"किसान की मुर्गी" (Kisan Ki Murgi)
1. माया गांव का रहस्य और किसान की जादुई सुनहरी मुर्गी
माया गांव, एक ऐसा नाम जिसे सुनते ही आज भी आस-पास के इलाकों के लोगों के चेहरों पर एक अजीब सी दहशत फैल जाती है।
इस गांव की हवाओं में एक ऐसा अनसुलझा रहस्य और खौफनाक सन्नाटा घुला हुआ है, जो दिन के उजाले में भी लोगों को डरा देता है। गांव के बाहरी हिस्से में, एक सुनसान पगडंडी के किनारे एक बेहद पुराना और विशाल इमली का पेड़ खड़ा है।
इसकी घनी और झुकी हुई टहनियां किसी जाल की तरह लगती हैं। गांव के बुजुर्ग बच्चों को सख्त नसीहत देते हैं कि शाम के 7 बजते ही उस पेड़ की तरफ देखना भी मना है। इस खौफ के पीछे एक पुरानी, लेकिन बेहद मार्मिक कहानी है।
| रोज़ शाम को सूरज ढलने से पहले |
यह कहानी शुरू होती है एक मुर्गी से, जो कोई साधारण पक्षी नहीं थी, बल्कि रोज़ शाम को सूरज ढलने से पहले सोने का एक अंडा देती थी। किस्मत के खेल से, यह जादुई मुर्गी माया गांव के एक बेहद गरीब, लेकिन निहायती ईमानदार और नेक दिल किसान के घर पली-बढ़ी थी।
जहां दुनिया का कोई भी इंसान रोज़ सोने का अंडा देखकर लालच में अंधा हो जाता, वहीं उस किसान का मन बिल्कुल साफ़ था।
वह अपनी सूखी रोटी में भी खुश था। एक दिन, किसान ने मुर्गी को दाना खिलाते हुए बड़े ही प्यार से कहा, "मुझे तुम्हारे इन सोने के अंडों की कोई चाहत नहीं है। तुम बस एक आम पक्षी की तरह साधारण अंडे दिया करो।
मैं चाहता हूं कि उन अंडों से तुम्हारे छोटे-छोटे चूज़े निकलें, वे मेरे इस छोटे से आंगन में फुदकें, खेलें-कूदें और तुम उनके साथ एक खुशहाल ज़िंदगी बिताओ। मेरे लिए यही सबसे बड़ी दौलत होगी।" किसान की इस निस्वार्थ और पवित्र भावना ने उस बेज़ुबान जानवर का दिल गहराई तक छू लिया था।
2. लालच की काली छाया और चोर का खौफनाक कदम
| एक काली रात |
लेकिन कहावत है कि दुनिया में जहां अच्छाई होती है, वहां बुराई और लालच भी अपनी जगह बना ही लेते हैं। उसी ( माया ) गांव में एक बेहद लालची और शातिर चोर रहता था।उसकी नज़रें बहुत दिनों से इस किसान की कुटिया और उस सुनहरी मुर्गी पर गड़ी हुई थीं।
वह छिप-छिप कर देखता था कि कैसे वह मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती है। चोर के मन में रातों-रात दुनिया का सबसे अमीर और ताकतवर इंसान बनने का लालच पैदा हो गया। वह किसान की सादगी का मज़ाक उड़ाता और सोचता कि यह बेवकूफ किसान इतने बड़े खजाने का सही इस्तेमाल नहीं कर रहा है।
लालच ने उसकी आंखों पर ऐसी पट्टी बांध दी थी कि उसे सही और गलत का कोई फर्क नज़र नहीं आ रहा था। फिर एक दिन, एक काली रात आई। पूरा गांव गहरी नींद में सोया हुआ था और आसमान में अजीब सा सन्नाटा पसरा था। चोर ने इसी सन्नाटे का फायदा उठाया। वह दबे पांव, बिना कोई आवाज़ किए किसान के आंगन में घुसा और उस मासूम, सोती हुई मुर्गी को एक बोरे में डालकर चुरा ले गया। किसान अपने सुनहरे सपनो में सोया था, इस बात से बेखबर कि उसकी खुशी को किसी की बुरी नज़र लग चुकी है।
3. इमली के पेड़ का खौफनाक सच और भटकती आत्मा का रुदन
चोर उस मुर्गी को लेकर गांव की सरहद के बाहर उसी विशाल इमली के पेड़ के पास पहुंचा। रात के अंधेरे में उसका लालच इस कदर हावी हो चुका था कि उसकी सोचने-समझने की ताकत खत्म हो गई थी। उसने सोचा, "अगर यह मुर्गी रोज़ एक सोने का अंडा देती है, तो इसके पेट में तो सोने के अंडों का पूरा खजाना भरा होगा! मैं आज ही इसके पेट से सारा सोना निकाल लूंगा।
" इसी पागलपन और हैवानियत में आकर, उस चोर ने बिना एक पल सोचे उस मासूम मुर्गी को बेरहमी से काट डाला। लेकिन जैसे ही उसने देखा, उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं। वहां कोई सोने का खजाना नहीं था, बल्कि एक आम पक्षी का खून था। अपनी इस भयानक मूर्खता और खोए हुए खजाने के गम में चोर पागल हो उठा। उसने गुस्से में उस मरी हुई मुर्गी को उसी इमली के पेड़ के नीचे एक गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ दिया और वहां से भाग निकला।
| इमली के पेड़ के नीचे एक गहरा गड्ढा खोदकर गाड़ दिया |
उस मनहूस रात के बाद से वह इमली का पेड़ हमेशा के लिए शापित हो गया। गांव वालों का मानना है कि आज भी, जैसे ही घड़ी में शाम के 7 बजते हैं, उस पेड़ के नीचे से एक बेहद दर्दनाक और अजीब सी रोने की आवाज़ें आने लगती हैं।
वह आत्मा अपने छिने हुए सोने के लिए नहीं रोती, बल्कि वह अपने उस नेक किसान के आंगन को याद करके रोती है, जहां उसने एक आम मुर्गी बनकर अपने बच्चों के साथ जीने का वह प्यारा सपना देखा था।
4. कहानी में नया मोड़: खंडहर में छिपे अनजान चोर की दस्तक
इस डरावनी घटना के बाद पूरे माया गांव में उस इमली के पेड़ का ऐसा खौफ बैठ गया कि लोगों ने उस रास्ते से गुज़रना ही पूरी तरह से बंद कर दिया।
दिन ढलते ही वह इलाका किसी वीरान कब्रिस्तान से भी ज्यादा भयानक हो जाता था। लेकिन कहानी में एक नया और रहस्यमयी मोड़ तब आया, जब कुछ महीनों बाद गांव में एक नए और अनजान चोर का आगमन हुआ।
यह अजनबी इस गांव के खौफनाक इतिहास, उस शापित पेड़ और भटकती आत्मा की कहानी से पूरी तरह अनजान था। वह बस अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिए एक ऐसी खुफिया जगह की तलाश में था, जहां इंसानों की परछाई तक न पड़ती हो। अपनी इसी तलाश में वह उस शापित इमली के पेड़ से कुछ एक मिनट की दूरी पर मौजूद एक पुराने, बंजर खेत तक पहुंच गया।
| खेत के बीचों-बीच एक पुराना, टूटा-फूटा और जर्जर खंडहर था |
वह खेत सालों से वीरान पड़ा था, बड़ी-बड़ी जंगली झाड़ियों ने उसे घेर रखा था। उसी खेत के बीचों-बीच एक पुराना, टूटा-फूटा और जर्जर खंडहर था। उस नए चोर को यह डरावनी और सुनसान जगह अपने छिपने के लिए सबसे बेहतरीन लगी। उसने बिना किसी डर के उसी खंडहर को अपना नया ठिकाना बना लिया।
अब उसका रोज़ का रूटीन बन गया था कि वह रात के अंधेरे में चोरी करता और सारा लूटा हुआ माल लाकर उसी खंडहर में छिपा देता।
वह अपनी इस नई ज़िंदगी में मस्त था, लेकिन वह इस भयानक सच से पूरी तरह बेखबर था कि जिस जगह को वह अपना सबसे सुरक्षित ठिकाना मान रहा है, उसके ठीक बगल में रोज़ शाम 7 बजे एक दर्दनाक और बेचैन आत्मा का साया जाग उठता है।
मुर्गी का साया जाग उठने के बाद आगे क्या होता है कल देखेंगे भाग 2 में
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