मोबाइल का भूत | Hindi Story
मोबाइल का भूत | Hindi Story
डिस्क्लेमर: यह कहानी सिर्फ काल्पनिक रूप से लिखी है इस कहानी के सभी पात्र और घटनाएं सिर्फ काल्पनिक है इसमें लिखे गए सभी पात्र किसी के निजी जिंदगी से कोई तालुक नहीं रखते ये सिर्फ मनोरंजन एवं सोशल अवेयरनेस के लिए लिखी गई है
दुनिया में बहुत सारे देश और बहुत सारे शहर और बहुत सारे गांव है और यह बात है दुनिया के एक कोने से एक छोटे से गांव की और गांव का नाम है मेंढक पर और इसी मेंढकपुर में रहता है
बच्चा और उसकी आदत
एक 9 साल का बच्चा जिसका नाम है टिंकू टिंकू का पापा इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट में ऑपरेटर है और उसके पापा की सैलरी सीनियर होने की वजह से 35 हजार तक आ जाता सरकारी जीवन मतलब सैलरी और थोड़ा बहुत पार्ट टाइम में इधर उदार कमाई थोड़ा ज्यादा होने की वजह से वो टिंकू को कुछ ज्यादा ही लाड प्यार दे देता है
उसकी मां और ज्यादा लाड करती है वो बच्चा
सुबह सुबह उठता है और उठते ही मोबाइल पकड़ता है "खाना खाते" समय मोबाइल ,सोते समय मोबाइल , यहां तक की वाश रूम में भी मोबाइल
ऐसा मान के चलो की टिंकू के इस आदत की वजह से टिंकू के पापा बहुत परेशान हो चुके थे , टिंकू के पापा को उसके आने वाले कल को लेकर बहुत चिंता होने लगीं
टिंकू की जिद्द हद्द पार हो चुकी थी पर कभी टिंकू के पापा टिंकू को गुस्सा कर के चिल्लाता तो टिंकू की मां उसको फुल सपोर्ट दे देती
टिंकू के पापा : हर वक्त मोबाइल मोबाइल अरे टिंकू कभी पढ़ाई भी कर लिया कर हमेशा मोबाइल चलाता रहता है पढ़ाई लिखाई छोड़ के हमेशा फोन देखोगे तो बड़ा होकर क्या काम करोगे
टिंकू की मां : आप भी न बच्चे को मत चिल्लाओ हमेशा मेरे बेटे को चिल्लाते रहते हो बच्चा है इतनी जल्दी उसे समझ थोड़ी आएगी
टिंकू के पापा : अरे शर्म करो तुम्हारे इस लाड प्यार की वजह से बच्चा "बिगड़ जा रहा है" बाहर के बच्चों को देखो कितना "पढ़-लिख" रहे है और हमारा बेटा हैं कि हर पल सिर्फ फोन फोन बस तुम्हारे इस लाड प्यार ने उसे फोन का आदी बना दिया है
मोबाइल है कि भूत इतना पोजेसिव
इतनी छोटी सी उम्र में इतना एडिक्शन भी सही नहीं था उसके पिता को उसकी चिंता थी पर करता भी क्या दिन भर काम के सिलसिले में एक पिता को दिन के 12 घंटे बाहर ही रहना पड़ता है
शाम को थक-हार कर जब ऑफिस से घर आता है तो निढाल होकर / लेट कर खाना खा कर सो कर सुबह उठने का समय भी कम कम मिलता है
इतने में अगर अपनी पत्नी से अगर वो कहता है कि इसे थोड़ा सा मोबाइल से दूर रखो तो उसके पिता को सुनने को कुछ ऐसा मिलता है
आपका क्या है सुबह निकलते हो सिर्फ शाम को आते हो साहब की तरह आना और सुबह चले जाना न हाल पूछना न चाल
दिन भर मुझे घर संभालना पड़ता है ये करना पड़ता है वो करना पड़ता है मार्केट जाना पड़ता है खाना बनाना पड़ता है कपड़ा धोना पड़ता है
आप सुबह जाते हो और घर आकर सो जाते हो इस दौरान ये टिंकू कितना जान खा जाता है आपको क्या पता इसको झेल कर मेरी जान निकल जाती है और ऊपर से
आपका कपड़ा प्रेस करना और आपके लिए स्पेशल खाना पीना
टिंकू के पापा: अरे मै कुछ स्पेशल मांगा ही नहीं ... है जी मैने कब कहा कि स्पेशल बना दो मेरे लिए कह के
टिंकू की मम्मी अरे कुंदरू नहीं खाते , करेला नहीं खाते , भिंडी से चिढ़ है , और बैंगन से नफरत आपके लिए सिर्फ दाल भात स्पेशल बनाना ही तो पड़ता है हर रोज
टिंकू के पापा : अरे भाई कोई लजीज पकवान तो नहीं मांगता हु ना मै तो सादा ही हु
और सिर्फ दाल मांगता हु बस और कुछ नहीं ना
टिंकू की मां :जो भी हो आपका बच्चा है आप खुद संभालो
बेचारे पति का दुख और अंदरूनी दर्द
हर रोज बेचारा अपनी पत्नी का ताना सुन सुन कर वो आखिर करता भी क्या न वो अपनी बीवी पे चिल्ला सकता था और ना बचे को डांट सकता था अगर बच्चे को थोड़ा ऊंची आवाज में
अरे टिंकू दिन भर मोबाइल मोबाइल करता रहता है कब सुधरेगा तू ऐसा कुछ चिल्ला कर अगर बोल दिया तो उसकी बीवी तुरंत बोल देती है
आप उसे फालतू में इतना क्यों चिल्ला रहे हो बच्चा है उसे क्या पता थोड़ा बहुत देख लेने दो
और आप ऑफिस का गुस्सा हम दोनों पर मत निकालो , बोल उसे रहे हो पर ताना आप मुझे मार रहे हो
रोते हुए मै क्या कुछ नहीं करती आपके लिए फिर भी मुझे सुनाते हो थोड़ा भी प्यार नहीं करते आप मुझसे एसा बोलकर नाराज़ हो जाती और पत्ती को बाहर खाना खा कर आना पड़ता है और वो अपने मन ही मन में अंदर ही अंदर ऐसा सोचता है
अरे यार आखिर मैं करूं भी तो क्या ही करूं एक तो इनलोगों के लिए मै दिन रात मेहनत करता हु कभी धूप में जलता हु तो कभी ठंड में मारता हु मै इनका पेट पालने के लिए इतना जतन करता हु फिर भी घर में मुझे इनसे सुनना पड़ता है
ऐसे में तो टिंकू का भविष्य खराब हो जाएगा ये कब सुधरेगी यार
बता बता कर थक गया हु मै अब क्या ही करूं "एक तरफ कुआँ और एक तरफ खाई" जिसमें जो भी हो डूबना तो मेरे को ही है ना
आगे की दर्द भरी कहानी भाग 2 में पढ़ेंगे बने रहिए और फॉलो कर लीजिए मेरे ब्लॉग को
प्रया पाठकों मैने आपके लिए एक और अच्छी कहानी लिखी है जो बच्चों और बड़ी के लिए भी बहुत दिलचस्प है इसमें जो भी अक्षर मैने लिखे हर लब्ज़ मैने अपने दिल से बुने है कि सिर्फ आप लोगों को अच्छा लगे यह पर क्लिक कर कर पढ़िए 👉रानी वास्तविका की कहानी
और मोबाइल का भूत भाग के लिए इस टेस्ट को क्लिक कीजिए आपको भाग 2 मिल जाएगा
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