दी स्ट्रीट लाइट part 4 ( the street light )


अस्वीकरण (Disclaimer): यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक (Fictional) है। इस कहानी के सभी पात्र, स्थान, घटनाएं और सरकारी कार्यालय लेखक की कल्पना की उपज हैं। इसका उद्देश्य किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, किसी जाति, समुदाय, सरकारी संस्थान या पद की छवि को ठेस पहुंचाना या बदनाम करना बिल्कुल नहीं है। कहानी में दिखाए गए 'मल्टी-यवर्स' और 'भक्षण छाया' जैसे तत्व केवल मनोरंजन और रचनात्मकता (Creativity) के लिए जोड़े गए हैं। यदि किसी वास्तविक घटना या व्यक्ति से इसकी कोई समानता पाई जाती है, तो इसे मात्र एक संयोग (Coincidence) माना जाएगा।



   अखण्ड और अनंत में पहुंची लेखिकाएं

अखण्ड और अनंत में पहुंची लेखाये




उस औरत की राशन कार्ड के समस्या के बाद उस ऑफिस में काम करने वाले सब लोग उस रिश्वत के पैसों बांटने के बाद उस ऑफिस में एक कोई भी आदमी चाहे खेत का पास बुक बनाना हो या किसी भी तरह का डॉक्यूमेंट , खेतों का ओरिजनल पट्टा ही क्यों ना बनाने आया हो  उस ऑफिस के कर्मचारियों का रिश्वत लेने का व्यवहार असमान छू चुका था ।

टूटे हुए मन और दुख में डूबे हुए मजबूर इंसानों का हिसाब , उस ऑफिस में राजा राम के जैसे कई लोग कितना मुश्किल से गुजर रहे है 

ये सब बाते राजा राम उस स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठे हर एक बात को बारी बारी अपने उस नोट बुक में लिख रहा था ।

एक अंजान आदमी जो बहुत ही ज्यादा गरीब था । उसे उसके दादा परदादाओ की 15 सेंट्स जमीन विरासत में मिली थी और वो उसका पास बुक और डॉक्यूमेंट्री के लिए गया तो

वहां के ऑफिस बॉय ने 15 सेंट्स जमीन के डॉक्युमेंट्स और पास बुक बनाने के लिए उसने उस आदमी से 25000 रुपयों का मांग की

दया नाम की कोई चीज ही नहीं रही वो आदमी कितना गरीब आदमी था जिसने सिर्फ 15 सेंट्स जमीन के पास बुक बनवाने के लिए  यम आर ओ के ऑफिस के चक्कर काट रहा था

ये सब बाते महीने में एक बार तगड़ा पगार लेकर भी पूरा महीना मजबूर और लाचारो को लूटने वालों को कैसे समझ में आएगा

फिर भी सरकार उन लोगों को हजारों रुपया पगार देकर ऐसी रूम में बैठाने  के बावजूद भी 

वो लोग मंजूरी में आए हुए लोगो को लूट कर राजा राम जैसे लोगों को पागल बना रहे है उनके हालातों का फायदा उठा रहे है

इन सब बातों को राजा राम स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठ कर देखता हुआ अपनी नोट बुक में लिखकर सो गया 


उस नींद में जब राजा राम मल्टी यूनिवर्स पहुंचा उसकी नोट बुक के अंदर
 ( एक भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया ) उसकिं medhass की शक्ति से  उस नोट में घुस गई

वो एक भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया छाया राजा राम ने जो लिखा नोट बुक में लिखा था उस हर बात को एक एक कार कर  बहुत बारीकी से पद लिया ।

      नोट बुक के अंदर से जेब के करेंसी नोटो तक

नोट बुक के अंदर से जेब के करेंसी नोटो तक



और वो एक भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया नोट बुक के अंदर से जेब में जो रिश्वत का हर नोट होता है उसके अंदर

और वो भक्षण चाया  फिर मल्टी यूनिवर्स से राजा राम के नोट तक 
और राजा राम के नोट बुक से निकल कर वो आदमी जो पास बुक बनाने आया था और रिश्वत का पैसा दिया था उस पैसे के अंदर तक 

 और वो महिला जो विधवा थी उसके दुख दर्द तक और वो जो बुजुर्ग आदमी मर गया था उसके दुख दर्द से लेकर सबकी समस्याओं में और सबके आंसुओं में घुस कर हर पीड़ित का दर्द को उस भक्षक छाया ने सब पद लिया 
 
समाज के लिए जो लोग धब्बा बन चुके थे जो रिश्वत खाने में मशहूर हुए है जिसके बारे में राजा राम ने अपनी नोट बुक में बड़ी बारीकी से लिखा था उस नोट बुक्स निकल कर उनकी जेब के करेंसी नोट्स में घुस गया 

वोबऑफिस बॉय जितना पैसा रिश्वत में लेकर अपने अलमारी में रखा  था वो और जो जनलोग उस ऑफिस में अन्य कराकर रिश्वत के रूप में काम अपने अपने तिजोरियों में भरे थे  उन सारे पैसों में वो भक्षण छाया फैल  गया

आगे और कौन कौन और ज्यादा रोकड़ा रिश्वत और मासूमों लूट कर चुपके बैठा है उन सारे पैसों के वो भक्षण छाया राजा राम के नोट बुक से निकल कर उन करेंसी यो घुसना स्टार्ट कर दिया

हर रोज सुबह सुबह राजा राम के नोट बुक से निकल कर थोड़ा देर राजा राम के बहुम बैठा कर 
उस ऑफिस में चल रहे नाइंसाफी को देखकर  वो लोग जो पैसा लूट पात कर रहे है उन पैसों में खुद को और फैलाता जा रहा है वो भक्षण छाया 

इतने में भी वो ना रुकी एक छोटे से सिक्के से लेकर बड़े बड़े करेंसी नोटो तक 
वो छाया   घुसते चली जा रही है 

अब धीरे धीरे एक भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया हर  वो इंसान जो दुख दर्द में रह कर भी रिश्वत दे रहा है उन सारी करेंसियों में घुसते चली जा रही है


                     भगवान का प्रतिशोध

भगवान का प्रतिशोध




वो भक्षण छाया उस ऑफिस बॉय के करेंसी से बाहर निकल कर उस ऑफिस बॉय के माँ को छू लेती है और इतने में उस ऑफिस बॉय के माँ को सेडन स्ट्रोक ऑफ पैरालाइज अटैक आ जाता है 

ऑफिस बॉय तुरंत नजदीकी बहुत बड़े कॉरपोरेट हॉस्पिटल में कॉल करता है और एम्बुलेंस आकर ऑफिस के माँ को ले जाता  है

हॉस्पिटल पहुंचते ही वहा के डॉक्टर्स और नर्सेस उसकी मां के पास आते है और ये टेस्ट वो टेस्ट बता कर सिर्फ और सिर्फ टेस्ट्स के लिए हीं3 लाख का बिल थमा देते है ये सब उस ऑफिस बॉय के मां के नजदीक वो भक्षक छाया बैठकर देखते हुए हंस रहा था


इतने में वह डॉक्टर आया और  दवाइयों का पर्ची हाथ में थमा दिया और बोला जाओ दवाइयां ले आओ ऑफिस बॉय दवाई के कोटर पे गया और देखा तो वहां सिर्फ दवाई और हॉस्पिटल बेड का बिल कुल मिला के 3 लाख हुआ है जेबोफिस बॉय ने पूछा ये क्या इतना बिल कैसे होगया

तो काउंटर वाला बोला भैया आपकी मानकों जो बीमारी है वो बीमारी ही ऐसी है इसमें है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते साफ साफ बोल दिया काउंटर वाले ने


लो ठीक हैं सोच कर ऑफिस बॉय काउंटर में बिल भरकर जाकर डॉक्टर से मिलकर डॉक्टर साहब क्या हुआ हैंमेरी मां को  है तब डॉक्टर कहता है तब डॉक्टर कहता है देखो आपकी मां के दिल में एक छेद है इसी वजह से आपकी मां थोड़ी घबराई घबराई सिंरहने लगीं जिसकी  वजह से बॉडी में थोड़ा कमजोरी होने की वजह से नसों में भी कमजोरी आ गई

इस कमजोरी के चलते उन्हें सीधा पैरालाइज अटैक हुआ है 7 महीने तक के लिए मेडिसिन लेना पड़ेगा और मेडिटेशन करना पड़ेगा 
7 महीने बाद उनके दिल का ऑपरेशन करेंगे 

जिसका खर्चा कम से कम 50 लाख तक आ सकता है ये बात सुनते ही ऑफिस बॉय वही का वही जमीन पर गिर गया जैसे ही जमीनपर गिरा वह के नर्स और डॉक्टर्स उसे उठा कर थोड़ा बहुत ट्रीटमेंट कर कर उसका ब्लाउज सैंपल्स का चेक उपनकीय थोपता चला की ऑफिस बॉय हाय शुगर और हाय वो है 

 हर रोज अगर समय समय पर मेडिसिंस और इंजेक्शंस नहीं लिए तो आपकी जिंदगी को भी खतरा है

अब ऑफिस बॉय और उसकी मां दोनों डिस्चार्ज होकर घर जा ही रहे थे उसी वक्त वो विधवा औरत इत्तेफाक से हॉस्पिटल में मिली और और उस ऑफिस बॉय से कैसे कहकर हाल पूछी    
तो ऑफिस बॉय ने हर बात बताई कि ऐसा आया हुआ है


 भैया मैने  तो पहले ही कहा था कि भगवान हर इंसान को उसका करम का फल जरूर देता है  ये सुन कर ऑफिस बॉय अपनी ही सोच में डूब गया 

और वहां से जाते जाते सोच में डूब गया कि हॉस्पिटल का 
खर्चा और मैने लोगों लोग के जितना पैसा कमाया दोनों एक मूल है

 
ऑफिस बॉय को उस स्ट्रीट लाइट से निकली हुई एक भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया ने उसके कर्मों का फल दे दिया



        ऑफिस के बाकी लोगों को भी कर्मों का फल 


से ऑफिस के बाकिनलोगो को भिनूंके कर्मों का फल



इतना कुछ होने के बावजूद भी उस ऑफिस बॉय में कोई बदलाव नहीं आया उसके बुरे कर्म और ज्यादा बाद गए  और जो भक्षण छाया मल्टीवर्स से राजा राम के जरिए आई थी वो भी नहीं बदली ।

वो क्रूर छाया रिश्ववत के उन करेंसी नोटो के जरिए बाहर आती  है

इस बार वो भक्षक छाया ने उस ऑफिस के बड़े ऑफिसर को टारगेट किया उस अधिकारी का सिर्फ पिता बस थे  वो बड़े अधिकारी और उनके पिता दोनों मिलकर कार में लांग ड्राइव करते हुए निकले 

उसी वक्त सामने से एक बड़ी लारी आ रही थी जिसकी स्पीड कंट्रोल के बाहर हो चुकी थी अगले कुछ ही पलो में पलकों को झपके से पहले ही वो लारी उस कार से जोर से टकराई और फिर कार में बैठे अधिकारी और उसके पिता दोनों बेहोश हो गए

1 2 मिनट बाद उस यम आर ओ ऑफिस के चौखट पर जो बुजुर्ग आदमी ने अपनी आखिरी सांसे छोड़ी थी उसकी छाया हवा के फ्रीक्वेंसी के सांथ आई 

और उस अधिकारी के कार के आईने में कर्मा किसीको नहीं छोड़ता कर्मा का फल सबको भुगतना होता है अभी भी वक्त है वक्त के रहते ही खुद को बदलो लिखकर एक झोंके के साथ उस अधिकारी को जगा कर गायब हो गई


अगले हैं पल वो अधिकारी जाग कर एम्बुलेंस बुला कर उसी कॉरपोरेट हॉस्पिटल में जाता ऑफिस जाता है जहां ऑफिस बॉय ने अपनी मां का इलाज करवाया था

उसी पल डॉक्टर आ कर दोनों।का ट्रीटमेंट करते है

उस अधिकारी को ज्यादा कुछ हुआ नहीं होता है बस चोट मोटे चोट बस

पर अधिकारी के पिताजी को बहुत गंभीर छोटे लगने के कारण 
बहुत सारे ऑपरेशन करते है और हॉस्पिट का खर्चा भी बहुत भारी आता है  उस अधिकारिंके पिता को बॉर्न मारो और पेट में भी ऑपरेशन करने के कारण

45 लाख का खर्चा आता है और कार के ऊपर लिखे हुए बातों के बारे सोचते हुए कार का डैमेज और हॉस्पिटल के बिल और उस अधिकारी ने आज तक जितना बेहिसाब बेइमानी।से कमाया हुआ पैसा का हिसाब लगा कर देखा तो सब एक ही हिस्सा। का आना

अधिकारी को नेत्रोदय हो गया  
पर कुछ दिनों के बाद फिर से यदा विधि पहले जैसा फिर से बदल गया 

बस इसी तरह उस ऑफिस में जितने लोग काम कर रहे है सबके साथ यही सिलसिला बार बार होने की वजह से सब अपनी अपनी सोच में डूब हुए है

इतना कुछ होने के बाद भी वो लोग कुछ दिन के लिए करप्शन छोड़ कर फिर पहले से ज्यादा लोगों को लूटने लगे 

 

       आखरी न्याय मल्टी यूनिवर्स किसीको नहीं छोड़ता 



आखरी न्याय मल्टी यूनिवर्स किसीको नहीं छोड़ता


 
वो लोग जब जब कोरेप्शन फिर से शुरू करते है तब तब स्ट्रीट लाइट एक झटके में जल कर बुझ जाता है और राजा राम अपने नोट बुक में सब बारीकी से लिखना शुरू करता है

 उसके बाद राजा राम के नोट बुक से वो भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया बाहर निकलकर फिर उनको नए सिरे से दंड देता है

 मगर किसींकी जान नहीं लेता

राजा राम के मामा मामी जिन्होंने राजा राम से उसका घर जमीन सब चीन लिया था ये सब देखकर उनको अंदर ही अंदर एक डर पैदा हों जाता है और उसी दर के चलते उनके अंदर एक बदलाव शुरूहो जाता है इस बदलाव के चलते वो लोग सोचते है कि राजा राम से जो जो लिया है वो सब उसे वापस कर कर उसे सुधार कर अपने पापों का प्रायश्चित करेंगे ऐसा सोचकर वो लोग 

राजा राम के पास जाते है और राजा राम को वापस घर बुलाने की कोशिश करते है मगर राजा राम उनके लाख कहने पर भी उनकी एक ना सोना 

उसकी माफी बहुत माफी मांगी फिर भी राजा राम को कुछ समझ में नहीं आया और वो जोर से चिल्लाया कौन सा घर कहा का घर जाओ यह से मेरा घर ऊपर है 

इतनी कोशिश के बाद वो लोग वापस चले गए



                                आखरी न्याय 

आखरी न्याय

उस ऑफिस में वो सब काम करने वाले न उन्होंने गलतियां करना छोड़ 
और ना राजा राम ने लिखना छोड़ा
और
भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया ने दंड देना छोड़ा

पर इस बार कहानी कुछ अलग थी इस बार सीधा मल्टी यूनिवर्स को बहुत गुस्सा आया और यूनिवर्स ने सबको एक ही सांथ सबको बारी बारी अपाहिज बना दिया


ये किस्सा धीरे धीरे पूरे जिला में फैल गया और राजा राम के  साथ क्या हुआ ये बात जैसे के तैसे 

जिला कलेक्टर के चैंबर तक जा पहुंची
कलेक्टर आदमी बहुत अच्छा था इसीलिए कलेक्टर से रहा नहीं गया और तुरंत एक्शन लेने का फैसला किया 

पूरे अधिकार से कलेक्टर उस यम आर ओ ऑफिस पहुंचे और वहां जितने कर्मचारी थे सबको एक ही झटके में परमानेंट दिसमिस करते हुए 

उस ऑफिस में अच्छे और सच्चे किरदार वाले लोगों को अप्वाइंट किया  

फिर राजा राम के पास जाने लगा जब तक कलेक्टर राजा राम के पास पहुंचा तब अटक उस ऑफिस में जो बदलाव आया उस बदलाव को देखकर 

राजा राम की सांसे उस अनंत यूनिवर्स में मिल गई

और जब कलेक्टर ने उसे बेजान देखा और उसके हाथों में जो नोट बुक है उसे पड़ा तो उस कलेक्टर के आंखों में आंसू बहने लगे  उसी पल उस कलेक्टर ने एक बात को तय किया 

की उस नोट बुक को ऑफिस के बीचों बीच रखा और उस ऑफिस के लिए एक नियम बनाया की 

आज के बाद जो भी यह नया आयेगा वो 
सबसे पहले इस नोट बुक को पड़ेगा और शपथ लेगा कि जिंदगी में कभी भी रिश्वत नहीं लेगा उस शपथ के बाद ही वो अपना काम में ज्वाइन होगा 

फिर राजा राम के मामा मामी रोते हुए राजा राम के पास आकर फूट फूट के अपना सीना को ठोकते हुए हम लोगों कितना पाप हो गया राजा राम हमें माफ करदो एसे रोते हुए 

उस स्ट्रीट लाइट के जमीन को राजा राम का घर कितना मूल करता है उतना देकर उस जमीनको खरीदकर 
उसी जमीन पर दफाया गया 



मगर वो  भयंकर क्रूर दरिद्र भक्षण छाया आज भी उस नोट बुक में और उस गांव में है आज के बाद और कोई भी राजा राम की तरह न बदले और किसी को भी अन्याय न होता है तो वो भयंकर छाया 
उस करप्शन के बदले में कर्म का फल आज भी दे रहा है 

और आज भी हमारे देश में कही न कही किसी न किसी कोने में कोई न कोई नव जवान राजा राम की तरह सिर्फ और सिर्फ इस कारेप्शन के चलते या तो दम तोड़ रहा है या कुछ ना कर सकी सोच कर एक लेबर बन कर जिंदगी गुजार रहा है

ये कहानी मेरे मन में पैदा हुए रघु पति राजा राम के लिए अपने हृदय से अंकित कर रहा हु 

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