श्मशान में आत्माओं की घोषा (भाग 2)
| Shamshan me athmao ki ghosha |
दुनिया की सबसे खौफनाक जगह वो नहीं होती जहाँ अंधेरा हो, बल्कि वो होती है जहाँ सन्नाटा खुद चीखने लगे।
रुद्र के कदम क्रिकेट ग्राउंड को पार कर उस सूनी, पथरीली जमीन की तरफ बढ़ गए जो सीधे श्मशान के पिछले हिस्से से सटी नदी की ओर जाती थी। हवा में एक अजीब सा भारीपन था।
श्मशान के किनारे उगी उन अजीब, कँटीली जंगली झाड़ियों के बीच जमीन पर छोटे-छोटे पीले रंगे के जहरीले फल
| Athmao ki ghosha |
बिखरे पड़े थे, मानो वो किसी आने वाली अनहोनी का संकेत दे रहे हों।
रुद्र के कदम थमे नहीं। जैसे ही उसने नदी के किनारे पहुंचकर अपना पैर उस ठंडे, मटमैले पानी में रखा, पूरे श्मशान में एक अदृश्य कंपन सा हुआ। पानी की सतह पर कामिनी यक्षिणी की ऊर्जा नीली रहस्यमयी तरंगों की तरह फैल गई।
रुद्र की आँखें पूरी तरह बदल चुकी थीं—उनमें एक अजीब सा सन्नाटा और अलौकिक शक्ति की चमक थी। कामिनी यक्षिणी की वो ऊर्जा अब पूरी तरह उसके दिमाग पर हावी हो रही थी।
1. दोस्त की एंट्री
तभी उस सन्नाटे को चीरती हुई एक पुरानी मोटरसाइकिल की आवाज गूंजी। रुद्र का एक जिगरी दोस्त उसे ढूंढते हुए वहां आ पहुँचा था।
रुद्र को इस सुनसान श्मशान की नदी के पास अकेला खड़ा देख उसके रोंगटे खड़े हो गए। उसने तुरंत बाइक खड़ी की और चिल्लाया:
"रुद्र! पागल हो गया है क्या? इस वक्त यहाँ श्मशान की नदी में क्या कर रहा है? बाहर आ!"
2. खौफनाक मंजर
लेकिन रुद्र पर जैसे किसी बात का कोई असर नहीं हो रहा था। उसने पलटकर धीमी गति से अपने दोस्त की तरफ देखा।
तभी नदी का पानी अचानक खौलने लगा।
पानी के भीतर से कई धुंधली आकृतियां और रूहानी साए उभरने लगे।
वह श्मशान में भटकने वाली उन बेबस आत्माओं के साए थे जो सदियों से मुक्ति के लिए तड़प रही थीं। कामिनी यक्षिणी की शक्ति ने रुद्र को उन आत्माओं की आवाजें सुनने और उनसे जुड़ने का जरिया बना दिया था।
हवा में अचानक कई डरावनी आवाजें गूंजने लगीं—"रुद्र... हमें बचाओ... रुद्र... मदद करो..."
3. एक भयानक चेतावनी
रुद्र का दोस्त उसे खींचकर बाहर निकालने के लिए जैसे ही आगे बढ़ा, हवा का एक बर्फीला झोंका उससे टकराया। झाड़ियों के पास की जमीन से धुंधली, कंकाल जैसी अदृश्य उंगलियां उन पीले फलों को उठाने लगीं, मानो कोई प्राचीन शक्ति जाग रही हो।
रुद्र ने बेहद भारी और बदली हुई आवाज में अपने दोस्त से कहा:
"पीछे हट जाओ... इन्हें रोकना अब मेरे वश में भी नहीं है। श्मशान की आत्माओं ने घोषणा कर दी है... और कामिनी यक्षिणी अपना भोग मांगने आ रही है।"
यह सुनते ही रुद्र के दोस्त के पैरों तले जमीन खिसक गई। नदी के बीचों-बीच पानी का एक बवंडर उठने लगा था, और उस बवंडर के बीच से एक बेहद खूबसूरत लेकिन डरावनी परछाई रुद्र की तरफ बढ़ने लगी...
[भाग 2 समाप्त]
क्या रुद्र का दोस्त उसे उस यक्षिणी के चंगुल से बचा पाएगा? क्या श्मशान की ये आत्माएं रुद्र को अपना गुलाम बना लेंगी? जानने के लिए पढ़ते रहिए... भाग 3 कल ठीक इसी समय आएगा!
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