दी स्ट्रीट लाइट भाग 2 ( THE STREET LIGHT ) part 2
डिस्क्लेमर: इस कहानी के सभी पत्र एवं सभी नाम व सभी घटनाएं सब काल्पनिक और मनगढ़ंत है।इस कहानी से किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति के नाम से या जिंदगी से कोई मतलब नहीं।है यह सिर्फ और सिर्फ रचयिता के कलम से लिखी हुए मनघड़ंत कहानी बस यह सिर्फ मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया गया है
ना दिखने वाले ज़ख्म
राजा राम वहां का हर हाल देखने के बाद अपने पिता को मट्टी देकर उनका पिंड दान और कार्यक्रम सब खत्म होने के बाद वो एक दम से गुम। सूम रहने लगा न आग न पानी जैसा होने लगा उसने खाना पानी सब त्याग दिया सब भूल गया अपने घर में हर रोज रोते हुए एक कोने में बैठकर दिन रात सिर्फ रो रोकर गुजारने लगा यह सब उसकी पड़ोसी लड़की रम्या हर रोज देख रही थी।वो उसे रोकने का सोच जरूर रही थी पर रोक नहीं पा रही।थी पता नहीं राजा राम उसे कैसे रिसीव करेगा ये उसे समझ नहीं आ रहा था अब रम्या की शादी भी तय हो चुकी थी तो। कैसे बताया जाए ये समय भी सही नहीं है।ये सब बताने का बस इस सोच में राम्या खुद को रोक रही थी
एक दिन रम्या धैर्य कर कर राजा राम के पास जाकर कहती है
रम्या: राजा राम और कितने दिन इस तरह अपनी जिंदगी गुजरोगे मै जानती हु अभी तुम किस हाल से गुजर रहे हो।मै समझ सकती हु पर जिंदगी मे कभी कभी आगे बढ़ने के लिए कुछ बातों को भूलना भी पड़ता है पिताजी के गुजर जाने का दुख मुझे भी है पर राजा राम खुद को सम्हालना भी जरूरी होता है तुम्हारी जिंदगी अभी आगे और है उसे आगे बढ़ाओ और खुद को संभाल कर आगे बढ़ो
राजा राम : इतना घुमा फिरा के बताने की कोई जरूरत नहीं है रम्या मुझे इतना थी समझ में आ रहा है कि तुम कुछ और भी भी कहना चाहती हो इतना सोचो मत जो भी तुम कहना चाह रही हो कह दो इतना दर्द सह चुका हु एक और तुम्हारा भी सही सीधा मुद्दे पे आओ
रम्या :राजा राम मै जब भी तुमसे शादी की बात करती थी तुम टाल देते थे मगर अब बात अलग है।मेरे पिताजी मेरी शादी तय कर चुके है मै कुछ नहीं कर सकती उनकी बात सुननी ही पड़ेगी
राजा राम : मै जिस हाल में हु इस हाल में भी तुम ऐसा कुछ कह सकती हो।मै सपने भी नहीं सोच सकता था रम्या सब तुम्हारी मर्जी है तुम जो चाहे करो तुम आजाद हो तुम्हारी मर्जी है
रम्या: नहीं राजा राम मेरा कहने का वो मतलब नहीं था तुम जैसा बोलोगे मै वैसा करूंगी मुझे कही दूर भगा कर लेजाओ मै तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी कही भी किसी भी हाल में बिताने के लिए तैयार हु मै तुम्हारी थी तुम्हारी हु और तुम्हारी रहूंगी पर पिताजी के जिद्द के सामने मै मजबूर हु तुम चाहो तो मैं सब कुछ छोड़ कर तुम्हारे साथ आ जाऊंगी
राजा राम : नहीं रम्या तुम ऐसा नहीं करोगी जो तुम्हारे पिताजी।कह रहे है उनकी बात मान लो कोई पिता अपनी बेटी के लिए मेरे जैसे अनाथ को अपना दामाद बनाना नहीं चाहेगा न मेरे पास कोई परिवार है ना नौकरी है मेरे साथ तुम अपनी जिंदगी भी नरक। मत बनाओ अपने पिता का सुनो तुम आजाद हो जाओ अपना घर बसाओ
रम्या ये सुनते ही वह से ऐसे चले गई जैसे वो यही सुनना चाहती हो राजा राम प्यार में भी जख्मी हो गया
रिश्वत और रिश्वतखोरी दुनिया
अब रम्या की शादी हुए 30 दिन बीत गए और राजा राम जब पूरे घर की तरफ बहुत ध्यान से देखा तो उसमें उसने अपने पिता की लिखी हुए एक डायरी देखी जिसमें लिखा था राजा राम के साथ बिताया हुआ वो प्यार भरे लम्हे जिन्हें उनके पिता ने अपने सीने से निकाल कर उस डायरी में लिखा था और आखिरी लाइंस में लिखा था राजा राम ने कहा कि वो आर्मी ज्वाइन करना चाहता है उस पल मैने उसे मना कर दिया तो था पर राजा राम मिलिट्री के यूनिफॉर्म में बहुत अच्छा लगेगा भेज देता तो अच्छा होता चलो ठीक है कम से कम महीने में एक न एक बार तो आ जा सकता है ना
इसको पड़ कर राजा राम को लगा कि उसके पिता उसे आखरी पलो में आर्मी भेजना चाह रहे थे
उसके बाद राजा राम पंचायत के यम आर ओ MRO ऑफिस गया और वहां पर राजा राम वहां के ऑफिस बॉय से मिला और जब उस ऑफिस बॉय ने पूछा तो राजा राम ने कहा सर मुझे आर्मी में जाने के लिए कास्ट इनकाम नेटविटी सर्टिफिकेट चाहिए
वहां के ऑफिस बॉय ने राजा राम से कहा देखो राजा राम यह हर चीज का एक दाम है कास्ट सर्टिफिकेट का 2000 रुपया इनकम सर्टिफिकेट का 5000 रुपया और नेटविटी का 7000 रुपया कुल।14000 रुपया लगेंगे सारे सर्टिफिकेट बनाने के लिए और 30 दिन का समय लगेगा
राजा राम : सिर आप इतना पैसा क्यों मांग रहे हो मैने अपनी सर्टिफिकेट्स मांगी है न कि किसी और की जायदाद गैर कानूनी तरीके से मेरा नाम करने को नहीं कहा है आपसे और न मै किसी और देश से घुसपैठ से आके यह आपसे झूठा सर्टिफिकेट बनाने को नहीं कह रहा हु मैं यहां पैदा हुआ हु और पला बड़ा हु ये मेरा हक़्क़ है जो मै मांग रहा हु मेरा ध्रुवीकरण पत्र ही तो मैं।मांग रहा हु मेरे डॉक्युमेंट्स बना कर मुझे देने में आप पैसा क्यों मांग रहे हो
यह सुनकर ऑफिस बॉय : सुनो राजा राम बनवाना है तो बनवाओ वरना चुप चाप यहां से निकल जाओ तुम्हे क्या पता है यहां MRO को अलग देना पड़ता है vro अलग देना पड़ता है और कार्य दर्शी को अलग देना पड़ता है भाई यहां चपरासी से लेकर ऊपर तक सबको अपना अपना हिस्सा देना पड़ता है बिना रोकड़ा के यहां कोई काम नहीं चलता यह कोई गरीबी का कोई नाटक नहीं देखा जाता टेबल के नीचे से पैसा दो और अपना काम करवा लो सब काम होने के बाद ऑफलाइन सर्टिफिकेट्स आते है
यह सुनकर राजा राम जिसके पास चाय पीने तक के 2 रुपया भी नहीं था वो वही बाजू में जहां स्ट्रीट लाइट था वह जा कर बोरिंग का पानी थोड़ा सा पी कर स्ट्रीट लाइट के नीचे थोड़े देर बैठ कर सांस लेता है और वापस घर लौट जाता है
अपने का धोखा और व्यवस्था की कठोरता
राजा राम : आप ऐसे क्यों बात कर रही हो मामी ये घर मेरा है और आप मेरे ही घर से मुझे हो निकाल रहे हो ये गलत है
Comments
Post a Comment