मुनिया 3 | Hindi thriller and suspancefull story
1. विलेन्स की चेतावनी और बंद दरवाजे का सन्नाटा
लेडीज हेल्पलाइन से निराशा हाथ लगने के बाद मुनिया पूरी तरह अंदर से टूट चुकी थी। वह उस ठंडे फर्श पर चुपचाप बैठ गई और उसे अपना भविष्य पूरी तरह अंधकार में नजर आने लगा।
तभी अचानक उसे बाहर गैलरी से किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। मुनिया एकदम सकपका गई। उसने तुरंत अपनी सिसकियों को रोकने के लिए अपने दोनों हाथों से अपना मुंह कसकर दबा लिया, ताकि अंदर से रोने की आवाज भी बाहर न जा सके। उसका दिल बहुत जोर से धक धक धक धक धक धक धक धक करके धड़क रहा था रिमझि सिमझी सी होकर अपने धड़कनों को काबू करने की कोशिश कर रही थी।
दरवाजे के ठीक बाहर मलिका की भारी आवाज गूंजी:
मलिका: "ये सुन, हम दोनों बाहर जा रहे हैं, शाम तक आ जाएंगे, नया काम मिला है, तैयार रहना, भागने का सोचना भी मत।"
मुनिया ने अपनी कांपती हुई आवाज को समेटते हुए अंदर से ही बहुत धीमी आवाज में जवाब दिया:
मुनिया: "हाँ।"
बाहर से एक जोरदार आवाज आई - खट! मलिका और हारिका ने बाहर से दरवाजे पर ताला लटका दिया और वहाँ से चली गईं। उनके कदमों की आवाज जैसे-जैसे दूर होती गई, मुनिया की सांस में सांस आई। पर अब पूरे कमरे में सिर्फ एक खौफनाक सन्नाटा असरा पसरा हुआ था।
2. आखिरी उम्मीद और बूढ़े कॉन्स्टेबल का ट्विस्ट
मलिका और हारिका के जाने के बाद मुनिया ने एक बार फिर हिम्मत जुटाई। उसने अपने मोबाइल की स्क्रीन ऑन की। इस बार उसने लेडीज हेल्पलाइन के चक्कर में पड़ने के बजाय सीधे पुलिस स्टेशन का नंबर डायल किया।
उसने फोन कान से लगाया, पर पहली बार में सामने से किसी ने फोन नहीं उठाया। मुनिया ने हार नहीं मानी। उसने एक के बाद एक लगातार 4 बार और कॉल लगाया। चौथी बार में आखिरकार दूसरी तरफ से फोन उठा और एक भारी, बुजुर्ग आवाज सुनाई दी।
कॉन्स्टेबल: "हेलो, कौन बोल रहे हो?"
मुनिया की आँखों से फिर आँसू बहने लगे, उसने हांफते हुए कहा:
मुनिया: "सर मेरी जान खतरे में है, मुझे बचा लो।"
दूसरी तरफ से कॉन्स्टेबल ने शांत लहजे में कहा:
कॉन्स्टेबल: "रुको, आराम से बताओ, आप कहाँ से हो?"
मुनिया को लगा जैसे डूबते को कोई सहारा मिल गया हो। उसने बिना एक सेकंड गंवाए फटाफट अपना पूरा एड्रेस बताया:
मुनिया: "चादू नगर, सर एड्रेस 5/24 ए।"
पर किस्मत मुनिया की यहाँ भी खराब निकली। इतनी कोशिशों के बाद जो उम्मीद की किरण दिखी थी, वो पल भर में बुझ गई। दरअसल, फोन पर जो कॉन्स्टेबल थे, वह बहुत पुराने समय के थे, जिन्होंने बहुत पहले पुलिस फोर्स ज्वाइन की थी। उस समय पढ़ाई का तरीका अलग था। बढ़ती उम्र और कम सुनाई देने के कारण उस बूढ़े कॉन्स्टेबल को मुनिया की बात ठीक से समझ नहीं आई। वह मुनिया का बताया हुआ एड्रेस पेपर पर नोट ही नहीं कर पाया। मुनिया फोन पर बोलती रही, लेकिन उधर से मदद नहीं मिल पाई।
3. मौत की खिड़की और 13 फीट ऊंची छलांग
अब मुनिया के पास कोई चारा नहीं बचा था। तभी अचानक उसके मोबाइल की बैटरी पूरी तरह खत्म हो चुकी थी और स्क्रीन काली पड़ गई। फोन चार्ज करने का चार्जर दूसरे कमरे में पड़ा था, जहाँ जाने का कोई रास्ता ही नहीं था। देखते ही देखते कमरे में अकेले बैठे हुए पूरे 3 घंटे बीत गए।
अब उसने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा फैसला ले लिया था कि चाहे जो हो जाए, आज इस जगह से किसी भी तरह निकलना ही है। उसने कमरे में ऊपर की तरफ देखा। वहाँ दीवार पर एक छोटी सी हवा वाली खिड़की थी। मुनिया की किस्मत कहिए, उस खिड़की के स्क्रू ढीले थे, वह बस जैसे-तैसे दीवार पर टिकी हुई थी।
मुनिया ने कमरे में रखे एक पुराने बक्से का सहारा लिया और जैसे-तैसे ऊपर चढ़ गई। उसने खिड़की के पल्ले को जोर से धक्का दिया और बाहर की तरफ कूद गई।
वह खिड़की जमीन से काफी ऊंचाई पर थी। इतनी ऊंचाई से अचानक नीचे गिरने की वजह से मुनिया के सीने में बहुत तेज दर्द शुरू हो गया।
4. दर्द, हिम्मत और आजादी की दौड़

जमीन पर गिरने के बाद मुनिया कुछ सेकंड के लिए वहीं बैठी रही। लेकिन उस वक्त उसे अपने शरीर के दर्द से ज्यादा अपनी बहन की चिंता थी। उसके दिमाग में सिर्फ एक ही बात थी - "चाहे जो हो जाए, बस यहाँ से मैं किसी तरह निकल जाऊँ, बस अपनी बहन को ढूंढ लूँ!"
मुनिया उठी और बाहर की तरफ भागी। वह बिना पीछे मुड़े बहुत दूर तक भागती चली गई। लगातार भागने की वजह से उसके सीने का दर्द और भी ज्यादा बढ़ गया था, जिससे उसकी सांसें उखड़ने लगी थीं।
भागते-भागते वह शहर के एक सुनसान इलाके में पहुँची। वहाँ उसे बहुत प्यास लग रही थी और दर्द भी हो रहा था। पास में एक छोटी सी दुकान थी। उसने अपनी जेब में बचे कुछ रुपयों से पानी की बोतल और दर्द की एक छोटी सी दवा खरीदी। उसने पानी पिया और दवा ली ताकि वह अपने सीने के दर्द को थोड़ा कम कर सके और हिम्मत जुटा सके।
दवा लेने के बाद भी मुनिया का मन बहुत परेशान था। वह आजाद तो हो चुकी थी, लेकिन उसकी आत्मा अपनी बहन चुनिया के लिए तड़प रही थी।
क्या अकेली मुनिया मलिका और हारिका के चंगुल से चुनिया को बचा पाएगी? अब आगे मुनिया का क्या कदम होगा? जानने के लिए जुड़े रहें और पढ़ें अगला भाग - 'मुनिया (Part 4)' बहुत जल्द!
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