड़ी देर ध्यान से सुन।"
अमित: "अच्छा बता।"
हृदय: "पैदा होने से लेकर आज तक मेहनत ही कर रहे हैं, बड़े हो गए फिर भी घिस ही रहे हैं। पानी तक के लिए तरस रहे हैं।"
"जिस देश में पैसा नहीं है, वहाँ अमीर आदमी की कमाई रोज़ बढ़ती जा रही है। इतने गरीब देश में यह पैसा आ कहाँ से रहा है?"
"भूखा आदमी रोज़ खाने के लिए तरसता है, और जिसके पास है वो दबाकर बैठा है।"
अमित: "तू सच कह रहा है।"
हृदय: "हमारा देश हर महीने हमारी ज़िंदगी चलाने लायक पैसा छापता है। यानी जो पैसा हमारे हाथ में आना चाहिए, उसे कोई और छुपाकर बैठा है। इसी वजह से खाने के बिना न जाने कितने लोग मर जाते हैं, लेकिन अमीरों की तिजोरियाँ काले धन से भरी पड़ी हैं।"
असली वजह और सच हृदय अब और नहीं छुपा पा रहा है
"अगर सब कुछ सही होता तो हमारी ज़िंदगी अच्छी होती। हम जो दिहाड़ी कमाते हैं, उसी में आज हमारे पास एक घर होता। घर तो छोड़ो, हम 1 गज ज़मीन भी नहीं खरीद सकते! क्योंकि"
"यहाँ के राजाओं (अमीरों) ने ज़मीन-जायदाद के दाम आसमान पर पहुँचा दिए हैं। वजह यह है कि अगर गरीब के पास घर और खाना आ गया, तो उनकी कमाई रुक जाएगी।"
"हमारे देश का सिस्टम हमें पूरा पैसा दे रहा है, सिस्टम की कोई गलती नहीं है। लेकिन लुटेरे उस पैसे को हम तक पहुँचने नहीं देते और दबा लेते हैं अमित।"
"हमारे हिस्से का हिसाब बिल्कुल सही है, पर जो हक हमें मिलना चाहिए वो हमें नहीं मिलता, वो कहीं बीच में ही अटका दिया जाता है।"
यह कहते-कहते उसके कपड़ों में छुपा वो रोलर और ब्रश नीचे गिर पड़े। तभी एक महँगी कार हृदय के पास आकर रुकी। कार से एक मुंशी उतरा और बोला, "ए लड़के!"
- "साहब बुला रहे हैं। घर में एक कमरा पेंट करना है, उसके ₹3,000 मिलेंगे।"
- अमित ने उस रोलर और ब्रश की तरफ इशारा किया।
- हृदय सोचने लगा— "अरे, एक ही दिन में हम दोनों को ₹3,000 मिल जाएँगे तो पूरे हफ्ते खाने की कोई दिक्कत नहीं होगी!"
- "जी साहब, हम आ रहे हैं," कहते हुए हृदय ने जैसे ही उस ब्रश और रोलर को उठाया, रोलर के अंदर एक छोटा सा कागज़ निकला।
हृदय की सोच, यथा-यथा सच होती जाएगी...
उसपर लिखा था...
इसके बाद क्या हुआ? उस मैजिकल रोलर से हृदय ने क्या किया, यह आने वाले भाग में पढ़ेंगे।
आप इसका पहला और दूसरा भाग यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं:
लेकिन दोस्तों, मैंने अपनी लिखी कहानियों में एक प्रेमी के ज़ख्मों के बारे में भी लिखा है। अगर आप 'Kaatre - एक सच्चा साइको' पढ़ना चाहते हैं, तो इन चारों भागों को पढ़ सकते हैं:
टूटी हुए घड़ी जरूर पढ़ना दोस्तों बहुत इमोशनल है
मेरी कहानियाँ पढ़ने और मुझे सपोर्ट करने के लिए थैंक यू!
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