जेन्युइन बैंक ऑफ ट्रुथ: 1932 में 1 पैसे ब्याज वाली बैंक की कहानी / Hindi Moral Story
डिस्क्लेमर: ये कहानी सिर्फ काल्पनिक है इस कहानी के सभी पात्र एवं नाम सिर्फ कल्पना से लिखी गई है इस कहानी का किसी के निजी जिंदगी से या किसी भी बैंक एवं किसी सिस्टम से या किसी के निजी जिंदगी से कोई मतलब नहीं है ये सिर्फ रचयिता की कल्पना से सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखी गई है
पुरानी बात और व्यवस्था एवं अच्छे दिन
सन 1932 ये बात बहुत पुरानी है जब मधुमिता नाम की एक स्त्री एक मिडल क्लास से होने के बावजूद भी उसने एक अच्छी बात सोची उसकी सोच में 1932 का नहीं वो 2028 का सोचती थी उसके मन में एक ही बात पनपती थी कि हा किसी भी तरह एक ऐसा बैंक खोलना है जिसमें सिर्फ 1 पैसा का ब्याज हो उन दिनों में 1 पैसा 75 पैसों के बराबर हुआ करता था
उसके सपनो में बैंक का नाम genuene bank of truth हुआ करता था इस बैंक का मूल उद्देश्य गरीब किसानों को 1 पैसा ब्याज में लोन देना था और अगर वो पैसा भर ना पाए तो ब्याज की माफी
मिडल क्लास और हाइट एजुकेटेड होने के नाते ये अपना ये सपना पूरा करना चाहती थी उसके मन में ये खयाल था कि पूरी दुनिया में ना सही पर अपने गांव के लिए तहसील के लिए कुछ कर सकी किसानों को थोड़ा बहुत खुदकुशी करने से रोक सकू
मधुमिता हाय एजुकेटेड होने के कारण वो जानती थी कि 2026 में देश की इकॉनमी का हाल बहुत बुरा होने वाला है
उसने अपनी कोशिश जारी रखी और उस जमाने में ताज्जुब की बात देखो ncs नाम का एक बैंक था उस बैंक से मधुमिता एक होकर 11 लाख का डिपॉजिट भरकर अपना सपना साकार कर रही है अब बात आई 11 लाख के हिसाब की उस जमाने का हिसाब से 2026 का 500 करोड़ और 1932 का 11 लाख देख के इकॉनमी के हिसाब से बराबर हुआ करता था जब nsc बैंक ने हिसाब पूछा तो इस बैंक में इन्वेस्टर्स थे वो आधे उस गाओ वाले किसान और उसके कॉलेज के दोस्त और मधुमिता के मां के गहने और मधुमिता के चाचा के जमीन के कागज उसने हिसाब सही से दिखाया और अपना प्रपोजल रखा
मूल उद्देश्य no cibil score the rule
Nsc बैंक ने मधुमिता से परपस पूछा कि क्या वजह है कि आप ये बैंक खोलना क्यों चाहते हो
मधुमिता ने बेझिझक जवाब दिया आज दौर भले ही कमजोर है पर genuine bank of truth एक महत्व पूर्ण उद्देश्य से काम करेगा ये बैंक किसानों के जमीन को नहीं हड़पेगा और न अधिक ब्याज वसूलेगा कागजों से ज्यादा हम इंसानों को किसानों को उनके घर जाकर खुद वेरिफाई करेंगे ब्याज 1 पैसा में से भी आधा होगा ये जो ब्याज का दाम कम है ये हमारे लिए बहुत ज्यादा मुनाफा देगा जिसमें से हम ncs bank को मतलब आपको 25% का हिस्सा देंगे
आगे चलकर हर चीज डिजिटल होने की संभावना है यह तक की
हमारा 1 रुपया जो आज 100 के बराबर है वो आगे चलकर 1 पैसा के बराबर होने की संभावना है और ये जो बैंक की आज हम स्थापना करने जा रहे है ये बैंक और इसका नियम।ही आने वाले दिनों में 1 रुपया को गिरने से बचाएगा क्योंकि हम।ब्याज रुपयों से नहीं पैसों।के माध्यम से लेंगे इस हिसाब से देश की करेंसी को कभी भी आंच नहीं आएगी भले ही कल को चल कर महंगाई बहुत ज्यादा ही क्यों न हो जाए आज 1 पैसा को संभालेंगे तो कल को 1 रुपया बचा रहेगा
बहले ही सरकार 5000 के नोट ही क्यों न बना दे ये पैसा जो हम आज रख रहे है वो आने वाली पीढ़ी में हमेशा के लिए 1 रुपया को जिंदा रखेगा
और आगे चल कर बिना वायर के हर चीज जब चलने लगेगी तब युवाओं को बहकाया जाएगा उन दिनों ये बैंक चाहे ही बंद हो जाए पर देश का किसान खुश रहेगा
No cibil score rule at 1932
तो इसी तरह एक नया रूल बनाया गया कि किसी की डॉक्यूमेंट दूसरों को नहीं दी जाएगी उनकी प्राइवेसी का ख्याल रखा जाएगा
क्योंकि जब बात 2030 तक पहुंचेगी उस दौर पे कोई भी किसी का भी डेटा चुरा सकेगा बहुत सारे एप्स बनेंगे और वो एप्स सिबिल स्कोर के नाम पे दुनिया को लूटने चलेंगे हम।इस दौर पे ऐसा बिल्कुल नहीं होने देंगे देश की व्यवस्था को बचाना है तो आज के युवा को सही एजुकेशन देना जरूरी है चाहे वो कम ही क्यों न पड़े उन्हें रोजगार देना जरूरी है आने वाली पीढ़ी में हर एक आदमी बिना सोचे समझे अंधे ऐप्स को प्रमोट करेगा और खुद पैसा कमाने के लिए डेटा लाइकिंग इन इंटरनेट theaory के बारे में नहीं सोचेगा
चाहे लोन लेने वाले का किरदार बहुत साफ ही क्यों ना हो उसका डेटा से कोई और लोन लेकर उसका सिबिल स्कोर खराब होने के नाते अच्छे इंसान को लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा
देखो कोई कहेगा हमारा ऐप डाउनलोड करो हम आपके बैंक को ईमेल करेंगे की आपका लोन की कष्ट कम।करे ये तो सारा सर पूरा डेटा चोरी और टर्म्स एंड कंडीशंस के नाम पर ना इच्छा के अच्छा करने का नाटक हो जाएगा
और इस नाटक को चलाएगी कल की चालक युवा वो युवा पड़ी लिखी तो होगी पर आंखों सिर्फ हीरो बनने का सपना होगा उसे ये पता नहीं होगा कि डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर
देश को बेचा जा रहा है एक 2 नंबर्स लेकर अगर सब एप्स में ही सब हो जाएगा तो आगे चलकर पैसों का कोई।मान्य नहीं रहेगा
इंडोनेशिया को ही देख लो वहां आगे दौर हमारा एक लाख रुपया वहां कम से कम 1 करोड़ के बराबर होगा मगर वह सैलरी और महंगाई भी उसी हिसाब से होगी
देश के लिए 1 रुपया आगे चल कर भी बचेगा चाहे कितना भी डिजिटल हो जाए
जेन्युइन बैंक ऑफ ट्रुथ
मधुमिता ने जो बताया इस बात से येन बि सी बैंक सहमत होते जेन्युइन बैंक ऑफ ट्रुथ को ग्रीन झड़ दे दिया और मधुमिता जब तक जिंदा रही तब तक
उसने किसानों को बहुत सारे लोन बहुत कम ब्याज में दिए बहुत सारे एजुकेशन लोन
दिया उस बैंक।का वेरिफिकेशन टीम ही इतना तगड़ा था कि वो लोग खुद कस्टमर के गॉन जाकर सब वेरिफाई कर लेते थे
रही बात कमाई की 1 पैसा ब्याज बहुत होता है आज के जमने में तो सीधा 30% लूटा जा रहा है
काश वो ज़माना फिर से आता और मधुमिता जैसे लोग आज के दौर पे भी होते भले ही genuene bank of truth
सिर्फ एक कहानी का हिस्सा है पर सच में आज के दौर में ऐसे बैंक की और मधुमिता जैसे औरतों की ही जरूरत है
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FAQ
Q: Genuine Bank of Truth kya real bank hai?
A: Nahi, ye ek kalpanik kahani hai.
Q: Is kahani ka sandesh kya hai?
A: Kam byaaj, kisano ki madad aur data privacy ka mahatva.
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