कात्रे (भाग 1) — एक सच्चा साइको | Hindi love story
Disclaimer: इस कहानी के सारे पात्र सिर्फ और सिर्फ काल्पनिक है जिसका किसके निजी जिंदगी से कोई तालुक नहीं इस कहानी में जो भी पात्र है वो सिर्फ एक काल्पनिक कहानी है बस
1. कात्रे और शार्विका का परिचय
कात्रे का नाम सुनकर एक समय उस जंगल में हर कोई उसकी इज्जत करता था। कुछ साल पहले तक उसकी जिंदगी बेहद खुशहाल और नंबर वन चल रही थी। वह शेरापुर के घने जंगलों में एक ईमानदार फॉरेस्ट बिट ऑफिसर के पद पर था। वह अपनी ड्यूटी को अपनी जान से ज्यादा प्यार करता था। उसकी इस खूबसूरत जिंदगी को संभालने वाली उसकी एक बेहद प्यारी महबूबा थी, जिसका नाम था शार्विका वह शेरापुर की ही एक छोटी सी आदिवासी बस्ती की रहने वाली लड़की थी।
2. उनका पवित्र प्यार
शार्विका आदिवासी बस्ती की होने के बावजूद, शहर में रहकर अपनी अच्छी-खासी पढ़ाई कर रही थी। वह हर रविवार को वहां से कात्रे से मिलने के लिए जंगल आती थी। उस पूरे दिन दोनों ढेर सारी बातें करते, जंगल की नदियों के किनारे घूमते है और प्रकृति की बाहों में खोए हुए रहते थे। उनका प्यार बिना किसी मिलावट के बेहद अटूट और खूबसूरत तरीके से आगे बढ़ रहा था।
3. दशहरा की छुट्टियों का प्लान
एक दिन दशहरा के त्योहार पर शार्विका को कॉलेज से आठ दिनों की छुट्टियां मिलीं। तब शार्विका बहुत खुश होकर कात्रे के पास आई और चहकते चमकते हुए बोली।
- शार्विका: "कात्रे! बहुत दिन हो गए हम दोनों शहर गए हुए। अब छुट्टियां भी हैं, तो क्यों न कल सुबह ही हम शहर चलें? वहां खूब घूमेंगे, खरीदारी करेंगे और शाम तक वापस आ जाएंगे।"
- कात्रे: "हां शार्विका, तुम एकदम सही बात कह रही हो। तुम जैसा कहो वैसा ही करेंगे, कल सुबह हम पक्का अपनी सरकारी गाड़ी से शहर चलेंगे।"
4. शहर में खुशी के पल
अगली सुबह कात्रे अपनी गाड़ी में शार्विका को बैठाकर शहर के लिए निकल पड़ा। दिनभर दोनों ने बेहद खुशी-खुशी बाजार में खरीदारी की, दोपहर का टेस्टी खाना खाया और उसके बाद अपनी आगे की शादी के लिए कुछ सोने के गहने कुछ कपड़े भी खरीदे। शाम होते ही शार्विका ने बड़ी उम्मीद से कात्रे का हाथ कसकर पकड़ कर कहा।
| इसके बाद दोनों सिनेमा घर चले गए |
- शार्विका: "सुनो जी! बहुत दिन हो गए कोई मूवी देखे हुए। चलो न, आज शाम का छह बजे वाला मूवी देखकर चलते हैं।"
- कात्रे: "हां क्यों नहीं शार्विका! तुमने इतने प्यार से कहा है, तो चलो मूवी देख कर ही चलते हैं।"
इसके बाद दोनों सिनेमा घर चले गए।
5. अंधेरी रात का वो खौफनाक मोड़
फिल्म खत्म होते-होते रात के दस बज चुके थे। दोनों गाड़ी लेकर वापस जंगल के रास्ते पर निकल गए।
कात्रे: "नहीं शार्विका, मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा। मेरा दिल कह रहा है कि इतनी रात को इस काली सुनसान सड़क पर गाड़ी रोकना खतरे से खाली नहीं है।"
शार्विका: "अरे कुछ नहीं होगा कात्रे, उनके साथ एक लड़की भी तो है। इतना मत डरो, प्लीज गाड़ी रोको, मदद करना हमारा फर्ज बनता है।"
6. एक खतरनाक धोखा और अचानक हमला
| कात्रे पर भारी वार किया |
शार्विका की जिद के आगे झुकते हुए कात्रे ने गाड़ी रोक दी। वे चारों दौड़कर पास आए और गाड़ी में बैठ गए।
7. दिल दहला देने वाला खौफ और खामोशी
चारों तरफ एक डरावना सन्नाटा पसरा हुआ था।वे हमलावर शार्विका को अपने साथ अगवा करके ले जा चुके थे और वहां केवल तबाही के निशान छूटे थे।
कात्रे की बेबसी और उसका टूटा हुआ दिल उस वक्त किसी नरक से कम नहीं था।
8. सब कुछ गंवा चुका कात्रे
| ये वही जंगल का रास्ता है जहां कात्रे की जिंदगी को बरबाद किए |
जाते-जाते उन अपराधियों ने जो तबाही मचाई थी, उसे देखकर कात्रे का मानसिक संतुलन हिल गया।
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