दी स्ट्रीट लाइट part 3 (the street light)

Disclaimer: यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के लिए लिखी गई है। इसका उद्देश्य किसी की भावनाओं या मान्यताओं को ठेस पहुंचाना बिल्कुल नहीं है।


      स्ट्रीट लाइट के साथ जिंदगी


स्ट्रीट लाइट के साथ जिंदगी



मल्टी यूनिवर्स में घूम रहे राजा राम को अब इंसानी दुनिया से या इंसानों स3 अब कोई मतलब नहीं रहा वो अपनी खुद ही दुनिया में मगन है उस स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठ कर सामने वाली बोरिंग का

 पानी पीकर अगर कोई तरस खाकर कुछ खाने के लिए दे दे तो उसे खाकर उसी स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर दिन रात उसी जगह पे

 अपना बसेरा करते हुए और रथ की नींद में एक्बतेलिपथिंके जरिए मल्टी यूनिवर्स में खो जाना और सुबह जैसे के तैसे फिर से उठ जाना

 और फिर अपनी जिंदगी यदा विधि चलाना उसे अब इस दुनिया से किसी भी तरह का कोई भी ताल्लुक अब नहीं रहा ऐसा मानो की उसने इस दुनिया अपना संबंध ही तोड़ दिया हो उसके अंदर जो अच्छा, बुरा , मीठा , कड़वा , मोह, व्यामोह , आशा , निराशा हर

 चीज भूल गया अगर उसे कुछ पता हैंठो सिर्फ और सिर्फ उस स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठना एक पेन और एक नोट बुक पकड़ना उस बुक के ऊपर पेन रखकर रात को सो जाना फिर सुबह उठना जैसे उसे इस

 दुनिया से किसी भी तरह का कोई भी संबंध ही ना रहा हो उसी लाइट के नीचे जीना मारना जैसे उधर ही रह गया 
अपने दोस्त ,परिवार, घर , प्यार वो हर चीज को भूल गया  उसे सिर्फ वो नोट बुक और अन्नत विश्व , और वो स्ट्रीट लाइट के सिवा कुछ नहीं पता 

                   वृद्धप्य निराशी (पेंशन)


वृद्धप्य निराशी (पेंशन)



ये सब ऐसे था तो अगले दिन एक बुजुर्ग आदमी जिसकी उम्र 68 इयर्स की वो तहसील ( mro ) ऑफिस आया और वहां के ऑफिस बॉय से बोला
बुजुर्ग आदमी : साहेब पिछले 6 महीनों से मेरा वृद्धप्य निराशी नहीं आ रही है पता नहीं क्या हुआ है और रुका क्यों है आप एक बार देख कर बता सकते है कि हुआ क्या है


ऑफिस बॉय : जी आपका पेंशन रुकने की वजह सिर्फ इतनी है कि आपके नाम का डेथ सर्टिफिकेट यह लागू हुआ है  पर आप अभी आकर अपना निराशी की बात कर रहे है हमारे सिस्टम के अपडेट के मुताबिक आप मर चुके है और एक बार मर चुके इंसान को हम पेंशन कैसे दे सकते है देखिए आप घर जाईए आपको पेंशन नहीं मिलेगा 


बुजुर्ग आदमी: ऐसा मत बोलिए साहेब मै तो जीता जगता आपके सामने खड़ा हु और जिंदा भी हु आप कैसे मुझे मारा हुआ करार कर सकते हो जबकि मैं जीता जगता आपके सामने खड़ा हु मेरी उम्र पर दया कर के एक बार फिर से चेक करिए साहेब


ऑफिस बॉय : एक बार देखूं तो भी वही और 100 बार देखूं तो भी वही रहेगा इसमें कुछ भी बदलने वाला नहीं है आप जाइए जनाब यह से 

बुजुर्ग आदमी : साहेब न मेरे आगे कुछ है और न पीछे कुछ है अगर मेरे पास जीवन शैली नाम की चीज है तो सिर्फ ये बुढ़ापे का भरता जो सरकार देती है मेरा गुजारा सिर्फ इसी पैसे से चलता है  ये पेंशन ही मेरी जीवन का आधार है बोलता हुआ पैर चुने लगा और कहने लगा आया मत बोलिए साहेब एक बार अच्छे से देखिए


ऑफिस बॉय : ठीक है जनाब आप एक काम कीजिए  10000 रुपया पैसा दीजिए मैं आपके डेथ सर्टिफिकेट को ऑफलाइन कैंसिल करवा दूंगा कैसे भी कुछ न कुछ जुगाड कर दूंगा


बुजुर्ग आदमी : साहेब अगर मेरे पास उठना पैसा होता तो मैं यह आकर आपके पास क्यों गिड़गिड़ाता 
ऐसा कह कर वो बुजुर्ग आदमी बाहर की तरफ जा ही रहा था दरवाजे के चौखट तक पहुंचते ही उस बुजुर्ग आदमी की धड़कन रुक गई और वहीं उसी जगह उसकी मौत हो गई


वो देख कर वहां के ऑफिस बॉय ने म्युनिसिपालिटी वाले को बुलाया और कहा अरे इसे यह से लेकर जाओ और अनाथ शव है कही जल देना  वो सुनकर म्युनिसिपल वाले उस बुजुर्ग आदमी को उठा कर ले जाते रहते है और इतने में उस बुजुर्ग आदमी के पॉकेट में हाथ डाल कर कुछ पैसे है क्या देखते है पर एक फूटी कोड़ी भी न मिलने की वजह से उस बुजुर्ग आदमी के शव को बड़ी बेरहमी से किसी नाले में फेंक देते है ।

             एक विधवा औरत के राशन कार्ड में करेक्शन 

एक विधवा औरत के राशन कार्ड में करेक्शन



अगले दिन एक 30 साल की विधवा औरत अपने 6 साल के बच्चे को संत लेकर तहसील ऑफिस अति है और वहां बैठे ऑफिस बॉय से कहती है 
औरत : भैया मेरे पति को गुजरे एक साल हो गया है पर मेरे राशन कार्ड से उनके नाम के साथ मेरे 6 साल के बच्चे का नाम भी निकाल दिए है और इस वजह से मेरे बचे को सरकारी स्कूल में भर्ती करने में

 दिक्कत आ रही है कृपया आप मेरी मदद कीजिए और राशन कार्ड में मेरे बच्चे का नाम जोड़ दीजिए

ऑफिस बॉय : मैडम आपकी दिक्कत मुझे समझ में आ रही है मगर अभी फिलहाल के लिए राशन कार्ड का जो  एडिंग वाला साइट है वो अभी खुल नहीं रहा है जब साइट खुलेगा तब हम बताएंगे तब आना
शायद साइट अगले साल खुलेगा तब आना

औरत : सिर एक साल का समय बहुत ज्यादा है इतने दिनों में मेरे बेटे का एक साल बिना पढ़ाई के एक साल खराब हो जाएगा

बच्चे के लिए 1 साल का पढ़ाई छूटना बहुत बड़ी बात है भैया एक बार चेक कर कर ट्राई तो कर के देखिए भैया

ऑफिस बॉय : मैडम हम इस विषय में कुछ नहीं कर सकते क्योंकि 
सरकार राशन कार्ड का एडिंग वाला साइट सिर्फ साल में एक ही बार ओपन होता है इस विषय में हम कुछ नहीं कर सकते 

औरत : ट्राई करिए भैया मै 4 किलोमीटर से पैदल चलकर आई हु कोई गाड़ी भी नहीं मिलती मै इतना दूर बार बार चल कर बचे संत नहीं आ सकूंगी देखिए भैया एक बार

ऑफिस बॉय : ठीक है मैडम आप शांत रहिए और 1000 रुपया लगेगा पैसा दीजिए हम कुछ करेंगे



औरत : ठीक है भैया बार बार इतना दूर से आने से बेहतर है कि मै आपको 1000 दे दु पर मेरा काम कर दीजिए भैया बोलकर 
वो औरत पैसा देकर वापस पैदल अपने घर चले गई


                     पैसा देकर भी कोई काम नहीं बना

पैसा देकर भी कोई काम नहीं बना



ऑफिस बॉय वो 1000 रुपया लेने के बाद उस दिन शाम को ड्यूटी खत्म होने से पहले सुबह से शाम तक जितना रिश्वत का पैसा कलेक्ट हुआ था उन सारे पैसों को छोटे पद से लेकर बड़े पद तक

जितना वसूल हुआ था सारा पैसा पदों के हिसाब से सबको हिस्सा सबको बांट दिया और आराम से सब घर चले गए 

और ये हर रोज होने वाली रोज की बात है हर रोज कलेक्शन करना और बांटना उस सरकारी दफ्तर में ये एक आम बात थी

ये सब के चलते उसके अगले हफ्ते 
वो विधवा औरत फिर आकर ऑफिस बॉय के पास जाकर भैया मैने जो राशन कार्ड में अपने बच्चे का नाम जोड़ने का एप्लिकेशन दिया था उसका क्या हुआ

ऑफिस बॉय : मैडम मैने थी आपको पहले ही सब साफ साफ बताया ही था कि नाम एडिंग और नेम करेक्शन का साइट अगले साल ही खुलेगा जाइए मैडम आप अपना एप्लिकेशन अगले साल फिर से देना फिलहाल के लिए आप अपने घर जाईए

औरत : ये कैसी बात हुए भैया मैने तो आपको पैसा भी देकर घर है थी अब ये कैसे बोल रहे हो भैया

ऑफिस बॉय : क्या मैडम कौन सा पैसा अपने जो 1000 रूपये दिए है वो पैसे जो मैने आपको समाधान बताया और जो आपका एप्लिकेशन है उसको प्रोसेस किया है न कि मैने उस खाया है जाइए मैडम घर जाईए और अगले साल आना

औरत : अब ये कैसे बोल रहे हो भैया अपने कहा तभी मैने आपको 1000 रुपया दिया था उन एक हजार पैसे मै और मेरा बेटा 

एक महीने राशन पानी का गुजारा था भैया पर आप एसा करेंगे कर के ये उम्मीद नहीं थी आपसे

ऑफिस बॉय : जाइए मैडम जाइए तुम लोग खाओ या न खोया इस बात से हम लोगों को क्या ही मतलब है मैडम और रही बात पैसों की वो जो पैसा अपने दिया था वो पैसा आपके एप्लिकेशन प्रोसेस में चल गया है 


वो बेचारी अब उसके हाथ में कुछ नहीं तो एक बेसहारा औरत कढ़ी भी तो क्या वो वापस जाते जाते बद्दुआ 
 
देते हुए मेरे पैसा लेकर मेरे पेट में लात मारने वालो तुम लोगों की जिंदगी में कीड़े पड़े


ऊपर भगवान देख रहा है उसके पास हर चीज का हिसाब है बोलकर 
वो औरत अपने घर 4 किलोमिटर पैदहल जाने लगी


वो औरत जो एक मां भी थी वो पीछे मूड कर देखी , पर उस ऑफिस बॉय को ये नहीं पता था कि , उस औरत की बद्दुआ असर करने वाली है 

और उनका हिसाब अब भगवान करने वाला है इस बात से सारे दफ्तर के लोग अंजान थे

और ये सब को उस स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठा राजा राम सब देखकर अपने उस नोट बुक में उस ऑफिस बॉय के साथ और उन लोगों का नाम लिख कर एक लकीर मार दिया 


और उसी पल उस स्ट्रीट लाइट की लाइट भयानक तरीके से चालू होकर बंद हो गई और मल्टी यूनिवर्स के टेलीपैथी सिग्नल्स एक्टिवेट हो गए

राजा राम जो उन सब के पापों का कच्चा छठा जो लिख रहा था उसके आगे क्या होने वाला है 

अब अगले भाग में पढ़ेंगे 

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