मोबाइल का भूत 2 | Hindi story

 मोबाइल का भूत 2 |Hindi story

डिस्क्लेमर: यह कहानी सिर्फ काल्पनिक रूप से लिखी है इस कहानी के सभी पात्र और घटनाएं सिर्फ काल्पनिक है इसमें लिखे गए सभी पात्र किसी के निजी जिंदगी से कोई तालुक नहीं रखते ये सिर्फ मनोरंजन एवं सोशल अवेयरनेस के लिए लिखी गई है


  मोबाइल का पागल पन हद्द पार हो गई

मोबाइल से शादी
टिंकू की दुल्हन मोबाइ


पहले से टिंकू का पापा बहुत परेशान थे कि इसका ये मोबाइल का लत कैसे छुड़ाना है और उसकी पढ़ाई को कैसे इंप्रूव करना है
ऊपर से ये टिंकू की मां उसे ये सब अच्छा लग रहा था  

अरे ये मोबाइल का पागल का पागल पन इस हद्द तक बड़ गया था कि वो उसके मोबाइल के पागल पन को एक मजाक बना कर अपनी सहेलियों को बुला बुला कर टिंकू की दुल्हन मोबाइल है और हमने टिंकू की शादी मोबाइल से कर दी बोल कर घर में एक तमाशा का माहौल बना दिया और अड़ोस पड़ोस की औरतें घर में अलग सा माहौल बना कर रख दिए

ये सब देख कर क्या करना है और क्या नहीं ये पागल पन बच्चे तक तो ठीक था पर अब उसकी मां और अड़ोस पड़ोस वाले भी शामिल है
ये बात बहुत गलत लग रही थी 

अब क्या है कि टिंकू के पापा के पास कोई चारा भी नहीं था कुछ ना बोले तो कम और बोले तो ज्यादा बिगड़ते बच्चों को अगर उसकी मां ही बढ़ौती दे तो एक पिता कर भी क्या सकता है 

 मोबाइल से बचे की शादी का मजाक टिंकू का सबर     तोड़ दिया

मोबाइल का चल बारात चल  तेरी शादी करवाते है
टिंकू तेरी दुल्हन

टिंकू के पापा ने बहुत सब्र किया हर बात को सहा पत्नी की बेरुखी को झेला उसकी उठ पट्टांग शब्दों  को सहा

लेकिन यह हर रोज का हो गया था टिंकू के मां के रिश्तेदार एक दिन टिंकू के मां से मिलने  2 दिन के लिए आए और टिंकू से ऐसे ही मस्ती मजाक करते हुए

टिंकू की बुवा बोली अरे टिंकू कहा है तेरी दुल्हन 
टिंकू की नानी चल रे टिंकू तेरी दुल्हन लाने बारात जाएंगे तू तो दीवाना है मोबाइल का चल बारात चल  तेरी शादी करवाती है 

तेरी इस  मोबाइल से  ये कह कर उठी , और टिंकू की मम्मी इतने में टिंकू को पूरी तरह दूल्हा के जैसे सजा दी और वहां  सब हंसने लगे 

उसी वक्त ऑफिस से जल्दी छुट्टी लेकर टिंकू के पापा जैसे ही घर पहुंचे तो ये सब देख कर उसके पिता का खून खोल गया गुस्से में उसका चेहरा लाल हो गया।

उसने थोड़ा सब्र से नरमी दिखाई और टिंकू को सीने से लगाकर 
बोला टिंकू तुम पढ़-लिख कर मुझे कब खुश करोगे 
टिंकू ने उदासी से सौरी पापा अब नहीं करुंगा ये बात सुनकर 

टिंकू का पिता बहुत खुश हो गया 


       मोबाइल में पब जी , फ्री फायर गेम की लत

अपने पत्नी को जोर से चिल्लाया
अपने पत्नी को जोर से चिल्लाया



पर वो खुशी ज्यादा दिन नहीं रही अगले दिन जब फिर टिंकू का पिता ऑफिस से घर पहुंचा तो देखा कि टिंकू अब सीधा पब जी , और फ्री फायर का आदी हो चुका है , और उसे उस गेम की गंभीर आदत लग चुकी है वो अपना दिमागी संतुलन  खो चुका था जहां भी देखो एनिमी आ हेड , और यम 416 , और हेड शॉट बोलकर पागलों जैसा बर्ताव करने लगा

टिंकू के पिता को कुछ समझ में नहीं आया उसने अपने पत्नी को जोर से चिल्लाया और कहा मुझे नहीं चाहिए तुम्हारे जैसी बीवी और मेरे बेटे को भी नहीं चाहिए तुम्हारे जैसी मां निकल जाओ मेरे घर से बाहर 

मै अपने बच्चे का देख रेख खुद कर लूंगा बोलकर चिल्लाया 
अपने पति के मुंह से ऐसा सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई और वो रोते हुए कमरे के एक कोने बैठ गई ।

टिंकू के पापा ने उसकी मां पर ध्यान देना छोड़ कर टिंकू को  उठाकर
एक मनोचिकित्सक डॉक्टर के पास ले गया 

और उस हॉस्पिटल में बहुत सारे टेस्ट हुए खून से लेकर दिमाग के नसों तक का टेस्ट किया गया दिमाग में कोई बीमारी या खराबी नजर  नहीं आई


पूरे एक महीने तक उसकी मां दोनों को पागलों की तरह ढूंढते रही

क्या ये मेरी गलती थी कि जो हर पिता अपने परिवार के बारे में सोचता है मैने वही सोचा है
परिवार



डॉक्टरों ने बिना किसी बीमारी के भी mobile addiction of child सिर्फ इस एक रीजन के लिए खास कर पब जी खेल जो उसके दिमाग पर असर पहुंचा रहा था

इस एडिक्ट को छोड़ने के लिए टिंकू और टिंकू के पिता को दोनों को बिना मोबाइल और टीवी या कंप्यूटर के एक महीने तक एक ऑर्गेनिक फॉर्म में रखा गया जब तक टिंकू को मोबाइल एडिक्शन ना छुटे जाए  तब तक

और पूरे इस एक महीने तक टिंकू की मां बिना पति और बिना बच्चे के पूरे  शहर में ढूंढती रही उनका फोटो लेकर यह कहते हुए कि कोई इन्हें देखे हो  तो बताओ  सर ,मैडम बस यही कह कह कर हर जगह पूछती रही 

वो औरत जो पति को कचरा समझ रही थी इस एक महीने में बिना पति के अकेली औरत की जिंदगी कैसी होती है उसे अहसास और पश्चाताप हुआ जब तक पति का साया था वो सोने की तरह घर की रानी थी जब उसे अकेला छोड़ दिया गया उसे महसूस हुआ कि बाहरी दुनिया में जानवरों के सिवा कुछ अन्य नहीं है

वो अड़ोसी पड़ोसी जो उसके घर हाल चाल पूछने आते थे वहीं लोग इन 30 दिन कैसे इस अकेली का फायदा उठाया जाए ऐसी रणनीति में थे 

भूख प्यास के अहसास और बिन परिवार के जिंदगी क्या होती है उसे इन 30 दिनों में पता चल गया 

उसने अपने पति को किस तरह जलील किया ये सोच कर जब वो पछताने लगी उसी पल 

टिंकू और उसके पापा हंसते खेलते घर आते हुए दिखे और टिंकू के मां के आंखों में खुशी उभर उठी 

पर टिंकू के पापा ने इतने में हार नहीं मानी 

बल्कि टिंकू और टिंकू की मां को दोनों को उसी दिन बिना हाल पूछे ही

एक ऐसी जगह लेकर गया जहां सिर्फ बिन परिवार के अनाथ बच्चे रहते थे 

उस जगह ले जाने के बाद टिंकू के पापा ने 

कहा : सुनो टिंकू और टिंकू की मां  टिंकू तुम हमेशा मोबाइल में घुसे रहते थे मै कैसे काम रहा हु कैसे तुम्हे पढ़ा रहा हु इस बात से तुम्हे कोई मतलब नहीं था देखो दुनिया की सच्चाई यही है तुम्हारे पास हर  वो चीज है जो इनके पास नहीं है सोचो ।

और आज के बाद अच्छे से पढ़ाई करो और मैं राहु या ना राहु तुम अपनी जिंदगी खुद सुधारो इस दुनिया में बिना कामयाबी के कोई किसी का सगा नहीं होता , और तुम टिंकू की मां मैने अपना खून पसीना बहाया है तुम दोनों के लिए  

 क्या मैने तुम दोनों को ऐसे अधूरा छोड़ा है सोचो एक बार जब भी घर आता हु हर बात पर ताना मारती रहती हो यहां तक मै 2 निवाला भी कभी ठीक से खा नहीं सका हु मैने तुम्हारे साथ क्या अन्याय किया है तुम बताओ 

क्या ये मेरी गलती थी कि जो हर पिता अपने परिवार के बारे में सोचता है मैने वही सोचा है 

क्या तुम्हे पता है सुबह निकलते ही मै सिर्फ जिंदगी जीने के लिए संघर्ष करता हु क्या पता कौन सा बिजली का वायर मुझे छू ले और मेरी जान चली जाए 
पर मै दिन भर सिर्फ जिंदा घर पहुंचने के लिए संघर्ष करता हूं 

और घर आते ही तुम ये सुनाती हो कि मै तुम्हारे बच्चे के लिए करता ही क्या हु ?

अब बताओ मैने क्या गलत किया ?

ये सब सुन कर टिंकू और टिंकू की मां दोनों टिंकू के पापा के पैर छू कर सॉरी बोलकर उसके सीने से लिपटकर रो कर पश्चाताप करते है

और टिंकू के पापा उस जगह उन बच्चों को अपनी कमाई का 25%  टिंकू के हाथों से डोनेशन करवाता है 

और कहता है आज से तुम पड़ लिख कर बड़े साहब बनना और सबकी मदद करना 





निष्कर्ष / कहानी से मिलने वाली सीख (Moral of the Story)
इस कहानी से हमें जिंदगी की कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण और कड़वी सच्चाइयों की सीख मिलती है:


अंधा लाड-प्यार भविष्य बिगाड़ सकता है: बच्चों को प्यार देना हर माता-पिता का फर्ज है, लेकिन उनके हर गलत जिद्द को पूरा करना और उनकी गलतियों का बचाव करना उनके भविष्य को पूरी तरह बर्बाद कर सकता है।


मोबाइल एक सुविधा है, पूरी दुनिया नहीं: आज के डिजिटल युग में बच्चों को मोबाइल और ऑनलाइन गेम्स (PUBG, Free Fire) की लत से बचाना बेहद जरूरी है। बच्चों को वर्चुअल दुनिया से निकालकर असल जिंदगी की सच्चाइयों से रूबरू कराएं।


पिता के संघर्ष और बलिदान का सम्मान: एक पिता अपने परिवार की खुशियों के लिए दिन-रात बाहर जो खून-पसीना बहाता है और खामोश रहकर जो संघर्ष करता है, परिवार को हमेशा उसका सम्मान करना चाहिए।

संस्कार गैजेट्स से ज्यादा जरूरी हैं: बच्चों के हाथ में महंगे फोन देने से कहीं बेहतर है कि हम उन्हें सही संस्कार दें। उन्हें समाज की असलियत दिखाएं ताकि वे अपनी सुख-सुविधाओं की कद्र कर सकें और बड़े होकर एक जिम्मेदार व मददगार इंसान बनें।


पाठकों के लिए एक संदेश:
"दोस्तों, बचपन बहुत कीमती है, इसे मोबाइल की स्क्रीन में खोने मत दीजिए। अगर आपके घर में भी कोई 'टिंकू' है, तो समय रहते सावधान हो जाइए। अपनों को समय दीजिए, गैजेट्स को नहीं।"

इस कहानी के पार्ट 1 के लिए यहां क्लिक करे 

इसको भी पढ़ लो एक ऐसा वेदांत जिसको वेदांत नहीं पता अगर पता होता तो बादाम का पेड़ काटने को नहीं बोलता यहां क्लिक   करे 👉 यहां क्लिक करे


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