Part 2 ​[Suspense Fiction] 3 KM Dur: Ek Aisa Darwaza Jo 350 Saal Baad Khula! Part2

 

​पिछले भाग में आपने पढ़ा कि कैसे 24 साल का पेंटर ठेकेदार रघु, रात के 12 बजे अपनी पल्सर 125 से घर लौट रहा था। तभी सड़क पर अचानक आए एक सफेद कुत्ते को बचाने के चक्कर में उसकी गाड़ी स्लिप हुई और वह ठीक उसी पल सड़क पर 350 साल बाद खुले एक गुप्त दरवाज़े के अंदर जा गिरा। वह दरवाज़ा सिर्फ 3 सेकंड के लिए खुला था और रघु के गिरते ही भारी आवाज़ के साथ बंद हो गया। अब जानिए आगे की कहानी...

​9. अंधेरे के बाद का अनोखा उजाला

​जैसे ही वह गुप्त दरवाज़ा बंद हुआ, चारों तरफ एक खौफनाक और गहरा अंधेरा छा गया था। रघु को कुछ समझ नहीं आ रहा था, उसे लग रहा था कि वह किसी गहरे कुएं में गिर चुका है। लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और अंधेरे में ही आगे की तरफ कदम बढ़ाए। धीरे-धीरे वह घना अंधेरा छटने लगा और रघु की आँखों के सामने एक ऐसा दिव्य और चमचमाता उजाला हुआ, जिसकी कल्पना उसने सपने में भी नहीं की थी। यह कोई कुआं या गुफा नहीं थी, बल्कि एक बेहद खूबसूरत और जादुई अनोखी दुनिया थी, 


जिसे राज्यसा ने इस मतलबी इंसानी दुनिया के बीच अपने लिए संजोकर बनाया था।

​10. वो 10 दिनों का कड़ा इम्तिहान

​अचानक इस नई दुनिया में पहुँचकर रघु पूरी तरह हैरान था। उसे नहीं पता था कि इस जादुई दुनिया की राजकुमारी, राज्यसा, कहीं छिपकर हर पल, हर सेकंड उस पर अपनी नज़रें गड़ाए हुए थी। वह रघु को परख रही थी। पूरे 10 दिनों तक रघु उस दुनिया में अकेला रहा और इन 10 दिनों में रघु का एक अलग ही रूप सामने आया। उसने वहाँ के पेड़-पौधों, हवाओं और बेज़ुबान जानवरों के साथ एक गहरा रूहानी रिश्ता बना लिया। जब भी कोई जानवर ज़ख्मी होता, तो रघु उसके दर्द को महसूस करता, उसे सहलाता और उसका इलाज करता। राज्यसा ने देख लिया कि रघु बेहद साफ़ और नेक दिल इंसान है, जिसके भीतर प्रकृति के लिए सच्चा सम्मान और जानवरों के लिए तड़प है। वही उसका 'परफेक्ट मैच' था।

​11. पहली मुलाकात और चौंकाने वाली बातचीत

​10 दिनों का यह कड़ा इम्तिहान पूरा होने के बाद, आखिरकार राज्यसा अपने अलौकिक सौंदर्य के साथ रघु के सामने आई।


उसे देखकर रघु मंत्रमुग्ध रह गया।

रघु (आश्चर्य और आदर से): "तुम... तुम कौन हो? और यह कैसी जादुई जगह है? मैं यहाँ पिछले दस दिनों से भटक रहा हूँ, मुझे लग रहा है मैं किसी दूसरी ही दुनिया में हूँ।"

राज्यसा (मंद मुस्कुराते हुए): 


 "मैं राज्यसा हूँ, रघु। और यह मेरी बनाई हुई दुनिया है। मैं पिछले दस दिनों से तुम्हारे साथ ही थी, तुम्हारी हर हरकत और जानवरों के लिए तुम्हारा यह दर्द, सब देख रही थी।"

रघु (चौंकते हुए): "तुम मुझे देख रही थीं? पर क्यों? और तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?"

राज्यसा: "क्योंकि पूरी दुनिया में सिर्फ तुम्हीं इस दरवाज़े के अंदर आ सकते थे। मैं इस इंसानी दुनिया की नहीं हूँ, रघु। मैं 'स्वप्नलोक' की रहने वाली हूँ, जो इंद्रलोक के पास एक छोटी सी दुनिया है। वहाँ यक्ष-यक्षिणी बसते हैं, पर मेरा दिल वहाँ के किसी युवक में नहीं लगा। मुझे हमेशा से इंसानों से लगाव था। जब मैंने अपने पापा को यह बताया, तो उन्होंने मुझे यहाँ भेज दिया। पर वह जानते थे कि इंसान मतलबी होते हैं, इसलिए उन्होंने यह रास्ता बनाया कि जो सबसे साफ़ दिल का होगा और प्रकृति को समझेगा, वही 3 सेकंड के लिए खुलने वाले दरवाज़े से मुझ तक पहुँचेगा। और वह तुम हो, रघु।"

रघु (भावुक होकर): "लेकिन अब आगे क्या? क्या हम कभी तुम्हारे स्वप्नलोक में वापस जा पाएँगे?"

राज्यसा (उदासी से सिर हिलाते हुए): "नहीं रघु। जिस हाड़-मांस के शरीर से तुम बने हो, उस शरीर के साथ स्वप्नलोक जाना नामुमकिन है। इसीलिए मैंने यह बीच की दुनिया बनाई है, ताकि हम दोनों यहाँ हमेशा साथ रह सकें।"

​12. पवित्र विवाह और पिता का अंतिम फैसला

​रघु ने राज्यसा के इस अद्भुत सत्य को सहर्ष स्वीकार किया। उसी जादुई दुनिया में दोनों का पवित्र विवाह संपन्न हुआ। 


पूरी सृष्टि में वे दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने थे। लेकिन खुशियों के कुछ ही दिनों बाद, कहानी में एक बड़ा मोड़ आया। अचानक स्वप्नलोक से राज्यसा के पिता वहाँ प्रकट हुए। उनके चेहरे पर एक अजीब सी गंभीरता थी। उन्होंने दोनों को पास बुलाया और कहा:

​"तुम दोनों का मिलन नियति था। लेकिन इस दुनिया के नियम अलग हैं। विवाह के बाद, तुम दोनों के पास इस रूप में जीने के लिए सिर्फ एक साल का समय है। इस एक साल में तुम दोनों के बीच कोई शारीरिक संबंध (Physical Attachment) नहीं होगा। तुम्हें सिर्फ एक-दूसरे की आत्मा को समझना होगा और निस्वार्थ प्रेम करना होगा।"


रघु और राज्यसा ने हैरान होकर पूछा: "और उस एक साल के बाद हमारा क्या होगा?"

पिता ने मुस्कुराकर आशीर्वाद देते हुए कहा: "इस एक साल के पवित्र सफर के बाद, जब तुम दोनों इस शरीर को त्यागोगे... तब तुम्हारा अंत नहीं होगा। तुम दोनों फिर से इसी पृथ्वी पर साधारण इंसानी रूप में जन्म लोगे। उस नए जन्म में तुम दोनों की फिर से शादी होगी और तब तुम दोनों बिना किसी बंदिश के, एक बेहद खुशहाल जिंदगी सालों-साल साथ बिताओगे।"

​यह कहकर राज्यसा के पिता अंतर्ध्यान हो गए और रघु-राज्यसा अपनी एक साल की रूहानी यात्रा के लिए एक-दूसरे का हाथ थामकर आगे बढ़ गए।

​[भाग 3 जल्दी ही आएगा, उनके नए जन्म की कहानी जानने के लिए जुड़े रहें!]

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