​ठंडा पानी और साइको कात्रे| hindi kahani,this is hospitality story

 डिस्क्लेमर: यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इस कहानी के सभी पात्र, नाम और घटनाएँ लेखक की कल्पना हैं। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति या वास्तविक घटना से कोई संबंध नहीं है। कहानी का उद्देश्य केवल मनोरंजन करना है, लेखक किसी भी प्रकार की हिंसा या गलत गतिविधि का समर्थन नहीं करता है।

1. नीमकठारी गाँव और वह अनोखा जन्म






​नीमकठारी  गाँव के इतिहास में कई अजीबोगरीब और चमत्कारी घटनाएँ घटी थीं। 

बुजुर्ग कहते थे कि उस गाँव की मिट्टी में ही कोई जादुई असर है। लेकिन, उस गाँव के रहने वाले पपिता रानी और पक्का पापड़ के घर में जब एक बच्चे का जन्म हुआ, तो जो चमत्कार हुआ उसकी कल्पना कभी  किसी  ने नहीं की थी, न ही कभी ऐसा सुना था। 

नौ महीने की गर्भावस्था के बाद पपिता रानी ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

 प्रसव के बाद, अस्पताल की नर्स ने उस नवजात शिशु को पहली बार नहलाने के लिए उसके शरीर पर  ( ठंडा पानी )डाला। बस फिर क्या था! आश्चर्यजनक रूप से उस बच्चे ने अचानक अपनी बड़ी-बड़ी आँखें खोलीं, चारों ओर देखा और बहुत ही स्पष्ट और गंभीर आवाज़ में बात की—"मुझे ठंडा पानी!" 

(मुझे ठंडा पानी )।



​वह बात सुनते ही ऑपरेशन थिएटर में मौजूद नर्सें और डॉक्टर आश्चर्य जनक हो गए  । एक मिनट के लिए वहाँ अंधा धुन्ध सन्नाटा छा गया। लेकिन, उस शब्द को बोलने के अगले ही पल वह बच्चा फिर कभी उस तरह नहीं बोला, बल्कि सामान्य बच्चों की तरह रोने लगा। समय गुजरने  के बाद भी माता-पिता उस अजीब घटना को नहीं भूल पाए।

 ठंडे पानी की उसी याद के कारण, उन्होंने अपने बच्चे का नाम अनोखा नाम  'ठंडा पानी' रखा। भले ही यह नाम सुनने में अजीब था, लेकिन गाँव के लोग धीरे-धीरे इसके आदी हो गए।


2. मासूमियत का आईना – ठंडा पानी का व्यक्तित्व



​'ठंडा पानी' जब बड़ा हुआ, तो वह बिल्कुल अपने नाम की तरह ही निकला। उसका मन ठंडे पानी की तरह ही बहुत शांत, मासूम और किसी का बुरा न चाहने वाले दयालु दिल का था।

 दुनिया में चाहे कितना भी स्वार्थ हो, ठंडा पानी की दुनिया बहुत बढ़िया  थी। 

गाँव के बाकी युवा छोरियों के चक्कर, प्रेम प्रसंग, बाइकों पर घूमना और बुरी आदतों में डूबे रहते थे, लेकिन वह इन सब से कोसों दूर रहता था। 

किसी भी लड़की के साथ उसका कोई अफेयर नहीं था। उसका पूरा मन केवल भगवान की भक्ति और समाज के प्रति मासूमियत भरी दया से भरा रहता था।

​कॉलेज की पढ़ाई पूरी होते ही, ठंडा पानी को शहर के एक बड़े कॉर्पोरेट अस्पताल में रिसेप्शनिस्ट की नौकरी मिली  भले ही वेतन कम था, लेकिन वह उसी छोटी सी नौकरी में बहुत संतुष्ट और खुश  था।

 उसे बाइक या कार चलाना नहीं आता था और उसने कभी सीखने की कोशिश भी नहीं की। अस्पताल से उसका कमरा करीब तीन किलोमीटर दूर था। चाहे कितनी भी तेज धूप हो या बारिश, वह उस दूरी को रोज़ पैदल ही निकल पड़ता था ।

Thanda pani paidal chalthe huwe


उसे वह सादा जीवन बहुत पसंद था। उसकी दिनचर्या बहुत अनुशासित थी—दिन भर अस्पताल के काउंटर पर बैठकर आने वाले गरीब मरीजों की  मुस्कुराकर मदद करना, ड्यूटी पर जाते  आते समय रास्ते में पड़ने वाले काली माता के मंदिर में सिर झुकाकर प्रार्थना करना, और रात को घर आकर अपने मन के विचारों और समाज में देखी गई सारी घटनाओं को कहानियों के रूप में एक ब्लॉग पर लिखकर पब्लिश करना।

The blogger


3. अंधेरे की परछाई – साइको 'कात्रे' का प्रवेश



​वह अपनी छोटी सी दुनिया में बहुत खुश था और बिना किसी छल-कपट के अपनी ज़िंदगी जी रहा था। लेकिन, ठंडा पानी को इस बात का अंदाज़ा भी नहीं था कि अंधेरे में छिपी एक रहस्यमयी और भयानक आँख उसकी मासूमियत पर लगातार नज़र रख रही है। वह परछाई कोई और नहीं, बल्कि शहर को हिला के रखने वाला 'कात्रे' था।


कात्रे की मानसिकता बहुत ही अजीब और खौफनाक थी।।

 उसे समाज में रहने वाली मासूमियत और शांति से सख्त नफरत थी। जो लोग बिना किसी विवाद के शांत मन से रहते थे, उनके दिमाग में घुसकर उनका सुकून छीनना और उनकी ज़िंदगी में उथल-पुथल मचाना कात्रे की एक आदत (लत) बन चुकी थी

​कात्रे हमेशा अपने साथ एक पुरानी, बड़ी और जंग लगी कैंची रखता था। उस कैंची की आवाज़ सुनकर ही किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाते थे। ठंडा पानी की अत्यधिक मासूमियत और उसकी देवभक्ति ने कात्रे का ध्यान खींच लिया। ठंडा पानी के जीवन और उसकी शांति को कैसे पूरी तरह भंग करना है, इसके लिए कात्रे सही समय का इंतज़ार करते हुए अंधेरे में आँख गड़ाए बैठा था।


​  4. अस्पताल के बाहर अमानवीय कृत्य



​एक दिन दोपहर के समय धूप बहुत तेज़ थी। ठंडा पानी हमेशा की तरह अस्पताल के रिसेप्शन काउंटर पर बैठकर अपना काम कर रहा था। 

तभी अचानक उसकी नज़र बाहर फुटपाथ पर पड़ी। वहाँ करीब पचास साल की एक बुजुर्ग महिला पड़ी हुई थी। उसकी हालत बहुत खराब थी। 

उसके मुँह से झाग निकल रहा था, वह गंभीर बीमारी से तड़प रही थी और सांस लेना भी उसके लिए थोड़ा मुश्किल लग रहा था। 

इस क्रूर समाज का असली रंग वहाँ साफ दिखाई दे रहा था। उस बुजुर्ग महिला के पास ओढ़ने के लिए एक छोटा सा कंबल तक नहीं था। 

कड़ी धूप और बीमारी को न झेल पाने के कारण, उसने अपने पास मौजूद दूसरी पुरानी साड़ी को अपने शरीर पर ओढ़ लिया था और सिकुड़ कर बैठ गई थी।

​लेकिन तभी वहाँ एक पत्थर दिल और कड़े स्वभाव का दुष्ट आदमी आया। 

उसने उस असहाय बुजुर्ग महिला पर ज़रा भी दया नहीं दिखाई, बल्कि उसके शरीर पर मौजूद उस पुरानी साड़ी को भी ज़बरदस्ती छीन लिया।

 उसके बेबस देखते रहने पर भी, उसने उस साड़ी को खुद ओढ़ लिया और बेशर्मी से उसके बगल में ही सो गया। 

समाज में इंसानियत कितनी गिर चुकी है, यह दृश्य उसका एक जीता-जागता सबूत था।



5. पत्थर दिल अमीर – ठंडा पानी का टूटा हुआ दिल



​उस समय अस्पताल के बड़े-बड़े डॉक्टर, वीआईपी लोग और करोड़ों कमाने वाले अमीर अपनी लग्जरी कारों में वहीं से गुज़र रहे थे। 

कुछ लोगों ने कार के शीशे नीचे करके देखा, तो कुछ अनदेखा करके चले गए। 

लेकिन किसी ने भी उस बुजुर्ग महिला को बचाने की, या कम से कम उसे अस्पताल के अंदर ले जाने का नहीं नहीं सोचा ।

 यह देखकर ठंडा पानी का दयालु दिल तड़पने लगा। उसकी आँखों में आँसू आ गए। वह अपना काउंटर छोड़कर तुरंत hospital के अंदर मौजूद एक सबसे सीनियर डॉक्टर के केबिन की तरफ     भागा।

Doctor ke liye doud


​केबिन के अंदर जाकर हांफते और रोते हुए उसने कहा: "सर! प्लीज एक बार बाहर चलिए सर। 

बाहर फुटपाथ पर एक अनाथ बुजुर्ग महिला गंभीर हालत में है। उसे क्या हुआ है मुझे नहीं पता, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती जा रही है सर।

 हम डॉक्टर हैं न सर, हमारा अस्पताल बिल्कुल पास में है, अगर हम चाहें तो उसकी सहायता कर सकते हैं। 

प्लीज कुछ करके उसकी सहायता करते हैं सर!" उसने लगभग पैर पकड़ने जैसा व्यवहार किया।

​        6. डॉक्टर का कठोर व्यवहार और अहंकार



​उस अहंकारी डॉक्टर ने अपनी महंगी कुर्सी पर पीछे की ओर झुकते हुए हाथ में पकड़े पेन को टेबल पर पटक दिया। 

उसने ठंडे पानी को ऊपर से नीचे तक ऐसे देखा जैसे किसी तुच्छ इंसान को देख रहा हो। 

उसके चेहरे पर गरीबों और मासूमों के प्रति नफरत साफ झलक रही थी। उसने बहुत ही कठोर आवाज़ में, पूरे अस्पताल के कॉरिडोर तक सुनाई देने वाली आवाज़ में चिल्लाकर कहा:

​"ऐ ठंडा पानी! तुम अपनी औकात में रहो। तुम यहाँ सिर्फ एक छोटे से रिसेप्शनिस्ट हो। 

तुम्हारा नाम ठंडा पानी है न, तो ज्यादा गर्म मत हो, शांति से ठंडे रहो! यहाँ सड़क पर पड़े हर अनाथ इंसान का मुफ्त में इलाज करने के लिए हमने करोड़ों रुपये खर्च करके पढ़ाई नहीं की है, और न ही यह अस्पताल बनाया है।

 अगर ज़्यादा नाटक करके सोशल सर्विस करनी है, तो नौकरी से निकाल दूँगा। निकलो यहाँ से! जा और अपना काम कर!"


Doctor in the fire



​यह सुनते ही ठंडा पानी का दिल चकनाचूर हो गया। उसे समझ आ गया कि इस दौर में जहाँ चिकित्सा एक व्यापार बन चुकी है, वहाँ दया और इंसानियत की कोई कीमत नहीं है। 

उस रात वह बहुत भारी मन और आँखों में आँसू लिए अपने कमरे में लौट आया। 

समाज के इस काले सच, बुजुर्ग महिला की उस दुर्दशा और डॉक्टर के अमानवीय व्यवहार के बारे में उसने अपने ब्लॉग पर एक भावुक और लंबा लेख लिखा।

 लेकिन उसे पब्लिश करने की हिम्मत न होने के कारण, उसने उसे ड्राफ्ट में सेव कर दिया और बिस्तर पर गिरकर फूट-फूट कर रोते हुए सो गया। 

उसे पक्का विश्वास हो गया कि इस दुनिया से इंसानियत पूरी तरह खत्म हो चुकी है।

​        7. वह काली सुबह – खतरनाक कार का सफर



​अगले दिन ठंडा पानी अपनी नाइट ड्यूटी खत्म करके सुबह करीब चार बजे अपने घर के लिए निकला। 

बहुत ठंड थी, रास्ते भर कोहरा छाया हुआ था और सब कुछ सुनसान था।

 सड़क पर एक भी इंसान नहीं था। तभी पीछे से एक काली लग्जरी कार बहुत तेज़ रफ्तार में टायरों की आवाज़ करती हुई आई और उसके ठीक सामने आकर रुकी।


 ठंडा पानी कुछ समझ पाता, इससे पहले ही कार के दरवाज़े खुल गए।

​कार से तीन अमीर लड़कियाँ बाहर निकलीं। वे तीनों रात भर पार्टी करने के बाद पूरी तरह नशे में धुत थीं। 

उनकी आँखों में अहंकार साफ झलक रहा था। बिना सोचे-समझे, उन्होंने ठंडा पानी का कॉलर पकड़ लिया और ज़बरदस्ती खींचते हुए उसे कार के अंदर धकेल दिया।

 ठंडा पानी डर के मारे चिल्लाता रहा, "मुझे छोड़ दो, मैंने क्या गलती की है, प्लीज मुझे जाने दो" कहकर हाथ जोड़कर भीख मांगता रहा।

 लेकिन उन लड़कियों के सिर पर चढ़े अहंकार और नशे ने उनकी एक न सुनी। वे कार को शहर से कई मील दूर एक सुनसान, पुरानी फैक्ट्री की इमारत में ले गईं।

​                   8. मासूमियत का अपमान 



शहर से कई किलोमीटर दूर वह पुरानी, सुनसान फैक्ट्री एक खंडहर की तरह खड़ी थी। 

चारों तरफ गहरा अंधेरा था और अंदर सीलन की बदबू आ रही थी। उस अंधेरी इमारत में उन तीन अमीर लड़कियों ने ठंडा पानी को लाकर छोड़ दिया।

ठंडा पानी बहुत ज्यादा डर गया था। वह एक कोने में सहमा हुआ खड़ा था और बार-बार उनसे हाथ जोड़कर कह रहा था कि उसे जाने दें। 

लेकिन उन लड़कियों के सिर पर अपनी दौलत और अपने रुतबे का इतना अहंकार सवार था कि उन्होंने उसकी मासूमियत का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया।

वे उसके सादे, पुराने कपड़ों, उसकी पैदल चलने की आदत और उसकी भगवान के प्रति भक्ति को देखकर जोर-जोर से हँसने लगीं। एक लड़की बोली, "देखो तो इस गांव के गंवार को, इसे लगता है दुनिया में आज भी भक्ति और ईमानदारी से कुछ होता है।"

ठंडा पानी की आँखों से लगातार आँसू बह रहे थे। वह उस सुनसान इमारत में खुद को बहुत अकेला और बेबस महसूस कर रहा था। उसके मन में सिर्फ एक ही सवाल था कि आखिर उसकी सादगी और उसकी मासूमियत ही उसकी गलती कैसे बन गई।

कुछ देर तक उसका मजाक उड़ाने के बाद, वे तीनों लड़कियां वहां से जाने लगीं। 

जाते-जाते उनमें से एक ने पीछे मुड़कर बहुत ही घमंड और नफरत भरी आवाज में कहा, "सुनो लड़के! हम बहुत बड़े और अमीर घराने की लड़कियां हैं। 

हमारे पास पैसा है, पावर है। हम इस शहर में कुछ भी कर सकते हैं और हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। 

तुम जैसे एक छोटे से रिसेप्शनिस्ट की औकात ही क्या है जो हमसे टक्कर ले सके।"

यह कहकर वे तीनों अपनी काली लग्जरी कार में बैठीं और तेज रफ्तार में उस सुनसान फैक्ट्री को पीछे छोड़ते हुए अंधेरे में गायब हो गईं। 

पीछे रह गया अकेला ठंडा पानी, जो उस टूटी हुई इमारत में अकेला बैठा आसमान की तरफ देख रहा था और भगवान से पूछ रहा था, "हे भगवान, क्या इस दुनिया में सच्चे और मासूम लोगों के लिए कोई न्याय नहीं बचा है?"

​      9. आधी रात के 12 बजे – कात्रे का आगमन



​समय ठीक आधी रात के 12 बजे के बाद का था। उस पुरानी इमारत में एक भयानक सन्नाटा छा गया था। तभी अचानक वहाँ का मौसम बदल गया, हवा बर्फ जैसी ठंडी हो गई। उस इमारत के टूटे हुए दरवाज़े के पास एक लंबी, भयानक परछाई दिखाई दी। आसमान में कड़की बिजली की रोशनी में वह चेहरा साफ दिखाई दिया—वह कोई और नहीं, 'कात्रे' था। उसके चेहरे पर एक गंभीर और विकृत मुस्कान थी। उसके दाहिने हाथ में एक पुरानी, बड़ी, जंग लगी कैंची चमक रही थी, जो 'कट कट' की भयानक आवाज़ कर रही थी।




कात्रे की आँखें अंधेरे में अंगारों की तरह चमक रही थीं। उसने ठंडा पानी के कंधे पर अपना ठंडा हाथ रखा और कहा, उसकी आवाज़ उस इमारत में गूँज उठी:



 कात्रे ने ठंडा पानी के कंधे पे हाथ रखा और कहा ​"रो मत, ठंडा पानी। भगवान न्याय करने में देरी कर सकता है, लेकिन यह कात्रे अन्याय को एक पल के लिए भी सहन नहीं करता। समाज में मासूमों को सताने का हक किसी को नहीं है। तुम्हारी मासूमियत और आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाले उन लड़कियों और डॉक्टर के पापों का हिसाब मेरा यह इरादा करेगा। अब तुम्हारी मदद मैं करूँगा, असली न्याय मैं करूँगा। तुम शांत रहो।" यह कहकर कात्रे अंधेरे में गायब हो गया। उसी रात, वह भयानक प्रतिशोध का खेल शुरू हो गया।

​     10. पहली सज़ा – अहंकारी डॉक्टर को सबक



​रात का समय 2 बजे के बाद का था। वह अहंकारी सीनियर डॉक्टर अपने आलीशान बंगले के एसी बेडरूम में किंग साइज बेड पर गहरी नींद में सोया हुआ था। 

अचानक उसे अपने चेहरे पर कुछ बहुत ठंडा तरल पदार्थ महसूस हुआ। 

उसने घबराकर, हांफते हुए अपनी आँखें खोलीं। कमरे की सारी लाइटें बंद थीं, लेकिन खिड़की से आ रही चाँदनी की रोशनी में उसने देखा कि उसके बिस्तर के पास एक भारी-भरकम साया खड़ा है। डर के मारे उसका दिल कांपने लगा। ध्यान से देखने पर पता चला.. वह कोई और नहीं, कात्रे था!


इससे पहले कि डॉक्टर ज़ोर से चिल्ला पाता, कात्रे ने अपनी खौफनाक आँखों से ही उसे वहीं जमा दिया। 

कात्रे ने धीरे से मुस्कुराते हुए गंभीर आवाज़ में कहा, "तुम्हीं ने कहा था न.. ठंडा पानी ज्यादा गर्म न होकर ठंडा रहे? आज मैं तुम्हारे इस अहंकार को हमेशा के लिए ठंडा कर रहा हूँ।" डॉक्टर की आँखों में गहरा खौफ साफ दिखाई दे रहा था। उसने हाथ जोड़कर खुद को छोड़ देने की भीख माँगी। लेकिन कात्रे ने उस डॉक्टर के घमंड को उसी रात हमेशा के लिए तोड़ दिया और उसके सारे काले कारनामों को सबूतों के साथ कानून के हवाले कर दिया।

​11. हाईवे पर हाहाकार – तीन लड़कियों के घमंड का खात्मा



​अगली रात का समय था। हाईवे पर गहरा सन्नाटा पसरा हुआ था और हल्का-हल्का कोहरा छाया हुआ था। वे तीनों अमीर लड़कियां उसी काली कार में एक बड़ी पार्टी से वापस लौट रही थीं। कार के अंदर तेज म्यूजिक बज रहा था और वे अब भी अपने अहंकार में डूबी हुई थीं। वे आपस में बातें करते हुए कल रात की घटना को याद करके हँस रही थीं और कह रही थीं कि कैसे उन्होंने एक गरीब लड़के को डराया था।


तभी अचानक हाईवे के बीचों-बीच उन्हें एक लंबा, काला साया खड़ा दिखाई दिया। वह साया सड़क के ठीक बीच में बिना हिले-डुले खड़ा था। ड्राइवर लड़की ने अचानक ब्रेक मारा, जिससे कार जोर की आवाज के साथ रुक गई।


तीनों लड़कियां बुरी तरह डर गईं। उन्होंने खिड़की से बाहर झाँक कर देखा और चिल्ला कर बोलीं, "कौन है वहां? रास्ते से हटो! तुम्हें दिखाई नहीं देता क्या?"


वह साया धीरे-धीरे उनकी कार की तरफ बढ़ने लगा। चाँदनी की रोशनी में उसका चेहरा थोड़ा-थोड़ा दिखाई दे रहा था - वह और कोई नहीं, बल्कि कात्रे था। उसके चेहरे पर एक गंभीर और न्याय भरी मुस्कान थी।


कात्रे ने कार के पास आकर बहुत ही शांत लेकिन कठोर आवाज में कहा, "तुम लोगों ने कहा था न कि तुम अमीर हो, इसलिए तुम कुछ भी कर सकती हो और कानून भी तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता? आज मैं तुम्हें बताने आया हूँ कि कानून से बड़ा कोई नहीं है।"


कात्रे की यह बात सुनते ही उन तीनों लड़कियों के चेहरे का रंग उड़ गया। उनका सारा नशा और सारा घमंड एक पल में गायब हो गया। उन्हें समझ आ गया कि आज वे किसी बड़ी मुसीबत में फंस गई हैं।


उसी रात कात्रे ने बड़ी चालाकी से उनके खिलाफ सारे पुख्ता सबूत इकट्ठे किए - उनकी कार के नंबर, उनके द्वारा किए गए गलत व्यवहार के निशान और उनकी सारी सच्चाई। अगले दिन सुबह होते ही कात्रे ने वे सारे सबूत चुपचाप पुलिस को सौंप दिए। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन तीनों लड़कियों को कानून के शिकंजे में ले लिया। इस तरह उनके पैसे और घमंड का साम्राज्य एक ही रात में हमेशा के लिए खत्म हो गया।

​              12. उपसंहार: एक नई सुबह



​अगले दिन सुबह नीमकठारी गाँव और पूरे शहर में हड़कंप मच गया। हर न्यूज़ चैनल और अखबारों में सिर्फ उस बड़े कॉर्पोरेट डॉक्टर और तीन अमीर लड़कियों की अचानक हुई गिरफ्तारी और उनके काले कारनामों के पर्दाफाश की ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही थी। शहर की पुलिस और टॉप डिटेक्टिव मैदान में उतर चुके थे। लेकिन यह सब किसने किया, कोई नहीं जानता था, कोई सुराग नहीं था। उस कात्रे ने कोई सबूत नहीं छोड़ा था।

​लेकिन उस सुबह ठंडा पानी बहुत शांत था। वह हमेशा की तरह जागा, नहाया, नीमकठारी के रास्ते में पड़ने वाले काली माता के मंदिर गया और भक्ति से सिर झुकाकर प्रणाम किया। फिर वापस अपनी अस्पताल की ड्यूटी पर चला गया। उसके चेहरे पर वही पुरानी मासूमियत, वही शांति थी। अंदर कोई डर नहीं था।

​रात को जब वह अपने कमरे में लौटा, तो उसने अपना लैपटॉप खोला। वह यह देखकर हैरान रह गया.. कि उसने जो ड्राफ्ट ब्लॉग लिखा था (अपने साथ हुए अन्याय और बुजुर्ग महिला की दुर्दशा के बारे में), वह अपने आप पब्लिश हो चुका था। उस पर लाखों व्यूज और हज़ारों कमेंट्स आ चुके थे। लेकिन उस ब्लॉग के नीचे, चमकते लाल रंग के अक्षरों में एक आखिरी लाइन नई जुड़ी हुई थी। उसे देखकर ठंडा पानी के होठों पर एक छोटी सी, रहस्यमयी मुस्कान तैर गई। वह लाइन कुछ इस तरह थी:

​"मासूमियत को कुचलने वाले याद रखें... कानून सो जाए, तो न्याय करने के लिए कात्रे हमेशा जागता है। - कात्रे हमेशा रहेगा"


कात्रे कौन है यह जानने के लिए जरूर पढ़िए कात्रे 1

                             भाग 2 के लिए यहां क्लिक करे


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