चिंतामणि राज्य और राजकुमार दयावीर - भाग 3 | hindi kahaniya

1. जंगल में जब एक तरफा प्यार दो तरफा बन गया



जब उस  लड़ाई में राजकुमार दयावीर ने राजकुमारी कुमारी को लड़ते हुए देखा, तो वे बस देखते ही रह गए। अभी तक जो राजकुमारी एक कोमल फूल की तरह लग रही थी, वही इस समय रणभूमि में बिजली की तरह चमक रही थी। उसकी तलवार की हर चाल में फुर्ती थी, उसकी आँखों में निडरता थी और सबसे बड़ी बात, उन बेजुबान जानवरों के लिए उसके दिल में सच्चा प्रेम था।


राजकुमार दयावीर ने अपने जीवन में कई बड़े-बड़े योद्धा देखे थे, पर ऐसा संगम जहाँ सुंदरता, कोमलता और वीरता तीनों एक साथ हों, पहली बार देखा था। उसी पल राजकुमार ने भी अपना मन राजकुमारी कुमारी को दे दिया। अब दोनों में प्यार दो तरफा हो चुका था।


जंगल में लड़ाई खत्म होने के बाद, चारों तरफ गहरी शांति छा गई। घायल सैनिकों की मदद की जा रही थी और बंदी बनाए गए शिकारियों को एक तरफ खड़ा किया गया था। तभी राजकुमार दयावीर धीरे-धीरे राजकुमारी कुमारी के पास आए, उनका हाथ थामा और सबके सामने अपने दिल की बात कह दी।


राजकुमार दयावीर: "राजकुमारी कुमारी, मैं भी आप पर मोहित हो चुका हूँ। जब से आपको इस रूप में देखा है, मेरा हृदय आपका हो चुका है। मैं चाहता हूँ कि तुम मुझे अपने राज्य वैय्यार ले चलो, ताकि मैं आपके पिता महाराज से हमारी शादी की बात बढ़ा सकूँ।"


ये शब्द सुनते ही राजकुमारी कुमारी की आँखें खुशी से छलक उठीं। वह अपने आँसू रोक नहीं पाई और खुश होकर राजकुमार दयावीर को अपनी बाहों से जकड़ कर बोली, "राजकुमार, आपके मुँह से ये बातें सुनकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मुझे लगा था मेरा प्रेम अधूरा रह जाएगा।"


उन दोनों की जोड़ी देखने में बेहद खूबसूरत लग रही थी। राजकुमारी कुमारी बहुत खुश थी।

2. वैय्यार राज्य के सिंह द्वार पर फूलों की बरसात



उस दिन राजकुमार दयावीर ने चिंतामणि राज्य वापस जाना छोड़ दिया। उन्होंने फैसला किया कि वे अपनी पूरी टोली और उन पकड़े गए शिकारियों को लेकर वैय्यार राज्य ही जाएंगे।


जैसे ही राजकुमार और राजकुमारी वैय्यार राज्य पहुँचे, उसी पल उस राज्य के सिंह द्वार पर एक अद्भुत दृश्य उनका इंतजार कर रहा था। राजकुमारी की सभी सखियों ने पहले से ही पूरे द्वार को गेंदे के फूलों से सजा रखा था। उनके हाथों में फूलों की टोकरियाँ थीं। उन्हें पहले से ही पता था कि कुमारी अपने प्यार राजकुमार दयावीर के साथ ही आएंगी इसी लिए सखियां पहले से ही स्वागत में तैयार थी। 


जैसे ही दोनों ने राज्य में प्रवेश किया, सखियों ने खुशी से चिल्लाते हुए दोनों के स्वागत में फूलों की जोरदार बरसात कर दी। ढोल-नगाड़े बजने लगे। क्योंकि उन्हें पता था कि राजकुमारी अगर राजकुमार दयावीर के साथ आएगी, तो कोई बड़ी खुशखबरी के साथ ही आएगी।


ये सब उत्सव देख कर वहाँ भीड़ में खड़े किसी एक के कलेजे में जलन शुरू होने लगी थी। वह इस प्यार को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी।

3. राजमहल में महाराजा का न्याय और राजकुमार की उदारता



अगले ही पल जब सब वैय्यार राज्य के राजमहल के अंदर पहुँचे, तो महाराजा अपनी पूरी सभा के साथ बैठे थे। उन्होंने बाहर हो रही फूलों की बरसात देखी और आश्चर्य से पूछा, "राजकुमारियों, ये कौन हैं जो बंदी बन कर आए हैं? और ये सज्जन कौन हैं जिनकी आँखों में राजाओं जैसा तेज है?"


उस बात का जवाब राजकुमारी कुमारी ने आगे बढ़ते हुए, बिना किसी डर के दिया, "पिताश्री, ये चिंतामणि राज्य के राजकुमार दयावीर हैं और मैं इनसे प्रेम करती हूँ। इन्होंने आज हमारे जंगल को इन लुटेरों से बचाया है।"


महाराजा इस बात से बहुत खुश हो गए और उन्होंने तुरंत उनके प्यार को स्वीकार कर लिया।


फिर सभा बैठाकर महामंत्री से पूछा गया कि उन जंगल के घुसपैठियों का क्या किया जाए। महामंत्री ने कठोर आवाज में कहा, "महाराज, इनको आजीवन कारागार दिया जाए, ताकि कोई और ऐसी हिम्मत न करे।"


पर तभी राजकुमार दयावीर ने बीच में आवाज उठाते हुए कहा, "रुको महाराज, अगर आप इजाजत दें तो मैं एक मशवरा देना चाहता हूँ।"


महाराजा ने कहा, "आपको इजाजत है राजकुमार, कहिए।"


राजकुमार ने कहा, "महाराज, ये लोग कोई चोर या डाकू नहीं हैं। अगर होते तो सिर्फ जानवरों को नहीं, हमारे महलों में घुसकर सोना-चांदी चुराते। इन्होंने राज्य की सीमा का सम्मान रखा और सिर्फ पेट भरने के लिए ये काम किया। मेरा सुझाव है कि इन्हें कारागार न दिया जाए।"


महाराजा ने पूछा, अगर इन चोरों को। आप अपने राज्य चिंतामणि लेकर जाते तो  "तो आप  इन चोरों के साथ क्या करते?"


राजकुमार ने विनती से कहा, "मैं इनके परिवार को देखते हुए इन्हें एक मौका देता, एक-एक एकड़ जमीन और एक घर देकर इज्जत से जीने का मौका देता और इनके बच्चों को शिक्षा देता। फिर भी अगर ये गलती करते तो दंड देता।"

4. शादी का शगुन और महल में छुपा नया कपट



यह सुनकर पूरी राज्यसभा में सन्नाटा छा गया और फिर तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी। महाराजा अपने सिंहासन से उठकर खड़े हो गए और बोले, "जय हो राजकुमार दयावीर की! हम आपकी इस सोच से बहुत सहमत हैं।"


उसके बाद राजकुमार को पूरे सम्मान के साथ विदा किया गया और महाराजा खुद अपनी बेटी की शादी का शगुन लेकर चिंतामणि राज्य पहुँचे। वहाँ उन्होंने दृढ़ महाराजा से बात करके बड़ी धूमधाम से उन दोनों की शादी पक्की करा दी।


और कुछ दिनों के बाद बाहर के सारे राज्यों में उनकी शादी की शहनाई की आवाज सुनाई दी। बाहों धूम धाम से उनकी शादी की गई समन्दर के सीमाओं ,बाहरी देशों तक उनकी शादी के चर्चे हुए इतनिंदुम धाम से उनकी शादी कराई गई कि पूरी दुनिया उनकी शादी के चरचे करते के करते रह गए। 


सब बहुत खुश थे, पर सभा में एक और थी, जिसका दिल उस राजकुमार दयावीर पर आ गया था। उसके मन में राजकुमारी कुमारी के लिए प्यार नहीं, बल्कि कपट भर चुका था। उसे कैसे भी अब राजकुमार दयावीर की बाहों में खुद को समेटना था।


अब आगे क्या होगा? कौन थी वो जिसने इस सुंदर जोड़ी को देखकर जलन पाल ली? क्या वो बड़ी बहन कामिनी थी या कोई खास सखी?


यह जानने के लिए मेरे भाग 4 का इंतजार करिए।

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