LAST CIGARETTE (लास्ट सिगरेट) - भाग 1

अस्वीकरण: यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक है। इस कहानी में इस्तेमाल किए गए नाम, पात्र, स्थान और घटनाएं लेखक की कल्पना की उपज हैं। इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति, समुदाय, संस्था या वास्तविक घटना को ठेस पहुंचाना या अंधविश्वास फैलाना बिल्कुल नहीं है। इसे केवल मनोरंजन और मनोरंजन के उद्देश्य से पढ़ा जाए।






1. पटरियों से निकला अनजान खौफ और इमादिचेरुवु का सन्नाटा






कहाँ से आया? कौन है? क्या है? किसी को कुछ नहीं पता था। अचानक एक ऐसी अदृश्य और खौफनाक बला इस स्टेशन पर दस्तक दे चुकी थी, जिसके बारे में सोचना भी इंसानी समझ के बाहर था। वह बला किसी बंद सुरंग या घने जंगलों से नहीं, बल्कि सीधे इमादिचेरुवु रेलवे स्टेशन के लोहे की पटरियों के बीच से अचानक निकलती है, पलक झपकते ही सामने मौजूद जिंदा इंसान को पूरा का पूरा निगल जाती थी और फिर से उन्हीं पटरियों के भीतर गहरे में समाकर गायब हो जाती है। इस अजीबो-गरीब और डरावनी घटना से रेलवे पुलिस पूरी तरह हैरान थी और आम पब्लिक बुरी तरह परेशान। डर का आलम यह था कि स्टेशन मास्टर का दिल सीने से उतर कर सीधा घुटनों तक आ गया था। हर कोई बस पटरियों को घुंघोंन्नुनी आँखों से देख रहा था, जहाँ मौत चुपचाप रेंग रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ है ही नहीं पर अचानक से डर दिल की धड़कने तेज किसी की मौजूदगी एक डर पैदा हो जा रहा था स्टेशन पर तैनात कर्मचारी भी अब रात के वक्त पटरियों के पास जाने से कतराने लगे थे, क्योंकि उन्हें पता था कि नीचे मौत सोई हुई है।


2. समुद्रनूर एक्सप्रेस और सिगरेट का वो पहला जानलेवा कनेक्शन






अभी लोग इस पहली घटना के सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि अगली रात एक और खौफनाक मंजर देखने को मिला। समय था ठीक रात के 12 बजे, जब घने अंधेरे को चीरती हुई 'समुद्रनूर एक्सप्रेस' स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी। जैसे ही स्टेशन मास्टर के केबिन से उसे ग्रीन सिग्नल मिला, ट्रेन रफ्तार पकड़ते हुए प्लेटफॉर्म से गुजरने लगी। रात का वक्त था, इसलिए प्लेटफॉर्म नंबर 1 बिल्कुल सुनसान और खामोश  था। ट्रेन के जनरल बोगी के पायदान यानी सीढ़ियों पर एक लड़का बैठा हुआ था, जो शायद सफर की थकान मिटाने के लिए हवा खा रहा था। ट्रेन के पीछे की तरफ मुस्तैद रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के जवान अपनी ड्यूटी पर तैनात होकर बोगियों पर नजर रख रहे थे। ट्रेन जैसे ही प्लेटफॉर्म पर लगे 'इमादिचेरुवु' के बड़े से नाम वाले पीले बोर्ड को पार कर के आगे बढ़ ही रही थी, ठीक उसी पल एक भयानक अनहोनी हुई। जनरल बोगी की सीढ़ियों पर बैठा वह लड़का अपनी जेब से माचिस निकालकर सिगरेट जलाने की कोशिश कर रहा था। उसने जैसे ही तीली जलाई, उस हल्की सी रोशनी के चमकते ही पटरियों के भीतर से अचानक वही खौफनाक बला बिजली की रफ्तार से ऊपर उठी। उसने एक झटके में उस लड़के को पकड़ा, अपनी तरफ खींचा और सीधे अपने विशाल मुंह में निगल गई। लड़के को चीखने तक का मौका नहीं मिला। उसे निगलते ही वह बला हवा में ही गायब हो गई। पीछे खड़े आरपीएफ के जवानों ने अपनी आँखों से यह खौफनाक नजारा देखा, लेकिन उनकी अक्ल ने काम करना बंद कर दिया था। उन्हें कुछ समझ ही नहीं आया कि जो कुछ उन्होंने देखा, वह सच था या कोई भयानक भ्रम। या कोई सपना 


3. 'द मिसिंग समवन' की अफवाह और उस बेबस लड़की का दर्द






डर के मारे कांपते हाथों से आरपीएफ के जवान ने तुरंत अपने वॉकी-टॉकी पर स्टेशन मास्टर को इस घटना की खबर दी। वॉकी-टॉकी पर चीखते हुए जब उसने बताया कि ट्रेन के नीचे से कुछ निकला और पैसेंजर को खींच ले गया, तो स्टेशन पर हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जब तक रेलवे का बाकी स्टाफ, पुलिस और लोग दौड़ते हुए उस ट्रैक और प्लेटफॉर्म नंबर 1 के पास पहुंचे, तब तक वहाँ सब कुछ शांत हो चुका था। न तो पटरियों के बीच कोई हलचल थी, न प्लेटफॉर्म पर कोई सुराग था और न ही कोई खून का कतरा। वहाँ सिर्फ एक सन्नाटा था और लोगों के बीच फैलती हुई एक गहरी अफवाह कि 'द मिसिंग समवन' (The Missing Someone) यानी कोई है जो यहाँ से अचानक गायब हो गया है। पर गया कहा वो  क्या था जो उन्हें निगल गया अगली सुबह जब सूरज उगा, तो इमादिचेरुवु स्टेशन का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था। हर तरफ सिर्फ और सिर्फ इसी बात की चर्चा थी कि आखिर रात में हुआ क्या था। पुलिस, रेल कर्मचारी और स्थानीय लोग टोलियां बनाकर बैठे थे और सबके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं। इसी बीच दोपहर में गायब हुए लड़के की गर्लफ्रेंड रोती-बिलखती हुई स्टेशन पहुँच गई। वो पुलिसवालों के सामने हाथ जोड़कर रोए जा रही थी और पागलों की तरह कह रही थी—"वो मुझे छोड़कर कहीं नहीं जा सकता, हम दोनों यहाँ से भागने वाले थे, वो यहीं आस-पास है... मुझे उसकी सिगरेट की महक आ रही है।" उस बेबस लड़की का यह रोना वहाँ मौजूद हर इंसान के कलेजे को चीर रहा था। स्टेशन मास्टर चाहकर भी उस लड़की से आँखें नहीं मिला पा रहे थे, क्योंकि वो जानते थे कि जो चीज़ पटरियों के नीचे चली गई, वो कभी लौटकर नहीं आती।
र प फ़ ने उस लड़किंसे पूछा कि आप अभी तक कहा थी लड़की ने जवाब दिया कि उन्होंने कहा था कि मैं इमादिचेरुवु के अगले स्टेशन में तुम्हारा इंतेज़ार करूंगा मै रात को पहले ही आ जाऊंगा तुम सुबह या दोपहर को इमादिचेरुवु में गाड़ी चढ़ना मै दूसरे स्टेशन में चढूंगा पर यहां आकर देखा तो उसका ना मिलना और लोगों की बातों से मुझे घबराहट सी हो रही है अब मेरा क्या होगा मुझे वो चाहिए लाकर दो

  4. प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर अगली रात का दूसरा भयानक शिकार







लेकिन यह खौफ यहीं रुकने वाला नहीं था। दिन ढला और इमादिचेरुवु स्टेशन पर एक बार फिर अगली काली रात ने दस्तक दी। डर के साए में घिरा प्लेटफॉर्म नंबर 1 रात के सन्नाटे में डूबा हुआ था। तभी एक अनजान आदमी, जो शायद इन सब बातों से बेखबर था, प्लेटफॉर्म पर लगे स्टेशन के नाम वाले बोर्ड के पास आकर खड़ा हुआ। उसने अपनी जेब से सिगरेट निकाली और उसे जलाने की कोशिश करने लगा। जैसे ही उसने माचिस की तीली जलाई, उस अंधेरे में सिगरेट की छोटी सी चिंगारी चमकी। और ठीक उसी वक्त, उसी क्षण, पटरियों के बीच से एक बार फिर वही भयानक काली आकृति ऊपर आया। उसने पलक झपकते ही उस आदमी को दबोचा और अपनी तरफ खींचकर पटरियों के नीचे ले गया। सबकुछ इतनी तेजी से हुआ कि हवा में सिर्फ सिगरेट का धुआं रह गया। इमादिचेरुवु प्लेटफॉर्म 1 में क्या हो रहा है? यह कौन है, क्या है क्या कर रहा है और कहाँ से आई है यह बला? लोग कहा गायब हो रहे है ऐसा कैसे हो सकता है ? किसी को कुछ समझ ही नहीं आ रहा था और सब फिर से अजीबो गरीब   बातें बनाने लगे। नई नई कहानियां बनाने लगे


5. खुद को खो देना और उस अनजान की तलाश

अपने प्यार को खोया
अपने प्यार को खोया



​वो लड़की जिसने अभी-अभी अपने प्यार को खोया था, अब वो पूरी तरह से टूट चुकी थी। उसने अपने होश-ओ-हवास खो दिए थे और अब वो उसी खौफनाक प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर ही रहने लगी थी। दिन हो या रात, वो हर वक्त उसी जगह पर बैठी रहती थी जहाँ उस अनदेखी बला ने उसके प्रेमी को जिंदा निगल लिया था। लोग उसे वहां से जाने को कहते, पर वो किसी की नहीं सुनती। अपने खोए हुए प्यार को वापस पाने की एक धुंधली सी उम्मीद में उसने अपनी पूरी जिंदगी, अपना वक्त और अपनी सांसें उसी प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर कुर्बान कर दी थीं। वो अब कोई आम लड़की नहीं, बल्कि उस खौफनाक स्टेशन पर अपने प्यार की तलाश में भटकती हुई एक जिंदा लाश बन चुकी थी। 

हर रोज एक नई मौत की कहानी हर दिन एक नया माहौल उस इमादिचेरुवु रेलवे स्टेशन में अब ये एक।दिल दहला देने वाली खौफ बनकर सबके दिलो।दिमाग पर हावी हो चुका था

पर हर एक।डर से बढ़कर उस लड़की को सिर्फ अपना प्यार ही।चाहिए था


अब आगे की स्टोरी पार्ट2 में पढ़ेंगे आखिर कार वो।क्या था और उस लड़की का प्यार का क्या हुआ अब आगे की।कहानी।जल्द ही।बने रहिए पार्ट 2 के लिए

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