​चोर का नाम बकरा: रात का अंधापन और अनोखी चोरी!

 

Andha chor
Bakara the chor

​1. गांगीरेग शहर और कंपनी का अजीब जुगाड़

​गांगीरेग नाम का एक अनोखा शहर था। इसी शहर में एक ऐसी अतरंगी कंपनी चलती थी, जिसका बिजनेस मॉडल सुनकर किसी का भी दिमाग घूम जाए। यह कंपनी लोगों के घरों और ऑफिसों को 'सिक्योरिटी गार्ड्स' भी देती थी और उन्हीं के यहाँ 'चोरी' भी करवाती थी! कंपनी का नियम बड़ा साफ़ था—अंदर दो अलग-अलग डिपार्टमेंट थे, एक सिक्योरिटी टीम और दूसरा चोर टीम। मज़े की बात यह थी कि दोनों टीमों के कर्मचारियों को एक-दूसरे के बारे में भनक तक नहीं थी कि उनका बॉस एक ही है। कंपनी की पॉलिसी दोनों तरफ से नोट छापने की थी। अगर रात को चोरी नहीं हो पाई (यानी सिक्योरिटी जीत गई), तो कंपनी मकान मालिक को खुश होकर 20,000 रुपये का रिवॉर्ड देती थी। और अगर चोर चोरी करने में कामयाब हो गया, तो मकान मालिक को कंपनी को 25,000 रुपये फीस देनी पड़ती थी।

​2. हीरो 'बकरा' और उसकी रात की कमजोरी

Bakara sirf din me dikhta hai
Jisko sirf andhere me nahi dikhta


​इसी चोर डिपार्टमेंट में एंट्री होती है हमारे हीरो की, जिसका नाम था 'बकरा'। बकरा के साथ एक बहुत अजीब और बड़ी दिक्कत थी—उसे दिन के उजाले में तो सब कुछ बिल्कुल साफ़-साफ़ दिखाई देता था, लेकिन जैसे ही शाम होती और अंधेरा छा जाता, उसकी आँखों के आगे पूरी तरह ब्लैकआउट हो जाता था। यानी उसे रात में दिखना बिल्कुल बंद हो जाता था। लेकिन उसका ईगो और कॉन्फिडेंस सातवें आसमान पर था। उसे खुद को दुनिया का सबसे बेस्ट चोर साबित करना था, इसलिए उसने इस कंपनी को जॉइन किया था। चूंकि चोरों का उसूल होता है कि चोरी सिर्फ रात को ही की जाती है, इसलिए बकरा दिन में अपनी आँखें खुली रखता और रात को अंधेरे में अपनी किस्मत आज़माता था।

​3. पहली चोरी का टास्क और दिन की रेकी


Cori se pehle
Bakara is counting steps

​कंपनी में बकरा को उसकी जिंदगी का पहला टास्क मिला। उसे शहर के एक बड़े ऑफिस से एक कीमती और महंगा लैपटॉप चुराना था। बकरा ने अपना शातिर दिमाग लगाया। वह दिन के उजाले में कंपनी का एक शरीफ नुमाइंदा बनकर उस ऑफिस में घुस गया। चूंकि दिन में उसे सब कुछ बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर दिख रहा था, तो उसने ऑफिस के मेन गेट से लेकर उस टेबल तक की दूरी बड़े ध्यान से नाप ली जहाँ लैपटॉप रखा हुआ था। उसने चलते हुए मन में गिना—"मेन गेट से सीधे 25 कदम... फिर दाईं तरफ 10 कदम... और ठीक सामने टेबल पर लैपटॉप!" उसने यह पूरा नक्शा अपने दिमाग में फिट कर लिया और रात का इंतज़ार करने लगा।

​4. रात का अंधेरा और कदमों का जादू

Step by step
Chori ke liye ander ghus gaya bakara

​रात के ठीक 12 बजे, जब पूरी दुनिया सो रही थी और बकरा की आँखों के आगे उसकी कमजोरी के कारण पूरा अंधेरा छा चुका था, वह उस ऑफिस की खिड़की से अंदर कूदा। बकरा को सामने कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था, पर उसे दिन में गिने हुए अपने कदमों पर पूरा भरोसा था। वह आंखें बंद करके मन में दीवारें टटोलते हुए गिनने लगा—"1, 2, 3... 24, 25... अब यहाँ से राइट टर्न... 1, 2... 9, 10!" जैसे ही ठीक 10 कदम पूरे हुए, बकरा का हाथ सीधे सामने रखी टेबल पर गया। वहाँ कपड़े से ढकी हुई एक भारी सी चीज़ रखी थी। बकरा ख़ुशी से फूला नहीं समाया।

​5. लैपटॉप की जगह पत्थर और "Yes, I am Success!"

Socha tha laptap
Laptap samjh kar pathar


​बकरा को पक्का यकीन था कि उसने अंधेरे को मात देकर असली लैपटॉप ढूंढ निकाला है। उसने बिना कपड़ा हटाए उस भारी चीज़ को अपनी बोरी में डाला और दबे पाँव ऑफिस से बाहर निकल गया। वह सीधे अपनी कंपनी के दफ्तर पहुँचा और वहाँ बने चोर डिपार्टमेंट के ड्रॉप-बॉक्स में उस बोरी को डाल दिया। वह हवा में मुक्का लहराकर पूरी ताकत से चिल्लाया—"Yes, I am success!" और अपनी मूंछों पर ताव देता हुआ चादर तानकर सोने के लिए अपने घर चला गया। लेकिन बकरा इस बात से बिल्कुल अनजान था कि वहाँ कंपनी की ही सिक्योरिटी टीम तैनात थी, जिसने ऐन वक्त पर असली लैपटॉप हटाकर ठीक उसी शेप और वज़न का एक भारी पत्थर कपड़े से ढककर रख दिया था।

​6. सुबह का ट्विस्ट और क्लाइंट का 25,000 का पेमेंट

Manager shock employ rock
Morning manager shock


​अगली सुबह जब कंपनी के मैनेजर ने चोर डिपार्टमेंट का ड्रॉप-बॉक्स खोला, तो उसमें से लैपटॉप की जगह एक बड़ा सा पत्थर निकला। तभी बकरा बड़े टशन में चश्मा लगाकर ऑफिस आया। मैनेजर ने पत्थर उसकी टेबल पर पटकते हुए कहा, "अबे ओ बकरे! ये लैपटॉप है?" बकरा के होश उड़ गए। वह रोने ही वाला था कि तभी ऑफिस का फोन बजा। सामने से क्लाइंट चिल्लाया, "मैनेजर साहब, मान गए आपकी कंपनी को! भले ही चोर पत्थर ले गया, लेकिन उसने मेरे टेबल से सामान तो गायब कर ही दिया। आपकी कंपनी की चोर टीम इतनी शातिर है कि अंधेरे में भी हाथ साफ़ कर गई। हमारी पॉलिसी के हिसाब से यह एक सफल चोरी है, इसलिए मैं आपको पूरी 25,000 रुपये की फीस ऑनलाइन ट्रांसफर कर रहा हूँ!" मैनेजर और बकरा दोनों हैरान रह गए; कंपनी का जुगाड़ सच में कमाल कर गया था!

​7. बकरा का महा-सम्मान और नई नौकरी

Bakara bana best employ
Best employ award


​मैनेजर ने फोन रखा और उठकर बकरा को गले लगा लिया। मैनेजर ने पूरी कंपनी के सामने बकरा के लिए तालियाँ बजवाईं और उसे एक शानदार "बेस्ट एम्प्लोई अवार्ड" दिया। मैनेजर ने माइक पर कहा, "दोस्तों, रात को आँखें न दिखने के बावजूद बकरा ने अपनी पूरी वफादारी से ड्यूटी निभाई। पत्थर हो या लैपटॉप, कंपनी की पॉलिसी के हिसाब से चोरी कामयाब रही और क्लाइंट ने खुश होकर 25,000 रुपये पे किए हैं!" बकरा की इस जाँबाज़ी और दिन की तेज़ नज़र को देखते हुए, कंपनी ने उसे चोर डिपार्टमेंट से प्रमोट कर दिया। बकरा को पूरे सम्मान के साथ डे-शिफ्ट (दिन की नौकरी) में "क्लाइंट्स डीलिंग का हेड सुपरवाइजर" बना दिया गया। अब बकरा दिन के उजाले में शान से बड़ी-बड़ी कंपनियों से डील करता है और गांगीरेग शहर का सबसे मशहूर और सम्मानित ऑफिसर बन चुका है!

© Copyright: Yesudas

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