अ मैजिकल पेंटर 4 | Hindi Full Suspense Story | Feel The Stories
भाग 1 अ मैजिकल पेंटर - पार्ट 4 (अंतिम भाग)
| एक कमरे को पेंट |
नोट: इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ और दृश्य केवल काल्पनिक हैं। इसमें इस्तेमाल की गई मुद्रा और व्यवस्था केवल कहानी के मनोरंजन और सामाजिक संदेश के लिए है। इसका किसी भी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है।
नया जीवन: हृदय और मैजिकल पेंटर
"एक कमरे को पेंट करने के ₹3,000 मिलेंगे..." मुंशी की यह बात सुनकर हृदय ने सोचा कि कम से कम एक हफ्ते तक खाने-पीने की कोई दिक्कत नहीं होगी, और वे दोनों मुंशी की महँगी कार में बैठ गए।
कार में बैठने से पहले हृदय ने जब दुकान से लाया नया रोलर और ब्रश उठाया, तो उसमें से कागज़ की एक पर्ची गिरी जिस पर लिखा था—
." (हृदय के मन की जो भी इच्छा होगी, वह पूरी होगी!) दोनों ने इसे पढ़ा और हैरान हुए, लेकिन पेट की भूख के आगे इसे इत्तेफ़ाक मानकर जेब में रख लिया।
वे मेधा देश के सबसे अमीर आदमी की हवेली पहुँचे, जो देश के टॉप 10 सबसे बड़े काले धन वाले अमीरों में नंबर 1 पर था। कमरे में पेंट करते-करते हृदय और अमित आपस में बातें करने लगे कि कैसे इस अमीर ने हज़ारों करोड़ का काला धन दबा रखा है, जबकि इंसान को जीने के लिए थोड़ा सा ही पैसा चाहिए। हृदय ने कहा— "इतना पैसा दबाकर बैठा है, पर क्या यह पैसों को खा सकता है? पेट भरने के लिए तो इसे भी वही दही-चावल ही खाना पड़ेगा ना!"
काले धन पर रोलर का अनोखा न्याय
हृदय और अमित ₹5,000 लेकर चले गए, लेकिन यमदूतों का वह मैजिकल रोलर हृदय के मन की बात सुन चुका था। रोलर के मन्त्र ने दीवारों के रंग में मिलकर अगले ही दिन से उस अमीर आदमी की ज़िंदगी पर अपना असर दिखाना शुरू कर दिया।
उस अमीर आदमी को एक ऐसी रहस्यमयी बीमारी हो गई जिसका कोई इलाज नहीं था: खाना खाए तो पेट में दर्द और पचे नहीं, न खाए तो भूख से तड़पे!
दुनिया भर के डॉक्टर्स आए, कई सारी स्कैनिंग मशीनें और तरह तरह के रक्त सैंपल्स हर तरह के परीक्षाएं किए गए कही भी कोई खराबी नहीं नजर आई और न किसी बीमारी।का खास पथ चला, हर चीज नॉर्मल थी
करोड़ों रुपये खर्च हुए, पर शरीर में कोई बीमारी निकली ही नहीं। 15 दिनों में वह सूखकर 40 किलो का हो गया। हज़ारों करोड़ की तिजोरी पर बैठकर भी वह 2 निवाले खाने के लिए तरस गया।
जब दर्द बर्दाश्त न हुआ, तो वह उसी पेंट किए कमरे में गया, पंखे से रस्सी बाँधी और सुसाइड करने के लिए जैसे ही लाइट बंद की...
दीवारें अंधेरे में तेज़ रोशनी से जगमगाने लगीं!
| दीवारों पर लिखा था: |
दीवारों पर लिखा था:
| काला धन |
"काला धन दबाकर तूने क्या पा लिया? क्या तू 10 रुपये की 2 इडली या दही-चावल खा पाया? नहीं ना! अब जा, अपनी इस तिजोरी के पैसों को ही खाकर अपनी भूख मिटा ले!"
यह पढ़ते ही उसकी आँखें खुल गईं। उसने तुरंत परिवार को बुलाया और अगले ही दिन सारा काला धन और बेनामी ज़मीनें गरीबों में बाँट दीं। गरीबों को अपनी ही जमीन पर खुद के पैसों से पक्के मकान बनवा कर दिए,
- अनाथालय-वृद्धाश्रम खोले , अपने काले धन को उसने अलग अलग ट्रस्ट बनाए जिससे गरीबों के लिए सही से मदद मिल सके और युवाओं को नौकरियाँ दीं। उसके इस बदलाव से
- मेधा देश की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत हो गई कि मेधा देश की करेंसी दुनिया में 10वें स्थान पर आ पहुँची!
मैजिकल पेंटर की रंगों की दुनिया
बदलाव यहीं नहीं रुका। जब उस अमीर आदमी ने देखा कि उसके बदलने से देश में इतना बड़ा सुधार आया है, तो उसने अपनी कमाई से मुफ़्त वृद्धाश्रम और अनाथालय चलाने शुरू कर दिए। जब वह दोबारा उस कमरे में गया और लाइट ऑफ की,
| दीवार पर चमकता हुआ आखिरी संदेश |
तो दीवार पर चमकता हुआ आखिरी संदेश मिला— "इस बदलाव को जब तक जियो तब तक कायम रखो। नीयत साफ़ रखो और खुश रहो!"
इधर, मैजिकल रोलर का न्याय रुका नहीं। बाकी के जो 9 काले धन वाले अमीर थे, उन तक भी इस रोलर का संदेश पहुँचा और भूख-तड़प के डर से उन 9 अमीरों ने भी अपना सारा काला धन सरेंडर कर दिया।
हृदय और अमित का वह रोलर-ब्रश कभी खराब नहीं हुआ। उन्हें बड़े-बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स मिलने लगे और वे "मैजिकल पेंटर" के नाम से मशहूर हो गए। मेधा देश से गरीबी और भुखमरी हमेशा के लिए खत्म हो गई!
मैजिकल पेंटर का संदेश और कहानी का समापन
सच कहें तो हम हमेशा देश की व्यवस्था को कोसते रहते हैं, लेकिन अगर देश के अमीर लोग सुधर जाएँ, तो हर देश की किस्मत बदल सकती है। एक इंसान को जीने के लिए 1 या 2 करोड़ रुपये बहुत होते हैं, फिर भी लोग हज़ारों करोड़ दबाकर बैठ जाते हैं।
अमीरों के लिए मैजिकल पेंटर का संदेश:
"मरते समय कोई कुछ साथ नहीं ले जाता। जो पैसा आप छिपा रहे हो, वही आपके लिए यमपाश बन जाएगा। क्या इतना पैसा दबाने के बाद आप चैन की नींद सो पा रहे हैं या मनपसंद खाना खा पा रहे हैं? अगर नींद की गोली लेनी पड़ रही है, तो मेधा देश की तरह अपने देश को भी बदलिए!"यही संदेश मैजिकल पेंटर हर उस अमीर के घर की दीवार पर लिख आता था। इसीलिए, यह पूरी कहानी 'अ मैजिकल पेंटर' को समर्पित करते हुए खत्म की जाती है। और हमारा मैजिकल पेंटर 'हृदय', आज भी कहीं न कहीं, किसी न किसी अमीर के घर में उसी मैजिकल रोलर से पेंट कर रहा होगा...
(समाप्त)
पिछली कहानियों के लिंक्स:
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