"किसान की मुर्गी" भाग 3 (Kisan Ki Murgi)
9. अंधे की शरण में पहुँचा खौफनाक सच
उस चोर के झोपड़ी के अंदर कदम रखते ही, जब उस अंधे आदमी ने पूछा, "कौन हो तुम?", तो अपनी जान बचाकर भागा हुआ वह नया चोर बुरी तरह हाँफ रहा था। उसने काँपते हुए जवाब दिया—
"भाई, मैं असल में एक चोर हूँ। बात ऐसी है कि एक शैतानी मुर्गी मेरे पीछे पड़ी है! वह कोई साधारण पक्षी नहीं, बल्कि पाँच फीट ऊँची एक भयानक शक्ति है। उसे देखते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैं अपनी जान बचाकर सीधे आपकी शरण में आ गया हूँ!"
चोर की यह बात सुनकर उस अंधे आदमी की आँखें भले ही न हों, लेकिन उसका दिल और छठी इंद्री तुरंत सक्रिय हो गई। उसने गहरी साँस लेते हुए पूछा— "कैसी थी वह मुर्गी? कौन सी मुर्गी? क्या बोली वह मुर्गी? उसने क्या कहा?"
उस अंधे आदमी को अहसास हुआ कि वह कोई और नहीं, बल्कि उसी की अपनी खोई हुई जादुई मुर्गी है, जिसे उसने कभी निस्वार्थ भाव से पाला था। दुःख और बेचैनी से उसका दिल भर आया। उसने तुरंत उस चोर से अनुरोध किया कि वह उसे उसी जगह पर ले चले।
जहां उस चोर ने उस मुर्गी को देखा था। उस मुर्गी के बारे में जैसे हाइनेस आदमी को पता चला तो वो आदमी उस चोर से और विनती करके पूछा ले चलो भाई।मुझे उस मुर्गी के पास जिससे तुम डर रहे हो
10. इमली के पेड़ पर मिलन और आंसुओं का सैलाब
जब जंगल का माहौल शांत हुआ और शाम ढलने लगी, तब वह चोर उस अंधे आदमी को—जो असल में वही पुराना किसान था—उस किसान को लेकर सीधे उस शापित इमली के पेड़ के पास पहुँचा जहां शाम के 7 बजे अजीब आवाजें आती थी।
ठीक शाम के 7 बजते ही, उस पेड़ के नीचे से वही दर्दनाक रोने की आवाज़ गूँज उठी। वह मुर्गी अपने किसान मालिक के लिए फफक-फफक कर के रो रही थी। उस किसान को अच्छी तरह समझ आ गया कि वह कोई भूत या प्रेत नहीं, बल्कि उसकी वही प्यारी मुर्गी है। यह अहसास होते ही उस किसान का दिल टूट गया। मुर्गी के बिछड़ने के बाद ही उसने इस वीरान जंगल को अपना ठिकाना बना लिया था।
"मेरी प्यारी मुर्गी..." कहते हुए वह किसान तड़प उठा और सीधे उस इमली के पेड़ से लिपटकर फूट-फूट कर रोने लगा बिल बिलाने लगा खुद को दोष देने लगा काश मैने और अच्छे से ध्यान रखा होता तो आज ऐसे ना देखना पड़ता।
यह दृश्य देखकर उस नए चोर के कठोर दिल में भी एक गहरा बदलाव आने लगा। उसने अपनी आँखों से बहते आँसू पोंछे और बेहद शर्मिंदा होकर कहा— "मालिक, मैं उस पहले चोर को अच्छी तरह जानता हूँ जिसने इस मुर्गी को चुराया था और इसके साथ यह बर्बरता की थी। अगर आप कहें, तो मैं आपको सीधे उसी तक ले चल सकता हूँ।"
किसान ने अपने आँसू रोककर दृढ़ता से कहा— "हाँ, हमें वहीं ले चलो। हम आज ही उस पापी का सामना करेंगे।"
11. पाप का अंत और पश्चाताप की अग्नि
चोर उन दोनों को लेकर उस दूसरे चोर के गुप्त ठिकाने पर पहुँचा। जब उन्होंने अंदर झाँककर देखा, तो दंग रह गए।
गाँव भर की चोरी हुई आधी से ज्यादा संपत्ति—बकरी, मुर्गे, भैंसें और कीमती सामान—वहाँ भरी पड़ी थी। वह चोर इस चोरी के माल और बहुत सारे दौलत के नशे में चूर होकर मज़े की जिंदगी काट रहा था।
यह सब देखते ही उस जादुई मुर्गी का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। वह पलभर में पाँच फीट लंबी एक भयानक शक्ति में बदल गई। उसकी आँखें अंगारे की तरह दहक रही थीं। उसने गुस्से में गुर्राते हुए उस सोते या छिपे हुए चोर को दबोच लिया। मुर्गी की आँखों में अपने साथ हुए अन्याय का बदला और प्रतिशोध साफ झलक रहा था, जबकि चोर की आँखों में मौत का खौफ समा गया था।
जैसे ही मुर्गी ने अपना मुँह खोलकर उस चोर पर झपट्टा मारना चाहा, तभी किसान ने आगे बढ़कर उसे रोक लिया और कहा—
"रुक जाओ! तुम ऐसा नहीं करोगी। हिंसा से कभी शांति नहीं मिलती।"
मुर्गी गुस्से से काँपते हुए बोली— "मुझे मत रोको! इस आदमी की बेरहमी और लालच की वजह से हमारी हँसती-खेलती जिंदगी तबाह हो गई। इसने मुझे मेरे बच्चों से अलग किया और तुम्हारे आँगन से छीन लिया!" यह कहकर वह जादुई मुर्गी दीवार से सिमटकर बच्चों की तरह फफक-फफक कर रो पड़ी।
12. ममता की जीत और एक नन्हा करिश्मा
एक बेजुबान पक्षी का इतना गहरा दर्द और उस किसान की ममता को देखकर उस चोर का दिल अंदर तक हिल गया। उसे अपने किए पर बहुत पश्चाताप हुआ। उसने महसूस किया कि उसका लालच कितना गलत था।
तभी एक छोटा सा चमत्कार हुआ। उस चोर के पास ही एक नन्हा सा चूज़ा—जो उस मुर्गी का ही अंश था और जिसे उस वक्त कोई नहीं समझ पाया था—आगे आया। वह अपनी प्यारी सी आवाज़ में "कुर-कुर" करते हुए अपनी माँ के पास पहुँचा।
उस चोर ने रोते हुए हाथ जोड़े और कहा— "यह आपका ही बच्चा है... मुझे माफ़ कर दीजिए! मैंने अपने स्वार्थ के लिए आपके परिवार को उजाड़ दिया।"
जैसे ही उस जादुई मुर्गी ने अपने उस छोटे से, प्यारे बच्चे को अपनी आँखों के सामने देखा, उसका सारा गुस्सा और प्रतिशोध कपूर की तरह उड़ गया। उसकी आत्मा शांत हो गई। उसने उस चोर और किसान को देखते हुए अंतिम बार कहा—
"आज के बाद कभी चोरी मत करना। यह सीख लो कि जान चाहे छोटी हो या बड़ी, प्रकृति की नजर में हर जिंदगी की कीमत एक समान है। इंसान अपने स्वार्थ के अंधेपन में यह भूल जाता है कि एक बेजुबान के सीने में भी दिल धड़कता है। ममता और प्रेम सिर्फ इंसानों की बपौती नहीं हैं, यह हर जीव की साँसों में बसते हैं।"
इतना कहकर वह जादुई मुर्गी हवा में एक सुनहरी रोशनी बनकर हमेशा के लिए गायब हो गई। पीछे छोड़ गई तो बस प्रेम और क्षमा की एक अमर मिसाल।
13. माया गाँव का नया सवेरा: "ममता का इमली का पेड़"
उस घटना के बाद दोनों चोरों ने अपनी पुरानी जिंदगी को हमेशा के लिए दफना दिया। उन्होंने माया गाँव के लोगों का चुराया हुआ सारा सामान वापस लौटा दिया, सबके सामने हाथ जोड़कर माफी माँगी, और उसी गाँव में किसानों के साथ खेतों में कड़ी मेहनत करके एक ईमानदार और साफ़-सुथरी जिंदगी जीने लगे।
इधर, वह बूढ़ा किसान उस नन्हीं सी जादुई मुर्गी के बच्चे को लेकर वापस अपने उसी पुराने घर लौट आया। वहाँ उसने उस बच्चे के साथ एक नई और खुशहाल जिंदगी की शुरुआत की।
जब यह पूरी अनोखी और रहस्यमयी कहानी माया गाँव के लोगों को पता चली, तो उनके दिलों से उस इमली के पेड़ का खौफ हमेशा के लिए मिट गया। उन्होंने उस पेड़ से डरना बंद कर दिया और उसे एक नया, आदरणीय नाम दिया—
"माया गाँव की मुर्गी, माँ की ममता का इमली का पेड़"
इस कहानी का मूल भाव यही है कि इस दुनिया में कोई भी जान छोटी या बड़ी नहीं होती। हमारे जीवन में हर प्राणी और हर वस्तु बेहद अनोखी और कीमती है। यह प्रकृति का अनमोल उपहार है, जिसे सहेजना और संतुलन में रखना ही हमारा सबसे बड़ा धर्म है। अगर संभव हो सके, तो इस दुनिया में थोड़ा सा प्यार और भलाई फैलाने की कोशिश करें, क्योंकि हर बेजुबान की जिंदगी भी उतनी ही अनोखी है जितनी कि हमारी।
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