मुनिया 2|Hindi thriller and suspancefull story

1. एक खौफनाक सुबह और चुनिया की अचानक गुमशुदगी



रात को दोनों बहनों ने  मिलकर जो इज्जत की जिंदगी जीने का छोटा सा सपना देखा था, सुबह होते ही वो एक डरावने सच में बदल गया।


जब अगली सुबह मुनिया की नींद खुली, तो उसकी नजर अपने बगल वाले बिस्तर पर गई। पर वहाँ चुनिया नहीं थी। बिस्तर एकदम खाली पड़ा था। मुनिया ने हड़बड़ाकर पूरे कमरे का कोना-कोना छान मारा, लेकिन चुनिया का कहीं कोई नामो-निशान नहीं था। कल रात ही तो    हम दोनों बैठकर इतनी बातें कर रही थीं, और आज सुबह वह अचानक कहाँ चली गई?


मुनिया का दिल किसी अनहोनी के डर से जोर-जोर से धड़कने लगा। उसने खुद से कहा, "फिर अगली सुबह नींद खुली तो मुनिया की नजर में चुनिया नहीं थी, रात को तो दोनों बातें कर रही थीं, अब ये सुबह-सुबह कहाँ गायब हो गई" बोल के वह उसे बाहर ढूंढने के लिए चली गई।


वह अभी बरामदे में पहुँची ही थी कि उसी वक्त मलिका और हारिका सामान्य रूप से आ रहे थे, जैसे कुछ हुआ ही न हो। उनके चेहरों पर एक अजीब सी शातिर खामोशी थी।


मुनिया ने अपनी घबराहट पर काबू पाया और सीधे जाकर पूछा:


मुनिया: "मलिका, चुनिया कहाँ है?"


यह सवाल सुनना था कि मलिका का चेहरा गुस्से से लाल हो गया। उसने मुनिया को घूर कर देखा और चिल्लाई:


मलिका: "तुम मुझसे क्यों पूछ रही हो, रात को तुम दोनों ही तो थीं, हम तो अभी आ रहे हैं।"


बोलकर मलिका ने गुस्से में मुनिया को जोर से धक्का दे दिया। दर्द के मारे मुनिया की आँखों के आगे अंधेरा छा गया। तभी हारिका भी आगे बढ़ा और मुनिया के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाते हुए कड़क आवाज में बोला:


हारिका: "ये सुन, तू सवाल करने के लिए नहीं, हमारी बात मानने के लिए है।"


बोलकर उसने मुनिया का बहुत अपमान किया।


2. मानवाधिकारों का हनन और मुनिया का टूटता कलेजा




दीवार के सहारे बैठी मुनिया दर्द से कराह रही थी, पर इस शारीरिक चोट से ज्यादा गहरा जख्म उसके दिल पर लगा था। वह रोते हुए मन ही मन सोचने लगी:


मुनिया: "हे भगवान, ये कैसी जिंदगी है मेरी, इनका कुछ तो करो, मेरे साथ ही क्यों ऐसा बर्ताव हो रहा है। चुनिया को इन्होंने ही कुछ किया होगा, वरना ये लोग इतना ज्यादा गुस्सा नहीं करते और ना इतना फड़फड़ाते।"


यह सोचकर उसका कलेजा अंदर ही अंदर फटा जा रहा था। वह उस बंद कमरे के दर्द को अंदर ही अंदर झेलती रहती है। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने तय कर लिया था कि वह अपनी बहन को ऐसे ही इन लोगों के भरोसे नहीं छोड़ेगी। उसने खुद से कहा, "पर मुझे चुनिया को ऐसे ही नहीं छोड़ना, कुछ न कुछ करुँगी। चलो अब मैं शायद महिला हेल्पलाइन में कॉल करती हूँ।"


उसने कांपते हाथों से अपनी साड़ी के पल्लू से मोबाइल निकाला और महिला हेल्पलाइन पर कॉल किया।


          3. सिस्टम की बेरुखी और पहचान का संकट




फोन की घंटी बजी और उधर से कॉल रिसीवर की एक रूखी और पेशेवर आवाज आई:


हेल्पलाइन: "हेलो, कौन? आपका एड्रेस और आधार कार्ड नंबर बताइए और जेंडर बताइए।"


मुनिया ने कमरे के दरवाजे की तरफ डरते-डरते देखते हुए कहा:


मुनिया: "मैडम, मेरा नाम मुनिया है, मेरे पास ज्यादा समय नहीं है, प्लीज मेरी बात सुनो।"


हेल्पलाइन ऑपरेटर ने उसकी मजबूरी समझे बिना सरकारी नियमों की दुहाई देते हुए कहा:


हेल्पलाइन: "मैडम, आपका आधार कार्ड नंबर बताइए।"


मुनिया का गला रुंध गया, उसने रोते हुए कहा:


मुनिया: "मैडम, मेरे पास अभी आधार कार्ड उपलब्ध नहीं है, प्लीज मेरी मदद करो, मेरे पास समय नहीं है, कुछ लोग मुझे नुकसान पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं, मैं बहुत परेशान हूँ।"


उधर से ऑपरेटर ने बिना किसी हमदर्दी के कड़े लहजे में कहा:


हेल्पलाइन: "नहीं मैडम, आपका आधार कार्ड जरूरी है।"


मुनिया ने रोते हुए हाथ जोड़े:


मुनिया: "मैडम प्लीज।"


ऑपरेटर ने फिर से वही कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:


हेल्पलाइन: "ठीक है मैडम, प्लीज अपना जेंडर कन्फर्म कीजिए।"


मुनिया ने हिचकिचाते हुए अपनी असली पहचान बताई:


मुनिया: "मैडम मेरा नाम मुनिया है और मैं ट्रांसजेंडर हूँ।"


यह सुनते ही फोन के दूसरी तरफ कुछ सेकंड के लिए सन्नाटा छा गया। फिर सामने वाली ऑपरेटर ने बड़े ही ठंडे स्वर में कहा:


हेल्पलाइन: "हमें खेद है मैडम, यह महिला हेल्पलाइन है, कृपया आप नजदीकी पुलिस थाने जाकर शिकायत कीजिए।"


           4. बेबसी के आँसू और मानवता पर सवाल




यह सुनना मुनिया के लिए बहुत बड़ा झटका था। कानून के रक्षकों की यह बात सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। उसने रो-रोकर ऑपरेटर के सामने अपनी मदद की गुहार लगाई:


मुनिया: "मैडम प्लीज प्लीज, मैं नहीं जा सकती, मुझे मदद चाहिए, अगर आप लोग ही ऐसा करोगे तो कैसे चलेगा, प्लीज मैडम।"


मुनिया बहुत रो-रो कर गिड़गिड़ा रही थी, अपनी सुरक्षा की भीख मांग रही थी, पर महिला हेल्पलाइन से कॉल कट गया। फोन कटने की आवाज के साथ ही मुनिया का दिल पूरी तरह टूट कर बिखर  गया।


यह आज के इस सभ्य समाज और मानवाधिकारों पर एक बहुत बड़ा सवाल था। मुनिया उस कमरे के अंधेरे कोने में बैठकर रोने लगी क्योंकि उसके पास उस वक्त न तो आधार कार्ड हाथ में था और ऊपर से वह एक ट्रांसजेंडर थी। इसी वजह से सिस्टम ने एक इंसान को अकेला छोड़ दिया था।


चुनिया गायब थी, कानून ने हाथ खींच लिए थे, और मुनिया अब इस खौफनाक साम्राज्य में पूरी तरह अकेली और बेसहारा खड़ी थी।


क्या मुनिया इस प्रशासनिक बेरुखी के बाद खुद अपनी लड़ाई लड़ेगी? गायब हुई चुनिया के साथ मलिका और हारिका ने क्या किया है? जानने के लिए जुड़े रहें और पढ़ें अगला भाग— 'मुनिया (Part 3)' बहुत जल्द।


इसका भाग 1 के लिए क्लिक कीजिए यहां पे यह क्लिक करे भाग 1

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