​श्मशान में आत्माओं की घोषा (Part 1) — रुद्र और यक्षिणी का साया

 

चेतावनी / Disclaimer

यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक (fictional) है। इसका किसी भी व्यक्ति की निजी जिंदगी, जीवित या मृत, या उनके मनोभावों से कोई संबंध नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन है।



Shamshan me athao ki ghosha
Athmao ki ghosha



 

​दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं—एक वो जो भीड़ में रहना पसंद करते हैं, और दूसरे वो जो भीड़ से दूर अपनी ही धुन में जीते हैं। रुद्र दूसरी कैटेगरी का था। कड़क पर्सनालिटी, ऐसी आंखें जो किसी के आगे झुकती नहीं, और एक ऐसा जिगर जो डर शब्द से अनजान था। उसका जिंदगी जीने का एक ही सीधा उसूल था: "मुझे किसी से कोई मतलब नहीं।" वो अकेला रहता था, अकेला घूमता था और उसे अपनी यह तन्हाई सबसे ज्यादा पसंद थी।

​गोवा का सफर और वो रहस्यमयी मंत्र

​रुद्र पेशे से एक पेंटर था और अपनी कला में माहिर था। एक बार उसे गोवा में बन रहे एक नए राम मंदिर की पेंटिंग का कॉन्ट्रैक्ट मिला। इस प्रोजेक्ट के लिए रुद्र के साथ उसकी टीम के 4 लोग और भी गोवा गए थे। पूरी टीम को गांव के अंदर ही रहने के लिए कमरे दिए गए थे। लेकिन रुद्र को तो सबसे अलग और अकेले रहना पसंद था, इसलिए वो सबको छोड़कर गांव के बाहर बने एक पुराने, सुनसान स्कूल में जाकर अकेला सोने लगा।

​गोवा में काम के शुरुआती दिनों में ही, रुद्र के हाथ एक पुराना और रहस्यमयी मंत्र लगा। वो मंत्र था:

"ॐ नमः कामिनी यक्षिणी आगच्छ आगच्छ स्वाहा"


​रुद्र को यह मंत्र सुनने और पढ़ने में बहुत अच्छा लगा। चूंकि उसे अकेले रहना पसंद था, तो इस मंत्र के शब्दों ने उसे अपनी तरफ आकर्षित किया। एक 

Shamshan me athao ki ghosha
Ghosha


स्कूल के उस डरावने और सुनसान कमरे में, रुद्र नशे की धुन में था। उसी बेखुदी और नशे की हालत में, उसने इस मंत्र का पूरे ध्यान से 108 बार जाप कर दिया।

​रुद्र को अंदाजा भी नहीं था कि अनजाने में उसने एक ऐसी शक्ति को जगा दिया है, जिसे संभालना किसी आम इंसान के बस की बात नहीं। मंत्र जागृत हो गया, और कामिनी यक्षिणी की ऊर्जा (Energy) रुद्र की जिंदगी का एक अटूट हिस्सा बन गई।

​गांव वापसी और श्मशान का सन्नाटा

​जब रुद्र को अपने आस-पास उस अजीब सी अलौकिक ऊर्जा और बदलावों का अहसास होने लगा, तो वो अंदर से हिल गया। मंदिर का पेंटिंग का काम खत्म होते ही, वो सब कुछ छोड़-छाड़ कर वापस अपने गांव लौट आया।

​लेकिन अब रुद्र पूरी तरह बदल चुका था, या यूं कहें कि उसके देखने और सुनने का नजरिया बदल चुका था।

​रुद्र के गांव में एक क्रिकेट ग्राउंड था, और उस ग्राउंड के ठीक पास में ही गांव का श्मशान घाट था। अब रुद्र जब भी उस ग्राउंड के पास जाता, तो उसे आम लोगों की तरह सिर्फ सन्नाटा नहीं सुनाई देता था। कामिनी यक्षिणी की उस रहस्यमयी ऊर्जा की वजह से रुद्र की शक्तियां जाग चुकी थीं। अब जब भी वो वहां से गुजरता, उसे श्मशान के अंदर से आत्माओं के तड़पने, रोने और गिड़गिड़ाने की खौफनाक आवाजें साफ-साफ सुनाई देने लगती थीं...

[भाग 1 समाप्त]

क्या रुद्र उन आत्माओं की चीखें सुनकर श्मशान के अंदर जाएगा? कामिनी यक्षिणी की ऊर्जा रुद्र से क्या करवाना चाहती है? जानने के लिए पढ़ते रहिए... भाग 2 कल ठीक इसी समय आएगा!

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