पैरानॉर्मल एक्टिविटी पार्ट 2 | पीठ पर भूत की सच्ची कहानी | Hindi Horror Story
पैरानॉर्मल एक्टिविटी पार्ट 2
गुमशुदा दास का दर्द और वो वो सहारे का हाथ
दशहरा के मेले में दास उस कार के बारे में सोचते सोचते कब मेले से बाहर निकला और कब खो गया उसे खुद पता नहीं चला थोड़े समय के बाद उसने खुद को अकेला पाया और देखा तो वो किसी अंजान और सुनसान जगह पर अकेला खड़ा था जहां कोई भी इंसान नजर नहीं आ रहा था
वो दोनों घुटनों पर अपना हाथ रखकर अपने चेहरे को डर से दबाए हुए खुद ही खुद में अकेले अकेले चिल्ला चिल्ला कर रोने लगा नानी नाना कहा हो आप लोग मुझे यहां बहुत डर लग रहा है
मै अब किसी भी चीज के लिए जिद्द नहीं करुंगा , मुझे अब कोई कार या खिलौना नहीं चाहिए बस मुझे आप दोनों ही चाहिए कहा हो आप लोग मुझे यहाँ से घर लेकर जाओ बहुत डर लग रहा है
नाना नानी बहुत डर लग रहा है आप लोग कहा हो अब मुझे कुछ नहीं चाहिए प्लीज मुझे यहाँ से वापस घर लेकर चलो
कई बार ऐसे बोलने के बावजूद भी उसे कोई जवाब नहीं मिला अब और अकेला पड़ गया और अंदर ही अंदर रोने लगा
- उसी पल में अचानक से एक हाथ उसके आगे बढ़ा और आवाज आई यहां क्या कर रहे हो बेटा दास अकेले यह क्यों बैठे हो चलो घर ये बात सुनकर बेचारे दास के चेहरे पर एक मुस्कुराहट आ गई
उसने देखा कि वो हाथ किसी और का नहीं बल्कि उसके सेक्टर 6 में रहने वाली एक नेक दिल महिला थी जो बहुत अच्छी थी और वो दास को रोज स्ट्रीट में खेलते हुए देखती थी तो उसको पहचान कर
दास से पूछी की बेटा क्या हुआ और तुम यह क्या कर रहे हो तो दास ने बताया कि नाना नानी मेला में है और मैं यहां कैसे आया मुझे नहीं पता मै यह खो गया मुझे नाना नानिनके पास जाना है
एक हादसा बच्चा हो कर भी उसे दर्द का पता नहीं सब सह गया
फिर वो औरत दास को उसके नाना नानी को ढूंढते हुए मेला में दास को लेकर पहुंची थी वहां माइक में अनाउंस हो रहा था कि एक 10 साल का बच्चा थोड़ा साँवला रंग और 10 साल के उम्र का है काला कलर का पैंट और वाइट कलर का शर्ट है किसीको दिखे तो बता सकते है
ये बात सुनकर वो औरत दास को उसके नाना-नानी के पास छोड़कर अति है
दास के मन को थोड़ा शांति मिली उसकी जान अब तसल्ली से जान में जान आ गई और दास थोड़ा खुश होकर अपने नाना से चिपक गया
उसके नाना नानी को जितना दुख हो रहा था दास को देखते ही वो दुःख कब खुशी में बदल गई पता ही नहीं चला उनके आंखों में आंसू आ गए
और वहां से एक टेंपो भाड़ा में लेकर वापस घर जाने के लिए निकल गए
अब टेंपो में बैठा दास थोड़े देर तक ठीक रहा पर अभी तक जो हुआ वो सब भूलकर फिर से दास मुझे वो मेला में जो कार मैने देखा था मुझे वो कार चाहिए तो चाहिए बोलकर फिर से जिद्द करने लगा
- नाना-ननी के लाख मना करने के बावजूद भी दास अपनी ही ज़िद्द में अड़ा रहा
- दास 2 तीन बार जिद्द किया और बोला मुझे वो कार दिलाओ नहीं तो मै इस टेंपो से खुद जाऊंगा
- फिर से दास गुर्राते हुए मुझे वो कार दिलाओ नहीं थी मै खुद जाऊंगा बोला
- बोलते बोलते दास अचानक खुद गया 35 की स्पीड में टेंपो था दास कूद कर पीछे के टायर के नीचे उसका पेट आ गया और टेंपो अचानक अचानक ब्रेक मारने की वजह से टेंपो रुक गई
अजीब तरीके से जैसे कोई स्पीड ब्रेकर लगाकर गाड़ी रुक गई हो
घबराते हुए दास के नाना-नानी उतरे और कांपते हुए दास को उठाए वहाँ सिर्फ छोटी मोटी खरोंचों के सिवा दास को कुछ नहींहुआ था
बहुत अजीब था जिस तरह दास का नीचे कूदना और टेंपो के टायर के नीचे गिरना और कुछ ना होना
जो भी भगवान शुक्रिया कर कर सब थोड़े दुख के साथ घर लौट गए
और सुकून से खाना खाकर सो गए
ठीक रात के 9 बजे दास को उन्हीं घुंघरुओं की आवाज और उसके पीठ पर किसी के छूने की स्पर्श महसूस हुए पर दास इस बार इस बात को नजर अंदाज कर कर सो गया
अब इस पैरानॉर्मल एक्टिविटी की दास को आदत लग चुकी थी उसकी जिंदगी अब साफ और बहुत क्लियर चल रही है जो भी हो उस चीज से दास को कोई नुकसान न होना डर को थोड़ा थोड़ा खत्म कर गया
नानी के मायके का वो सुनसान रास्ता
इस हादसे के कुछ दिनों बाद दास अपनी नानी के साथ उनके मायके गया। गाँव का माहौल नया था और दास अपनी धुन में घूमते-घूमते कब नानी का हाथ छोड़कर गाँव के बाहर उस सुनसान तिराहे वाले पक्के रास्ते पर निकल गया, उसे खुद अंदाज़ा नहीं हुआ। वह रास्ता एकदम सन्नाटे से भरा था, जिसके दोनों तरफ घने झाड़ और पेड़ थे।
दास अकेले रास्ते पर चल ही रहा था कि अचानक सामने से तेज़ रफ्तार में एक बड़ा सा ट्रक आया। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, दास सीधे उस भारी-भरकम ट्रक से टकरा गया। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि कोई भी आम बच्चा होता तो बच नहीं पाता, लेकिन यहाँ एक बार फिर वही अजीब चमत्कार हुआ।
दास सड़क पर दूर जाकर गिरा, पर जब लोग चिल्लाते हुए दौड़े और उसे उठाया, तो देखा कि इतने बड़े एक्सीडेंट के बाद भी दास के सिर पर बस एक छोटी सी चोट लगी थी और खून का एक कतरा तक नहीं निकला था। डॉक्टर से लेकर गाँव के लोग तक हैरान थे कि यह बच्चा आखिर साक्षात मौत के मुँह से ऐसे कैसे बच गया।
नाग-नागिन का प्राचीन रहस्यमयी नियम
असल में, वो कोई भूत-प्रेत का साया नहीं था, बल्कि सावन के मौसम का एक सदियों पुराना रहस्यमयी नियम था। उस दिन सावन की शुरुआत में, जब जंगल के पुराने मिट्टी के टीलों और सूखी झाड़ियों के बीच रहने वाले दो नाग-नागिन अपनी पुरानी केंचुली बदलकर पहली बार बाहर निकले थे, तो उनका एक प्राचीन विधान जाग उठा था। नियम यह था कि केंचुली
छोड़ने के तुरंत बाद उनकी पहली नज़र जिस भी इंसान पर पड़ जाए, वे दोनों अपनी पूरी ज़िंदगी उस इंसान की हिफ़ाज़त में लगा देते हैं। उस दिन सावन के पहले ही दिन अनजाने में दास की नज़र उन पर पड़ गई थी और उन साँपों की पहली दिव्य दृष्टि दास पर टिक गई थी।
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छोड़ने के तुरंत बाद उनकी पहली नज़र जिस भी इंसान पर पड़ जाए, वे दोनों अपनी पूरी ज़िंदगी उस इंसान की हिफ़ाज़त में लगा देते हैं। उस दिन सावन के पहले ही दिन अनजाने में दास की नज़र उन पर पड़ गई थी और उन साँपों की पहली दिव्य दृष्टि दास पर टिक गई थी।
यही वजह थी कि वो नाग-नागिन का अदृश्य जोड़ा एक परछाई बनकर दास के पीछे-पीछे चल रहा था। चाहे मेले से लौटते वक्त 35 की स्पीड वाले टेंपो के टायर के नीचे पेट का आना हो,
या फिर नानी के मायके में इस बड़े ट्रक से सीधी टक्कर—जो ताकत किसी अदृश्य दीवार की तरह दास के आगे खड़ी हो जाती थी, वो और कुछ नहीं बल्कि उसी नाग-नागिन की अलौकिक शक्ति का सुरक्षा कवच था। दास को अब समझ आ गया था कि पीठ पर महसूस होने वाला वो स्पर्श किसी भूत का नहीं, बल्कि उसकी रक्षा करने वाले उसी जोड़े का है। इस तरह दास के मन का सारा डर हमेशा के लिए ख़त्म हो गया और वह उस अदृश्य शक्ति के साए में सुकून से अपनी ज़िंदगी जीने लगा।
इस कहानी से सीख (Moral):"प्यारे बच्चों और पाठकों, इस कहानी से हमें एक बहुत बड़ी सीख मिलती है। दास बहुत ज़िद्दी लड़का था और उसकी यही ज़िद उसकी ज़िंदगी को कई बार मौत के बेहद करीब ले आई थी। जैसा कि हमने कहानी के पहले भाग में पढ़ा, वो एक पैरानॉर्मल (रहस्यमयी) साया ही था जो उसके पीछे चल रहा था। लेकिन अंत में हमने देखा कि जहाँ ऊपर वाले का हाथ और उसकी मर्जी होती है, वहाँ कोई भी अंधेरी ताकत या बुरा साया काम नहीं आता।पर इस पूरी कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि कई बार आपकी अपनी ज़िद ही आपको सबसे बड़ी मुसीबत में डाल देती है। दास की ज़िंदगी से हमें सिर्फ इतना सीखना चाहिए कि अपने माता-पिता या बड़ों से किसी चीज़ की माँग करना गलत नहीं है, लेकिन किसी चीज़ के लिए इतनी ज़िद मत करो कि आपकी जान पर बन आए। बड़ों का किसी चीज़ के लिए मना करना, कभी-कभी आपकी ज़िंदगी के लिए बहुत अच्छा और वरदान साबित होता है।"
(पैरानॉर्मल एक्टिविटी समाप्त)
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FAQs
Q1: Paranormal Activity ka matlab kya hota hai?
A: Paranormal activity ka matlab hai aisi darawani ghatna jisko science explain nahi kar sakta, jaise bhoot ka ehsaas hona ya achanak cheezen hilna.
Q2: Kya ye kahani sachhi hai?
A: Nahi, ye kahani puri tarah kalpnik hai. Ye sirf manoranjan ke liye likhi gayi hai.
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