पैरानॉर्मल एक्टिविटी पार्ट 1 | पीठ पर भूत की सच्ची कहानी | Hindi Horror Story

  डिस्क्लेमर: यह कहानी सिर्फ और सिर्फ मनघड़ंत है इस कहानी का कोई भी शब्द अंध विश्वास को बढ़ावा देना नहीं है ये सिर्फ मनोरंजन के लिए लिखी गई काल्पनिक कहानी है इस कहानी का किसी व्यक्ति , या जगह , या नाम से किसी भी तरह का कोई निजी तालुक नहीं रखता है   


     एज 9 इयर्स और वो नजदीक है


1997
1997 इन भिलाई



ये स्टोरी है भिलाई नगर के सेक्टर 6 में एक बच्चा रहता था  उसका नाम था दास 
कहानी शुरू होती है वहा के तेलुगु स्कूल से बच्चा वहां से पैदल 3 क्लास में पढ़ रहा है बात है 1997 की दास का रोजाना स्कूल जाना 
और शाम के 4 बजे तक एक पुराने ब्रिज जो लोहे का बना था उस ब्रिज से होते हुए वापस आ जाना 
ये उसका हर रोज के रूटीन था
पर एक बात तो थी जिसे समझना उसके बस में नहीं था और बाते उसके समझ के बाहर थी सुबह 10 बजे वो अपने स्कूल पैदल 1 कम चला जाता और वापस शाम को 4 बजे आ जाता ।

  • रास्ते में बहुत मस्त मस्ती करते हुए दोस्तों से बाते करते हुए आते जाते दुकानों में चॉकलेट खरीद के खाते हुए बहुत मस्त थी उसकी जिंदगी माता-पिता पास ना होने के वजह को लेकर भी उसे कोई उदासी नहीं थी वो खुश था अपने नाना नानी के साथ 


उन दिनों उस छोटी सी उम्र में किसी को क्या ही पता चलता है ये सब नॉर्मल बातें होती है बड़ों के लिए उसको इतना डर लगता इतना डर लगता था कि मैने शाम के 7 बजे वो बच्चा टॉयलेट जाने के लिए भी अपने नाना को ही बुलाता था

      कोई है पीठ के पीछे जो बार बार छू रहा है

पैरानॉर्मल एक्टिविटी
पैरानॉर्मल एक्टिविटी
 


इतनी सी उम्र में उसके साथ कुछ पैरानॉर्मल एक्टिविटी होता था जिसका उसे समझ में नहीं आता है शाम के 7 बजने के बाद दास के पीठ के पीछे कोई उसे छू रहा है कोई उसके पीठ के पीछे दोनों हाथ रख कर चल रहा है उसे ऐसा महसूस होता था उतनी सी उम्र में किसीको क्या ही पता चलता है 
 

उसका हर रोज डरना अजीब तो था पर उसके नाना नानी के लिए ये नॉर्मल लगता था क्योंकि बच्चों का डरना एक बहुत नॉर्मल बात है 


  • सिर्फ शाम के 7 बजे के बाद डर लगने के सिवा उसके लिए हर चीज बहुत सही थी उसकी दिनचर्या भी रेगुलर कुछ नहीं बदला  अगर कुछ था तो वो रात के वक्त उसके पीठ के पीछे का वो रहस्य जोन्स खुद भी नहीं पता और न किसीको खुल के बता पाना 


उन दिनों कोई मोबाइल भी नहीं होता था बच्चों के पास सुबह सुबह 
डोनाल्ड डक , और अलादीन की कार्टून का एपिसोड और छुट्टियों में शक्तिमान का एपिसोड सिर्फ इतना देखकर और बच्चों के साथ खेल खुद कर दिन भर पढ़ाई कर कर थक जाना और रात को डंक सो जाना


              घुंघरुओं की आवाज और एक तनाव


घुंघरुओं की आवाज
कौन है पीछे



कुछ दिनों बाद बात कुछ बदल गई आज तक सिर्फ दास के पीठ के पीछे कोई छू रहा था कोई हाथ रख कर 7 बजे से साथ चल रहा था 

पर कुछ दिनों बाद बात सिर्फ छूने तक या या महसूस होने तक से बढ़कर 
रात के 9 बजे से रात भर उसे अब घुंघरुओं की आवाज सुनाई देने लगी मतलब पहले सिर्फ महसूस होता था पर अब सीधा सुनाई देने लगा 

घुंघरुओं की आवाज नाना नानी साथ होने के बावजूद भी दास को कोई पीठ पे हाथ मलता रहता है उसे किसी के और अंजान चीज का पास होना महसूस होता है रहता है कोई आत्मा , है या कोई भूत है , या कोई प्रेत है , या कोई चुडैल है 

  • या कोई साया , ये सब सोच में डूब गया दास वो किसी को बता भी नहींपा रहा था वो कभी बताने की कोशिश करता उसके मुंह से ये बाते नही नीकलती था 

ऊपर से  ये एक और नई आफत ये वो घुंघरुओं की आवाज हल्की सी धीमी सी हवाओं के जरिए थोड़ी थोड़ी धीमींधीमी छन.... छनन... छनन छनन..........   उसका डर अंदर ही अंदर घुट घुट के जीने लगा डरने लगा स्कूल जाते वक्त भी उसके साथ किसी का होना अब ये इसके लिए एक अब्नॉर्मल बात हो गई थी किसी न बता पाना एक मजबूरी बन गई थी


         गुमशुदा दास खो गया पर कहा गया कौन लाया 

पैरानॉर्मल एक्टिविटी के साथ जीना रहना सब एक आदत सी हों गई
दास मेला में



फिर कुछ दिनों के बाद दास को उस पैरानॉर्मल एक्टिविटी के साथ जीना रहना सब एक आदत सी हों गई 
1 साल बीत गया एक दिन दास अपने नाना नानी के साथ सेक्टर 9 के दशहरा के दिन रावण दहन देखने के लिए जाते है दास दशहरा की छुट्टी और मेला जाने की बात को लेकर बहुत एसआईटी था क्योंकि उसे घूमने का मौका कभी कभी कभी ही तो मिलता था दास के मन में तो भाई साहब एक ही बात घूम रहीं मै मेला जाऊंगा और वहां बहुत सारे बैलून खरीदूंगा 

बहुत सारे खिलौने खरीदूंगा बहुत चॉकलेट खरीदूंगा , भुट्टा और कचौला खाऊंगा समोसे हम्ममम आज तो बहुत मजा आएगा बोल के वो सुबह से बहुत एक्साइटेड था 

और शाम को जब उसका नाना ड्यूटी से घर आया तो सब मिलकर 
तीनों रिक्शा में  सेक्टर 9 मेला में गए जहां उस उस दिन रावण जलाया जा रहा था 


  • दास और दास के नाना नानी तीनों मिलकर मेला निकल गए आज दास बहुत खुश था तीनों साथ घूमने निकल गए थे
  • वहां जाने के बाद दास वहां का माहौल और वहां के लोगों को और नए नए दुकानों को देखकर बहुत खुश हो गया




सब देखा वहां बहुत कुछ खाने के बाद दास ने अपनी नानी से एक कार का खिलौना दिलाने की मांग की और उसकी नानी ने वो कार जल्दी टूट जाएगा फालतू है मठ को बोलकर टाल दिया 
दास थोड़ा उदास हुआ उसकी नानी ने जब मना किया 

  • बस दास के दिल में वो खिलौना ही घूम रहा था और उसके नाना नानी मेला में रावण जलने का माहौल में कोई हुए थे थोड़ी सी नजर हटी और दुर्घटना घाटी वाली बात हो गई ...... 


बने रहिए इसका भाग 2 में पढ़ेंगे कि आगे क्या हुआ इसका पार्ट 1 पहले तेलुगु और हिंदी में डालने के बाद जल्द ही हम भाग 2 में आगे की कहानी पढ़ेंगे 

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FAQs - Part 1

Q1: Part 1 me Das ke saath kya hua tha?
A: Part 1 me Das ko raat me ghungroo ki awaz sunai deti thi aur peeth par kisi ke haath ka ehsaas hota tha, jisse wo bahut dar gaya tha.

Q2: Ye kahani kahan ki hai?
A: Ye kahani Das ke nani ke gaon aur dashera mele ke aas paas ki hai, jo poori tarah kalpnik hai.

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